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गन्ना निदेशालय ः कम स्टाफ और आठ कमरों में सिमटा तामझाम
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Thu, 12 May 2016 11:48 PM IST
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गन्ना निदेशालय
- फोटो : अमर उजाला
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एक तरफ जहां गन्ने की फसल के प्रति किसानों का मोह घटता जा रहा है, वहीं गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग निदेशालय का हाल अच्छे नहीं हैं। छह साल से निदेशालय महिला आईटीआई के आठ कमरों में किसी तरह से चल रहा है। गन्ना आयुक्त के पास लेबर कमिश्नर का चार्ज है, जिस वजह से वे हफ्ते में एक दो बार ही निदेशालय में बैठ पाते हैं।
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निदेशालय में अपर आयुक्त, संयुक्त आयुक्त से लेकर गन्ना निरीक्षक तक के पद खाली हैं। जिसके चलते निदेशालय का कामकाज बेहद सुस्त गति से चल रहा है। निदेशालय को लेकर शासन भी गंभीर नहीं दिखाई पड़ता है। दिलचस्प बात है कि जिस जिले में गन्ना निदेशालय है, वहीं गन्ने का रकबा बढ़ने के बजाए लगातार कम होता जा रहा है।
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राज्य गठन के समय उप गन्ना आयुक्त कार्यालय को गन्ना निदेशालय में तब्दील किया गया था। वर्ष 2010 में काशीपुर में आईआईएम की स्थापना के बाद निदेशालय को उसके भवन से हटाकर महिला आईटीआई में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि दो साल के लिए ही भवन को आईआईएम के लिए अधिग्रहित किया गया था, लेकिन भवन निर्माण में देरी की वजह से अब भी आईआईएम निदेशालय भवन में चल रहा है।
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महिला आईटीआई के आठ कमरों में गन्ना निदेशालय का संचालन किया जा रहा है। लेकिन निदेशालय बनने से आज तक केवल कामचलाऊ व्यवस्था ही चल रही है। गन्ना आयुक्त का प्रभार आनंद श्रीवास्तव के पास है, लेकिन लेबर कमिश्नर का चार्ज होने की वजह से वह निदेशालय को कम समय ही दे पाते हैं।
अपर गन्ना आयुक्त, संयुक्त गन्ना आयुक्त, उपगन्ना आयुक्त, सहायक गन्ना आयुक्त, प्रचार अधिकारी, सांख्यिकी अधिकारी, सहायक चीनी आयुक्त जैसे अहम पद खाली चल रहे हैं। उपगन्ना आयुक्त के एक पद पर आरबी वर्मा तैनात हैं, जबकि दूसरा पद खाली है। ये सभी पद स्थाई हैं और काफी समय से खाली रहने की वजह से निदेशालय का कामकाज प्रभावित होता है। अफसरों के अलावा गन्ना विभाग में गन्ना विकास निरीक्षक के 43, गन्ना पर्यवेक्षक के 52 पद खाली चल रहे हैं।
8 चीनी मिल, करीब 300 करोड़ का बकाया
गन्ना निदेशालय के दायरे में पहले दस चीनी मिलें थीं, जिनमें से अब आठ ही मिलें रह गई हैं। इन मिलों की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। आठ मिलों ने किसानों का करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान करना है। यूएसनगर की चार मिलों ने अकेले 119 करोड़ रुपयों का भुगतान किसानों को करना है।
87 हजार हेक्टेयर रह गया गन्ने का रकबा
गन्ने की एवज में चीनी मिलें समय पर किसानों को भुगतान नहीं कर रही हैं। जिस वजह से गन्ने की फसल के प्रति किसानों का मोह कम होता जा रहा है। आंकड़ों को देखें तो तीन साल पहले गन्ने का रकबा प्रदेश में 1 लाख 7 हजार हेक्टेयर था। जो घटकर वर्तमान में 87 हजार हेक्टेयर पहुंच चुका है। अकेले यूएसनगर में 45 लाख हेक्टेयर से घटकर रकबा 28 हजार हेक्टेयर में सिमटकर रह गया है। अफसर भी मानते हैं कि गन्ने के प्रति किसानों का रुझान घटा है। अब गन्ने के बजाए किसान धान, गेहूं और अन्य फसलों को बो रहा है।
प्रभारी उप गन्ना एवं चीनी आयुक्त आरबी वर्मा कहते हैं कि स्टाफ और जगह की कमी से काम के दिक्कतें होती हैं। विभागीय पुनर्गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। गन्ने की फसल के प्रति किसानों की दिलचस्पी घटी है। जिसका कारण चीनी मिलों की तरफ से समय पर भुगतान न करना है। फिलहाल निदेशालय महिला आईटीआई के कमरों के ही संचालित हो रहा है।