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स्कूल बंक कर घूमने निकले, हवालात में गुजरा दिनभर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रपुर
Updated Sun, 14 Feb 2016 12:40 AM IST
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बरेली के कान्वेंट स्कूल में पढ़ने वाले नवीं कक्षा के छह छात्रों को स्कूल बंक कर मौजमस्ती के लिए निकलना भारी पड़ गया। बरेली से बिना हेलमेट दो स्कूटी और एक बाइक में फर्राटा भरते हुए 84 किलोमीटर का सफर तय कर छात्र रुद्रपुर पहुंच गए। इससे पहले कि वे और आगे जाते, हेलमेट चेकिंग कर रहे क्यूआरटी के हत्थे चढ़ गए। कंधे में बस्ते लादे छात्र पुलिस से छोड़ने और परिजनों को नहीं बताने की मिन्नतें करते रहे। पुलिस ने स्कूल ड्रेस पहने छात्रों को आठ घंटे तक कोतवाली में बिठाए रखा और परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
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शनिवार सुबह 11 बजे नैनीताल मार्ग पर ट्रैफिक पुलिस के साथ चेकिंग कर रहे क्यूआरटी जवानों ने यूपी नंबर की दो स्कूटी और एक बाइक में स्कूल ड्रेस में सवार बिना हेलमेट छह छात्रों को रोका। उन्होंने खुद को बरेली का बताते हुए कहा कि वे बिशप कोनरेड स्कूल कैंट बरेली में नवीं कक्षा के छात्र हैं। शनिवार को लेट पहुंचने पर स्कूल गेट बंद हो गया था। जिसके बाद उन्होंने घूमने का प्लान बनाया और रुद्रपुर आ गए। उन्होंने जवानों से पैसे लेकर छोड़ने और परिजनों को जानकारी नहीं देने की गुहार लगाई। जवानों ने छोड़ने के बजाए कोतवाली भिजवा दिया। पुलिस ने छात्रों के परिजनों को सूचित करते हुए बच्चे ले जाने को कहा। करीब आठ घंटे तक सभी बच्चे कोतवाली में बैठकर परिजनों का इंतजार और अपने गलत कदम पर पछतावा भी करते रहे। मुख्यमंत्री के दौरे की वजह से कोतवाली में न कोतवाल थे और न ही दरोगा। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम निपटने के बाद कोतवाल जेसी पाठक कोतवाली पहुंचे। उन्होंने कप्तान के संज्ञान में मामला लाने के बाद बच्चों के साथ ही परिजनों को लताड़ लगाई। परिजनों ने बच्चों के मामले में संवेदनशीलता का परिचय देने और परिजनों के आने तक बच्चों को सुरक्षित रखने पर पुलिस की सराहना की। कोतवाल पाठक ने बताया कि अभिभावकों को बच्चों के प्रति लापरवाही बरतने पर डांट लगाई गई और गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया। प्रति छात्र पांच सौ रुपये परिजनों से जुर्माना भी वसूला गया।
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कोई अनहोनी होती तो कौन रहता जिम्मेदार
रुद्रपुर। नवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र मौजमस्ती करते हुए बरेली से रुद्रपुर आ पहुंचे। बच्चों की कारस्तानी से पुलिस के साथ ही अभिभावक भी खासे हैरान रह गए। घर से पढ़ाई करने के लिए निकले छात्र स्कूल बंक कर घूमने फिरने निकल गए। जितनी गलती बच्चों की है, उतनी ही अभिभावकों की भी है। पढ़ने की उम्र में बच्चों को पेट्रोल की टंकी फुल कराकर बाइक और स्कूटी थमा दी गई। सड़क पर वाहन दौड़ाने वाले बच्चों के पास लाइसेंस तक नहीं था। लेकिन अगर बच्चों का एक्सीडेंट या अपहरण हो जाता तो उसके जिम्मेदार किसे माना जाता। कोतवाल जेसी पाठक ने अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों के साथ कोई घटना हो जाती तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती।
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