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रुद्रपुर: नाबालिग साली से दुष्कर्म के आरोपी जीजा को 20 साल का कारावास, वर्ष 2020 में लूटी थी अस्मत

Sat, 26 Sep 2026 05:12 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर Published by: Heera Updated Sat, 26 Sep 2026 05:12 PM IST
सार

रुद्रपुर में अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो) संगीता आर्य की अदालत ने नाबालिग साली के साथ दुष्कर्म के आरोपी जीजा को 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। 

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Brother-in-law sentenced to 20 years in prison for misdeed  minor sister-in-law in rudrapur
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

 

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रुद्रपुर। अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो) संगीता आर्य की अदालत ने नाबालिग साली के साथ दुष्कर्म के आरोपी जीजा को 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका भी खारिज कर दी है।

वर्ष 2020 में रुद्रपुर निवासी एक व्यक्ति ने तहरीर देकर बताया था कि उसकी सबसे बड़ी बेटी की शादी शांहजहांपुर निवासी अंकुर के साथ की थी। शादी के कुछ समय बाद वह बेटी को लेकर रुद्रपुर में ही किराये पर रहने लगा। इसी बीच उसका घर लाना जाना लगा रहा। नौ फरवरी को उनकी बेटी अपने ससुराल गई हुई थी।

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आरोप था कि अंकुर नाबालिग साली को मॉल घुमाने के बहाने अपने किराये के कमरे पर ले गया। वहां दरवाजा बंद कर उसके साथ दुष्कर्म किया। किसी को बताने पर जान से मारने और परिवार को खत्म करने की धमकी दी गई। परिजनों को पीड़िता की स्थिति संदिग्ध लगी तो पूछताछ में उसने घटना की जानकारी दी। मामले में पुलिस ने धारा 376 और पॉक्सो में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो) संगीता आर्य की अदालत में हुई। जहां अभियोजन पक्ष ने करीब आठ गवाह पेश किए। ब
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चाव पक्ष ने पारिवारिक अनबन, दहेज विवाद और रंजिश के चलते झूठा फंसाने की दलील दी, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़िता के बयान को विश्वसनीय माना। न्यायाधीश संगीता आर्य ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए उसकी जमानत निरस्त कर जेल भेजने के आदेश दिए। वहीं, अदालत ने पीड़िता को जुर्माने की राशि में से 30 हजार रुपये देने के निर्देश दिए हैं और साथ ही राज्य सरकार को एक लाख रुपये प्रतिकर के रूप में पीड़िता को देने को कहा गया है।

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