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रुद्रपुर समागम में मानवता का पाठ पढ़ा गए थे बाबा हरदेव
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Sat, 14 May 2016 12:20 AM IST
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17 मार्च की शाम को आयोजित समागम में पहुंचे बाबा हरदेव सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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संत निरंकारी मिशन के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह का अंतिम समागम देवभूमि उत्तराखंड में हुआ था। बाबा हरदेव जी के चरण तराई की धरती पर अंतिम बार 17 मार्च को पड़े थे। यहां नैनीताल हाईवे पर मंडी निदेशालय के विशाल मैदान में 50 हजार से अधिक अनुयायियों ने बाबा का आशीर्वाद लिया था।
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इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़, रुद्रपुर विधायक राजकुमार ठुकराल सहित कई नामी लोग शामिल हुए। भारत में बाबा का यह अंतिम समागम था। इस समागम के बाद से ही बाबा विदेश में अपने अनुयायियों को आशीर्वाद देने चले गए। रुद्रपुर में बाबा का यह दूसरा बड़ा समागम था। इससे पहले वह 30 दिसंबर 2006 को भी रुद्रपुर के गांधी पार्क मैदान में पधारे थे। उस समय भी 50 हजार से अधिक अनुयायियों का हुजूम बाबा के दर्शनों को उमड़ा था।
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17 मार्च के समागम में यहां पर उत्तराखंड सहित पांच प्रांतों जिनमें दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ के अनुयायी भी पहुंचे थे। अपने प्रवचन में बाबा ने हमेशा लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। बाबा हरदेव का हमेशा यही संदेश रहा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। बाबा ने 17 मार्च के रुद्रपुर समागम में सीरिया में चल रहे कत्लेआम का उदाहरण दिया था कि आज इंसान इंसानियत भूलकर इंसान को ही मारने पर तुला है। बाबा ने कहा था कि यह सृष्टि के लिए आने वाला समय बहुत घातक होगा। समागम में हजारों लोगों ने निरंकारी मिशन का ज्ञान लिया था।
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तराई के छोटे-छोटे गांवों में भी घूमे बाबा
17 मार्च को दिल्ली से सुबह रुद्रपुर को अपने काफिले के साथ बाबा जब प्रस्थान कर रहे थे तो उन्होंने तराई के कई छोटे-छोटे गांवों में भी अपना काफिला रुकवाकर लोगों से मुलाकात की। इसमें जसपुर, किच्छा के गिदपुरी गांव, गदरपुर में भी बाबा अपने अनुयायियों से मिले।
रक्तदान के लिए उत्तराखंड में अव्वल रहा मिशन
संत निरंकारी मिशन की ओर से समय-समय पर चलाए गए रक्तदान शिविर में उत्तराखंड के अनुयायी बढ़ चढ़कर रक्तदान करते थे। इसमें संत निरंकारी मिशन को उत्तराखंड में राज्य सरकार की ओर से प्रथम पुरस्कार भी मिला। यह पुरस्कार वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा मिशन के अनुयायी सुरेंद्र चावला को दिया गया था।
तराई में भी शोक की लहर, अनुयायी दिल्ली रवाना
संत निरंकारी मिशन के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह जी की मौत की खबर सुनते ही तराई में भी शोक है। जिसने भी सुना वही अवाक रह गया। अनुयायी एक दूसरे से संपर्क करते हुए दिल्ली के बुराड़ी रोड स्थित मिशन के मुख्यालय की ओर कूच कर गए। रुद्रपुर शहर के कई बड़े उद्योगपति भी जो मिशन से जुड़े थे वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
निर्विवाद रहा निरंकारी मिशन
1971 में निरंकारी मिशन की कमान संभालने के बाद बाबा हरदेव सिंह की अगुवाई में जहां बड़ी संख्या में लोग मिशन पर आस्था व्यक्त करते हुए जुड़े वहीं विश्व में 100 से अधिक शाखाएं खोली गईं। इनमें आज तक कि किसी भी मिशन की शाखा में कोई विवाद नहीं रहा। इसके पीछे बाबा हरदेव सिंह की शिक्षा और दीक्षा ही मानी जाती है कि वह हमेशा अनुयायियों को इंसानियत का पाठ पढ़ाते थे, जबकि वर्तमान में कई धार्मिक संगठन विवादों में चले रहे हैं।