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अतिक्रमण हटाने पहुंचा प्रशासन बैरंग लौटा
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर
Updated Sat, 17 Jun 2017 12:05 AM IST
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काशीपुर घटनास्थल पर जमा भीड़ से जानकारी लेते अधिकारी।
- फोटो : amar ujala
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ग्राम समाज की भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंचे प्रशासन को भूमि पर काबिज अनुसूचित जाति के लोगों और ग्रामीणों के कड़े विरोध के चलते बैरंग लौटना पड़ा। हालांकि ग्रामीणों का एक धड़ा प्रधान के पक्ष में था।
शुक्रवार को काशीपुर तहसील के कानूनगो मोहन लाल बांसखेड़ा कला में ग्राम समाज की भूमि से अवैध कब्जे को हटाने पहुंचे। लेकिन वर्षों से काबिज अनुसूचित जाति के पक्ष में ग्रामीणों के कड़े विरोध के चलते उनको बैरंग वापस लौटना पड़ा है। अलीगंज मार्ग पर विद्यालय के पास ग्राम बांसखेड़ा कला में ग्राम समाज का एक भूखंड है। इस पर अनुसूचित जाति के सात आठ लोगों का कब्जा है। जिस पर झोपड़ियां पड़ी है। इन परिवारों का मुख्य धंधा ताड़ के पेड़ो से रस निकाल कर गुड़ बनाना है। ग्राम प्रधान कमलेश ने प्रशासन से भूखंड से कब्जा हटाने की मांग की। प्रशासन ने शुक्रवार को कानूनगो मोहन लाल यादव, पटवारी भगत सिंह, विनीत राम सिंह समेत बड़ी संख्या में पुलिस को महिला फोर्स के साथ भेजा। पुलिस के आने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के लोग भूमिहीनों के पक्ष में जमा हो गए। जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई। भूमिहीनों का कहना था कि वह 40 साल से भूमि पर काबिज हैं। अनुसूचित जाति के लोग प्रशासन का साथ देने वालों को खरी खोटी सुना रहे थे। एक ने कहा प्रभावशाली लोग सरकारी भूमि पर कब्जा करते हैं। तब प्रशासन को दिखाई नहीं देता है। अनुसूचित जाति के लोग सिर छुपाने के लिए सरकारी भूमि पर झोपड़ियां बनाते हैं तो प्रशासन सक्रिय हो जाता है। काफी देर तक चली बहस के बाद अधिकारी और फोर्स लौट गए।
सात परिवार है काबिज
काशीपुर। ग्राम समाज की भूमि पर ज्ञानवती, राजू, सोनू, दीपक, रिंकू, सुरजीत, राजेश, पवन झोपड़ी बना कर रह रहे हैं। ज्ञानवती ने कहा कि वह तीस-चालीस साल से यहां रहती है। प्रधान उन्हें पट्टा देने का आश्वासन देते आए हैं। अब उजाड़ रहे हैं। उसने वर्षों पुरानी खजूर की गुड़ बनाने की भट्टियां दिखाते हुए कहा कि यह वर्षों पुरानी भट्टी है।
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शुक्रवार को काशीपुर तहसील के कानूनगो मोहन लाल बांसखेड़ा कला में ग्राम समाज की भूमि से अवैध कब्जे को हटाने पहुंचे। लेकिन वर्षों से काबिज अनुसूचित जाति के पक्ष में ग्रामीणों के कड़े विरोध के चलते उनको बैरंग वापस लौटना पड़ा है। अलीगंज मार्ग पर विद्यालय के पास ग्राम बांसखेड़ा कला में ग्राम समाज का एक भूखंड है। इस पर अनुसूचित जाति के सात आठ लोगों का कब्जा है। जिस पर झोपड़ियां पड़ी है। इन परिवारों का मुख्य धंधा ताड़ के पेड़ो से रस निकाल कर गुड़ बनाना है। ग्राम प्रधान कमलेश ने प्रशासन से भूखंड से कब्जा हटाने की मांग की। प्रशासन ने शुक्रवार को कानूनगो मोहन लाल यादव, पटवारी भगत सिंह, विनीत राम सिंह समेत बड़ी संख्या में पुलिस को महिला फोर्स के साथ भेजा। पुलिस के आने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के लोग भूमिहीनों के पक्ष में जमा हो गए। जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई। भूमिहीनों का कहना था कि वह 40 साल से भूमि पर काबिज हैं। अनुसूचित जाति के लोग प्रशासन का साथ देने वालों को खरी खोटी सुना रहे थे। एक ने कहा प्रभावशाली लोग सरकारी भूमि पर कब्जा करते हैं। तब प्रशासन को दिखाई नहीं देता है। अनुसूचित जाति के लोग सिर छुपाने के लिए सरकारी भूमि पर झोपड़ियां बनाते हैं तो प्रशासन सक्रिय हो जाता है। काफी देर तक चली बहस के बाद अधिकारी और फोर्स लौट गए।
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सात परिवार है काबिज
काशीपुर। ग्राम समाज की भूमि पर ज्ञानवती, राजू, सोनू, दीपक, रिंकू, सुरजीत, राजेश, पवन झोपड़ी बना कर रह रहे हैं। ज्ञानवती ने कहा कि वह तीस-चालीस साल से यहां रहती है। प्रधान उन्हें पट्टा देने का आश्वासन देते आए हैं। अब उजाड़ रहे हैं। उसने वर्षों पुरानी खजूर की गुड़ बनाने की भट्टियां दिखाते हुए कहा कि यह वर्षों पुरानी भट्टी है।
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