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नवाचार से साकार होगा आत्म निर्भर भारत का सपना
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डॉ. मणिंद्र मोहन शर्मा।
- फोटो : RUDRAPUR
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पंतनगर। उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद् के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. मणिंद्र मोहन ने बताया कि देश और समाज के विकास में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का महत्व सर्वाधिक है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठनों के आंकड़े बताते हैं कि भारत का शोध और विकास कार्यों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। 2020 में भारत ने अपने जीडीपी का 0.70 प्रतिशत हिस्सा इस पर खर्च किया है और इसे 2022 तक दो प्रतिशत करना सरकार का लक्ष्य है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के अनुसार भारत ने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स-2020 में 48वें स्थान पर आकर शीर्ष 50 देशों की सूची में अपना स्थान दर्ज करा लिया है।
डॉ. मोहन कहते हैं कि नोबेल पुरस्कार विजेता और भारतरत्न भौतिकविद् प्रो. सीवी रमन ने 28 फरवरी 1928 को रमन प्रभाव की खोज की थी। विज्ञान के क्षेत्र में विकास पर चर्चा करने और समाज हित में नई तकनीकों को लागू करने के लिए हर साल इसी दिन भारत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।
उन्होेंने कहा कि कोविड महामारी ने समाज के सभी क्षेत्रों को बुरी तरह से प्रभावित किया है और इसमें शिक्षा भी एक प्रमुख अंग रहा। लॉकडाउन में शिक्षण संस्थानों के बंद होने से से जहां कक्षाएं बंद हुईं तो ऑनलाइन कक्षाएं, शिक्षण सहायक उपकरण, शैक्षिक सॉफ्टवेयर, सामाजिक नेटवर्किंग उपकरणों ने पारंपरिक कक्षाओं के स्वरूप को ही बदल दिया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को देश मे बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार भी सक्रिय है ताकि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा सके। राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए चार प्रमुख संस्थाएं यूकोस्ट, यूबीसी, यूसैक व यूसर्क अच्छा काम कर रही हैं। पांच फरवरी को प्रदेश में साइंस सिटी की स्थापना के लिए राज्य और केंद्र सरकार के बीच एक एमओयू भी हुआ है।
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डॉ. मोहन कहते हैं कि नोबेल पुरस्कार विजेता और भारतरत्न भौतिकविद् प्रो. सीवी रमन ने 28 फरवरी 1928 को रमन प्रभाव की खोज की थी। विज्ञान के क्षेत्र में विकास पर चर्चा करने और समाज हित में नई तकनीकों को लागू करने के लिए हर साल इसी दिन भारत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।
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उन्होेंने कहा कि कोविड महामारी ने समाज के सभी क्षेत्रों को बुरी तरह से प्रभावित किया है और इसमें शिक्षा भी एक प्रमुख अंग रहा। लॉकडाउन में शिक्षण संस्थानों के बंद होने से से जहां कक्षाएं बंद हुईं तो ऑनलाइन कक्षाएं, शिक्षण सहायक उपकरण, शैक्षिक सॉफ्टवेयर, सामाजिक नेटवर्किंग उपकरणों ने पारंपरिक कक्षाओं के स्वरूप को ही बदल दिया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को देश मे बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार भी सक्रिय है ताकि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा सके। राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए चार प्रमुख संस्थाएं यूकोस्ट, यूबीसी, यूसैक व यूसर्क अच्छा काम कर रही हैं। पांच फरवरी को प्रदेश में साइंस सिटी की स्थापना के लिए राज्य और केंद्र सरकार के बीच एक एमओयू भी हुआ है।
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