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पहाड़ के अखरोट की नर्सरी तराई में
ब्यूूराे, अमर उजाला, काशीपुर।
Updated Sun, 19 Jul 2015 02:19 AM IST
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पर्वतीय क्षेत्रों में पैदा होने वाले उन्नत प्रजाति के कागजी अखरोट की पौध तराई की नर्सरी में तैयार हो रही है। राजकीय उद्यान प्रजनन केंद्र (आलू फार्म) काशीपुर की नर्सरी में अखरोट की ग्राफ्टिंग से तैयार पौधे लहलहा रहे हैं। ठंडी जलवायु में उगने वाले फलदार पौधों का तराई की गर्म वातावरण में नर्सरी तैयार करने का प्रयोग सफल रहा है।
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उद्यान प्रजनन केंद्र प्रभारी डा.बृजेश गुप्ता ने बताया कि चौबटिया, सूखी डांग, सतकुमा फार्म से विभिन्न प्रजातियों के बीज मंगा कर जनवरी 2013 में पालीथिन के अलग-अलग थैलियों में उगाए गए थे। जनवरी 2015 में राजकीय उद्यान चौबटिया से कागजी अखरोट के पेड़ों की कलम मंगा कर ग्राफ्टिंग की।
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परीक्षण में बैज विधि की ग्राफ्टिंग सफल पाई गई। डा.गुप्ता ने बताया कि परीक्षण के लिए अखरोट की लगाई गई नर्सरी सफल रही है। अभी लगभग एक सौ पौधे तैयार हो रहे हैं। इनकी बढ़त अच्छी चल रही है। उनको लगाने के लिए पहले चरण में पर्वतीय क्षेत्रों के राजकीय उद्यानों को भेजा जाएगा।
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डिमांड के अनुसार पौध तैयार की जाएगी। डा.गुप्ता ने बताया कि तैयार पौधे कागजी अखरोट के हैं। जिनका छिलका इतना पतला होता है कि हाथ से दबाने पर फट जाता है। यह चार साल बाद फल देने लगेगा। एक पेड़ में दो से ढाई क्विंटल तक अखरोट लगेंगे। व्यवसायिक दृष्टि से यह काफी लाभदायक है।
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गर्म वातावरण के लिए होगा प्रयोग
काशीपुर। डा.बृजेश गुप्ता ने बताया कि नर्सरी के बाद अखरोट के कुछ पौधे भी उद्यान में लगाकर देखे जाएंगे कि गर्म वातावरण में फल आते हैं या नहीं।
फोटो फाइल....17 केएसपी 5 पी..काशीपुर राजकीय उद्यान प्रजनन केंद्र में तैयार अखरोट की पौधे।