{"_id":"63f8e2810f44a83a48006004","slug":"along-with-outsiders-our-own-people-also-opposed-the-naming-of-two-bypass-routes-of-the-city-rudrapur-news-c-8-1-63930-2023-02-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: बाहरी के साथ अपनों ने भी किया शहर के दो बाईपास मार्गों के नामकरण का विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: बाहरी के साथ अपनों ने भी किया शहर के दो बाईपास मार्गों के नामकरण का विरोध
Fri, 24 Feb 2023 09:44 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 24 Feb 2023 09:44 PM IST
विज्ञापन
- विधायक के प्रस्ताव पर पूर्व विधायक की आपत्ति
- कांग्रेस पूर्व जिलाध्यक्ष ने भी औचित्यहीन करार दिया
चंदन बंगारी
रुद्रपुर। शहर के प्रमुख काशीपुर बाईपास और किच्छा बाईपास मार्ग के नामकरण को लेकर राजनीति गरमा गई है। नामकरण को लेकर विधायक शिव अरोरा घिरते नजर आ रहे हैं। विधायक की ओर से दोनों सड़कों का नाम नए सिरे से महापुरुषों के नाम पर रखने के प्रस्ताव पर किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और कांग्रेस कार्यकारी जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा ने आपत्ति जताई है। दोनों का तर्क है कि जब सड़कों का नामकरण कई दशक पहले हो चुका है तो अब नए सिरे से नाम रखने का सुझाव औचित्यहीन है। जबकि विधायक का तर्क है कि सरकारी अभिलेखों के साथ ही आम चलन में इन सड़कों के नाम काशीपुर और किच्छा बाईपास ही हैं। इनका नाम महापुरुषों के नाम पर रखने का स्वागत होना चाहिए।
दरअसल शहर के प्रमुख डीडी चौक से गाबा चौक तक मार्ग को आम चलन में काशीपुर बाईपास और डीडी चौक से तीनपानी डैम तक मार्ग को किच्छा बाईपास के नाम से जाना जाता है। साढ़े तीन दशक पहले काशीपुर बाईपास का नाम हाकम देवी गावा और किच्छा बाईपास का नाम पंडित रामसुमेर शुक्ल मार्ग रखा जा चुका है। जिसके शिलापट भी सड़क पर मौजूद हैं। इधर, रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा ने दोनों सड़कों के नाम महापुरुषों के नाम पर रखने की वकालत की और प्रस्ताव डीएम को दे दिया। उन्होंने काशीपुर बाईपास का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय और किच्छा बाईपास का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस मार्ग प्रस्तावित किया था। शिव अरोरा का कहना है कि आम बोलचाल के साथ ही सरकारी कागजों में भी दोनों सड़कों का नाम किच्छा और काशीपुर बाईपास है। रुद्रपुर के बाईपास के नाम पर काशीपुर शब्द होना अव्यवहारिक है। इस सड़क के नाम को लेकर हुई गलतफहमी के चलते पिछले दिनों 18 बच्चे प्रतियोगी परीक्षा से वंचित रह गए थे और वे पेपर देने काशीपुर पहुंच गए थे। सड़कों के अव्यवहारिक नाम बदलने चाहिए। कहा कि सड़कों के नामकरण को लेकर दिए प्रस्ताव को लेकर कुछ लोगों ने उनसे आपत्ति जताई है। संवाद
शिलापटों पर नाम, अभिलेखों में गुमनाम
रुद्रपुर। शहर के दो प्रमुख बाईपास का नामकरण भले ही दशकों पहले कर दिया गया हो, लेकिन आम बोलचाल के साथ ही सरकारी अभिलेखों में इन मार्गों को लेकर बनने वाली योजनाओं में काशीपुर बाईपास और किच्छा बाईपास ही लिखा जाता है। लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा निगम, जल संस्थान और नगर निगम में इन सड़कों को लेकर प्रस्तावित योजनाओं में भी यही जिक्र किया जाता है। मेयर रामपाल सिंह का कहना है कि दोनों मार्ग का नाम काशीपुर बाईपास और किच्छा बाईपास ही चलन में रहा और इसे विभागों में पत्राचार में भी इसी तरह इस्तेमाल किया जाता रहा। हालांकि दोनों मार्गों के नामकरण के शिलापट लगे हुए हैं। संवाद
विज्ञापन
कोट:
किच्छा बाईपास का नामकरण भारत सरकार के तत्कालीन उद्योग मंत्री एनडी तिवारी ने उनके पिता पंडित रामसुमेर शुक्ल मार्ग के नाम से किया था और इसका बोर्ड भी डीडी चौक पर लगा है। रुद्रपुर विधायक की ओर से सड़क का नाम बदलने का प्रस्ताव डीएम को देना संज्ञान में आया है। इसको लेकर विधायक से आपत्ति जताई गई है। किसी भी पार्क, सड़क या सार्वजनिक निर्माण का नाम स्वतंत्रता सेनानी, शहीद और सामाजिक कार्यकर्ता के नाम पर रखा गया है तो उसका नाम बदलने की मांग उचित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलामी के प्रतीकों का नाम बदलने की बात कही है।
- राजेश शुक्ला, पूर्व विधायक, किच्छा
काशीपुर बाईपास का नाम यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने उनकी दिवंगत दादी हाकम देवी के नाम पर रखा है। हाकम देवी गावा मार्ग का शिलापट भी सड़क पर लगा हुआ है। उनकी दादी की सामाजिक कार्यों में सक्रियता की वजह से सड़क का नाम रखा गया था। विधायक की ओर से सड़क का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया गया है। इसको लेकर विधायक के समक्ष आपत्ति जताई गई है।
- हिमांशु गावा, कार्यकारी जिलाध्यक्ष कांग्रेस
विज्ञापन
- कांग्रेस पूर्व जिलाध्यक्ष ने भी औचित्यहीन करार दिया
चंदन बंगारी
रुद्रपुर। शहर के प्रमुख काशीपुर बाईपास और किच्छा बाईपास मार्ग के नामकरण को लेकर राजनीति गरमा गई है। नामकरण को लेकर विधायक शिव अरोरा घिरते नजर आ रहे हैं। विधायक की ओर से दोनों सड़कों का नाम नए सिरे से महापुरुषों के नाम पर रखने के प्रस्ताव पर किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और कांग्रेस कार्यकारी जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा ने आपत्ति जताई है। दोनों का तर्क है कि जब सड़कों का नामकरण कई दशक पहले हो चुका है तो अब नए सिरे से नाम रखने का सुझाव औचित्यहीन है। जबकि विधायक का तर्क है कि सरकारी अभिलेखों के साथ ही आम चलन में इन सड़कों के नाम काशीपुर और किच्छा बाईपास ही हैं। इनका नाम महापुरुषों के नाम पर रखने का स्वागत होना चाहिए।
दरअसल शहर के प्रमुख डीडी चौक से गाबा चौक तक मार्ग को आम चलन में काशीपुर बाईपास और डीडी चौक से तीनपानी डैम तक मार्ग को किच्छा बाईपास के नाम से जाना जाता है। साढ़े तीन दशक पहले काशीपुर बाईपास का नाम हाकम देवी गावा और किच्छा बाईपास का नाम पंडित रामसुमेर शुक्ल मार्ग रखा जा चुका है। जिसके शिलापट भी सड़क पर मौजूद हैं। इधर, रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा ने दोनों सड़कों के नाम महापुरुषों के नाम पर रखने की वकालत की और प्रस्ताव डीएम को दे दिया। उन्होंने काशीपुर बाईपास का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय और किच्छा बाईपास का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस मार्ग प्रस्तावित किया था। शिव अरोरा का कहना है कि आम बोलचाल के साथ ही सरकारी कागजों में भी दोनों सड़कों का नाम किच्छा और काशीपुर बाईपास है। रुद्रपुर के बाईपास के नाम पर काशीपुर शब्द होना अव्यवहारिक है। इस सड़क के नाम को लेकर हुई गलतफहमी के चलते पिछले दिनों 18 बच्चे प्रतियोगी परीक्षा से वंचित रह गए थे और वे पेपर देने काशीपुर पहुंच गए थे। सड़कों के अव्यवहारिक नाम बदलने चाहिए। कहा कि सड़कों के नामकरण को लेकर दिए प्रस्ताव को लेकर कुछ लोगों ने उनसे आपत्ति जताई है। संवाद
विज्ञापन
शिलापटों पर नाम, अभिलेखों में गुमनाम
रुद्रपुर। शहर के दो प्रमुख बाईपास का नामकरण भले ही दशकों पहले कर दिया गया हो, लेकिन आम बोलचाल के साथ ही सरकारी अभिलेखों में इन मार्गों को लेकर बनने वाली योजनाओं में काशीपुर बाईपास और किच्छा बाईपास ही लिखा जाता है। लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा निगम, जल संस्थान और नगर निगम में इन सड़कों को लेकर प्रस्तावित योजनाओं में भी यही जिक्र किया जाता है। मेयर रामपाल सिंह का कहना है कि दोनों मार्ग का नाम काशीपुर बाईपास और किच्छा बाईपास ही चलन में रहा और इसे विभागों में पत्राचार में भी इसी तरह इस्तेमाल किया जाता रहा। हालांकि दोनों मार्गों के नामकरण के शिलापट लगे हुए हैं। संवाद
विज्ञापन
कोट:
किच्छा बाईपास का नामकरण भारत सरकार के तत्कालीन उद्योग मंत्री एनडी तिवारी ने उनके पिता पंडित रामसुमेर शुक्ल मार्ग के नाम से किया था और इसका बोर्ड भी डीडी चौक पर लगा है। रुद्रपुर विधायक की ओर से सड़क का नाम बदलने का प्रस्ताव डीएम को देना संज्ञान में आया है। इसको लेकर विधायक से आपत्ति जताई गई है। किसी भी पार्क, सड़क या सार्वजनिक निर्माण का नाम स्वतंत्रता सेनानी, शहीद और सामाजिक कार्यकर्ता के नाम पर रखा गया है तो उसका नाम बदलने की मांग उचित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलामी के प्रतीकों का नाम बदलने की बात कही है।
- राजेश शुक्ला, पूर्व विधायक, किच्छा
काशीपुर बाईपास का नाम यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने उनकी दिवंगत दादी हाकम देवी के नाम पर रखा है। हाकम देवी गावा मार्ग का शिलापट भी सड़क पर लगा हुआ है। उनकी दादी की सामाजिक कार्यों में सक्रियता की वजह से सड़क का नाम रखा गया था। विधायक की ओर से सड़क का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया गया है। इसको लेकर विधायक के समक्ष आपत्ति जताई गई है।
- हिमांशु गावा, कार्यकारी जिलाध्यक्ष कांग्रेस