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कलक्ट्रेट गेट पर देर रात तक धरने पर डटे रहे इंटरार्क श्रमिक, पुलिस तैनात
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रुद्रपुर कलक्ट्रेट गेट पर बुधवार रात बच्चों के साथ धरने पर बैठे इंटरार्क श्रमिक।
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। वेतन की मांग को लेकर बुधवार शाम को डीएम को ज्ञापन सौंपने जा रहे इंटरार्क श्रमिकों को पुलिस ने कलक्ट्रेट गेट पर रोक दिया। कलक्ट्रेट परिसर का गेट बंद करने से नाराज करीब दो सौ लोग विरोध स्वरूप धरने पर बैठ गए। उन्होंने कंपनी प्रबंधन और पुलिस-प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया।
इंटरार्क श्रमिकों ने बीते दिनों वेतन की मांग को लेकर बाल पंचायत और बाल सत्याग्रह किया था लेकिन मांग पूरी न होने पर आक्रोशित श्रमिकों ने शाम को रुद्रपुर कलक्ट्रेट गेट पर बाल पंचायत की। इसी बीच अचानक हुई बारिश में भी बाल पंचायत जारी रही। इसके बाद श्रमिक डीएम को ज्ञापन देने के लिए कलक्ट्रेट में प्रवेश करने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया और कलक्ट्रेट परिसर का गेट बंद कर दिया।
साथ ही कलक्ट्रेट परिसर में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। सीओ अभय सिंह भी मौके पर पहुंचे। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि ज्ञापन देने की सूचना देने के बावजूद जिला प्रशासन का कोई अधिकारी ज्ञापन लेने के लिए नहीं पहुंचा। इसके विरोध में देर रात तक कलक्ट्रेट गेट पर श्रमिकों का धरना जारी रहा।
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श्रमिकों ने कहा कि बारिश में कुछ बच्चों की तबीयत भी खराब हो गई थी लेकिन जिला प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि 14 जुलाई को कंपनी के किच्छा प्लांट के पास आयोजित मजदूर-किसान महापंचायत में इसे भी मुद्दा बनाया जाएगा। धरना देने वालों में दलजीत सिंह, डॉली, पान मोहम्मद, कैलाश भट्ट, शिवदेव सिंह आदि थे।
कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया तो कुर्क होगी कंपनी की संपत्ति
रुद्रपुर। सिडकुल की स्टील प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी में कर्मचारियों के वेतन के बकाए पर जिला प्रशासन ने सख्त निर्णय लिया है। जिलाधिकारी की ओर से कंपनी को एक सप्ताह का नोटिस दिया गया है। रिकवरी नहीं होने पर कंपनी की संपत्ति कुर्क करते हुए बैंक खाते भी सीज किए जा सकते हैं। इसके लिए कंपनी की संपत्तियों का आगणन भी शुरू कर दिया है।
सिडकुल की इंटरार्क कंपनी में श्रमिक व प्रबंधन के बीच कई मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। श्रमिकों का आरोप है कि गैरकानूनी तरीके से उनकी गेटबंदी कर दी गई है। ऐसे में अपने वेतन व अधिकारों के लिए कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। इसी बीच कुछ समय पहले श्रम सचिव ने कंपनी कर्मचारियों की गेटबंदी को अवैध करार देते हुए उन्हें निर्धारित वेतन देने का आदेश दिया था।
श्रम सचिव ने कंपनी प्रबंधन को मार्च से मई के बीच 354 कर्मचारियों के हिस्से के वेतन की धनराशि एक करोड़ चौरासी लाख रुपये का भुगतान करने को भी कहा था। इधर, कंपनी का पक्ष था कि श्रम सचिव के आदेश के संबंध में वैधानिक राय ली जा रही है। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने की दशा में अब जिलाधिकारी ने कंपनी को रिकवरी का नोटिस भेजा है।
जिलाधिकारी युगल किशोर पंत ने बताया कि आरसी जारी कर दी गई है। कंपनी की चल-अचल संपत्ति के बारे में जानकारी प्राप्त की जा रही है। यदि समय से धनराशि नहीं मिली तो कंपनी की भूमि व मशीनों का मूल्यांकन करके कुर्क करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कंपनी के बैंक खातों के बारे मेें भी पता किया जा रहा है।
एएलसी और श्रम सचिव के आदेश को हाईकोर्ट में चैलेंज किया गया है। एएलसी की ओर से रिकवरी के संबंध में आपत्ति दर्ज की गई है लेकिन आपत्तियों की ओर ध्यान नहीं देकर रिकवरी की जल्दबाजी दिख रही है। इस संबंध में हाईकोर्ट ने मंगलवार को भी सुनवाई की है जिसमें फैसला होना है जिसका इंतजार किया जा रहा है। - बीबी श्रीधर, एचआर मैनेजर, इंटरार्क कंपनी, सिडकुल, रुद्रपुर
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इंटरार्क श्रमिकों ने बीते दिनों वेतन की मांग को लेकर बाल पंचायत और बाल सत्याग्रह किया था लेकिन मांग पूरी न होने पर आक्रोशित श्रमिकों ने शाम को रुद्रपुर कलक्ट्रेट गेट पर बाल पंचायत की। इसी बीच अचानक हुई बारिश में भी बाल पंचायत जारी रही। इसके बाद श्रमिक डीएम को ज्ञापन देने के लिए कलक्ट्रेट में प्रवेश करने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया और कलक्ट्रेट परिसर का गेट बंद कर दिया।
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साथ ही कलक्ट्रेट परिसर में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। सीओ अभय सिंह भी मौके पर पहुंचे। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि ज्ञापन देने की सूचना देने के बावजूद जिला प्रशासन का कोई अधिकारी ज्ञापन लेने के लिए नहीं पहुंचा। इसके विरोध में देर रात तक कलक्ट्रेट गेट पर श्रमिकों का धरना जारी रहा।
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श्रमिकों ने कहा कि बारिश में कुछ बच्चों की तबीयत भी खराब हो गई थी लेकिन जिला प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि 14 जुलाई को कंपनी के किच्छा प्लांट के पास आयोजित मजदूर-किसान महापंचायत में इसे भी मुद्दा बनाया जाएगा। धरना देने वालों में दलजीत सिंह, डॉली, पान मोहम्मद, कैलाश भट्ट, शिवदेव सिंह आदि थे।
कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया तो कुर्क होगी कंपनी की संपत्ति
रुद्रपुर। सिडकुल की स्टील प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी में कर्मचारियों के वेतन के बकाए पर जिला प्रशासन ने सख्त निर्णय लिया है। जिलाधिकारी की ओर से कंपनी को एक सप्ताह का नोटिस दिया गया है। रिकवरी नहीं होने पर कंपनी की संपत्ति कुर्क करते हुए बैंक खाते भी सीज किए जा सकते हैं। इसके लिए कंपनी की संपत्तियों का आगणन भी शुरू कर दिया है।
सिडकुल की इंटरार्क कंपनी में श्रमिक व प्रबंधन के बीच कई मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। श्रमिकों का आरोप है कि गैरकानूनी तरीके से उनकी गेटबंदी कर दी गई है। ऐसे में अपने वेतन व अधिकारों के लिए कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। इसी बीच कुछ समय पहले श्रम सचिव ने कंपनी कर्मचारियों की गेटबंदी को अवैध करार देते हुए उन्हें निर्धारित वेतन देने का आदेश दिया था।
श्रम सचिव ने कंपनी प्रबंधन को मार्च से मई के बीच 354 कर्मचारियों के हिस्से के वेतन की धनराशि एक करोड़ चौरासी लाख रुपये का भुगतान करने को भी कहा था। इधर, कंपनी का पक्ष था कि श्रम सचिव के आदेश के संबंध में वैधानिक राय ली जा रही है। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने की दशा में अब जिलाधिकारी ने कंपनी को रिकवरी का नोटिस भेजा है।
जिलाधिकारी युगल किशोर पंत ने बताया कि आरसी जारी कर दी गई है। कंपनी की चल-अचल संपत्ति के बारे में जानकारी प्राप्त की जा रही है। यदि समय से धनराशि नहीं मिली तो कंपनी की भूमि व मशीनों का मूल्यांकन करके कुर्क करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कंपनी के बैंक खातों के बारे मेें भी पता किया जा रहा है।
एएलसी और श्रम सचिव के आदेश को हाईकोर्ट में चैलेंज किया गया है। एएलसी की ओर से रिकवरी के संबंध में आपत्ति दर्ज की गई है लेकिन आपत्तियों की ओर ध्यान नहीं देकर रिकवरी की जल्दबाजी दिख रही है। इस संबंध में हाईकोर्ट ने मंगलवार को भी सुनवाई की है जिसमें फैसला होना है जिसका इंतजार किया जा रहा है। - बीबी श्रीधर, एचआर मैनेजर, इंटरार्क कंपनी, सिडकुल, रुद्रपुर