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अपर गृह सचिव ने किया सेंट्रल जेल का निरीक्षण

Sun, 01 May 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला ब्यूरो ऊधम सिंह नगर Updated Sun, 01 May 2016 12:01 AM IST
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Additional Home Secretary of the Central Prison inspection
निरीक्षण करते अपर गृह सचिव - फोटो : amar ujala

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अपर गृह सचिव रंजीत कुमार सिन्हा ने सेंट्रल जेल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सिन्हा ने सेंट्रल जेल के बैरक, मेस और कैदियों के रहने की व्यवस्था देखी। साथ ही जेल के अभिलेख व जेल कैंप की जमीन के नक्शे भी चेक किए। उन्होंने वरिष्ठ जेल अधीक्षक से सिडकुल की जमीन का लेखाजोखा भी मांगा। अभिलेखों में कमी पाए जाने पर अपर गृह सचिव ने नाराजगी भी जताई और वरिष्ठ जेल अधीक्षक को अभिलेख दुरुस्त करने की हिदायत दी।

  शनिवार शाम करीब पांच बजे अपर गृह सचिव एवं स्वजल परियोजना के डायरेक्टर रंजीत कुमार सिन्हा ने संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) एवं सेंट्रल जेल का निरीक्षण किया। साथ ही कैदियों से मिले और उनकी समस्याएं सुनीं। यहां उन्होंने जेल में सजा काट रहे कैदियों के रहन-सहन और खानपान की व्यवस्था देखी। इसके बाद ट्रेनिंग सभागार में चल रहे जेल के कार्यालय का मुआयना कर विभागीय अभिलेख चेक किए।
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वरिष्ठ जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने बताया कि जेल की भूमि नदी, नालों में घिरी हुई है। खुली जेल में बंदियों की कमी होने से खेती नहीं हो पा रही है। कहा कि जमीन को सुरक्षित करने के लिए तारबाड़ किया जाना जरूरी है। उन्होंने सेंट्रल जेल में कैदियों द्वारा की जा रही फूलों की खेती को भी दिखाया। इस पर अपर गृह सचिव सिन्हा ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक जोशी को जेल भूमि की तारबाड़ का प्रपोजल बनाकर शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने जेल की आय व्यय की भी जानकारी ली। वहां पर जेलर जयंत पांगती, स्वजल परियोजना के जिला प्रबंधक भीम सिंह, परियोजना अधिकारी नीता मिश्रा आदि थे।
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साहब! 14 साल से अधिक सजा वालों को दिला दो माफी 
सितारगंज। अपर गृह सचिव रंजीत सिन्हा के सेंट्रल जेल में कैदियों व बंदियों से मिलने पर बुजुर्ग कैदियों ने रिहाई की गुहार लगाई। उन्होंने कहा साहब! 14 साल से अधिक की सजा काट चुके हैं। जिन्हें माफी दी जा सकती है। कहा कि कई बार शासन में सजा माफी के लिए फाइल लगाई भी गई है। कैदियों ने बताया कि दो साल से उनके होमलीव पर भी रोक लगा दी गई है। इस पर अपर गृह सचिव सिन्हा ने बताया कि किसी भी कैदी को पैरोल पर जाना हो तो मुझे पत्र लिखें। उनकी समस्याओं को शासन में रखने का भी आश्वासन दिया। 
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