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Sports News: खेल सुधारेगा और डेटा भी देगा सेंसर वाला बल्ला, टेक्नोलॉजी से युवाओं के खेल को निखार रहे कोच

Mon, 16 Feb 2026 10:32 AM IST
गायत्री जोशी राजेंद्र सिंह बिष्ट
राजेंद्र सिंह बिष्ट Published by: गायत्री जोशी Updated Mon, 16 Feb 2026 10:32 AM IST
सार

हल्द्वानी में खेल बाजार में सेंसर बैट, बॉल मशीन, ग्रेफाइट हॉकी और हल्के आधुनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नई दिशा दी है।

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A bat with sensors will improve the game and also provide data
सेंसर वाला बैट (सांकेतिक तस्वीर)।

विस्तार

हल्द्वानी के खेल मैदान में फैसलों को तकनीक के साथ लेने पर स्पोर्ट्स बाजार में भी टेक्नोलॉजी ने जगह बनाई है। कभी लकड़ी की हॉकी से शुरू हुआ सफर ग्रेफाइट की हॉकी और सामान्य क्रिकेट बैट की जगह सेंसर वाले बैट बाजार में पहुंच गए हैं। खेल बाजार में आए बदलाव ने खेल को आसान बनाने के साथ खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी निखारा है।

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समय के साथ क्रिकेट को निखारने के लिए बाजार में तमाम उपकरणों ने जगह बनाई है। इसमें बॉल मशीन, सेंसर बैट प्रमुख है। बॉल मशीन को हल्द्वानी की एकेडमी में कोचिंग देने के लिए कोच इस्तेमाल करते हैं। इससे खिलाड़ियों को तेज स्पीड से बिना गेंदबाज के फेंका जाता है। सेंसर बैट से खिलाड़ी अपनी बैटिंग स्किल को बेहतर बनाते हैं। हालांकि सेंसर वाला बैट केवल प्रैक्टिस में इस्तेमाल किया जा सकता है। टेनिस बैट पहले भारी और सामान्य साइज के रहते थे। अब ये काफी हल्के और लेंथ में बड़े बनाए जा रहे हैं जिससे टी-20 फॉर्मेट में पसंद किया जा रहा है। कोच दान सिंह कन्याल बताते हैं कि खिलाड़ियों के पहले की तुलना में आगे बढ़ने के काफी मौके हैं जिसमें तकनीक की अहम भूमिका है। तमाम तकनीक उपकरणों ने खेल को आसान बना दिया है।

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हॉकी कोच गोविंद लटवाल बताते हैं कि पुराने समय में हॉकी की स्टिक लकड़ी की होती थी जिसकी कीमत मात्र 500 से 700 रुपये होती थी। एस्ट्रो टर्फ के मैदान में यह पानी से फूल जाती थी। अब ग्रेफाइट और कार्बन फाइबर हॉकी को खिलाड़ी पसंद कर रहे हैं। इनकी कीमत दो हजार से शुरू होकर 25 हजार रुपये तक है। ये मजबूत होने के साथ वजन में हल्की और शॉट सटीक लगाती है। करीब 20 वर्ष पहले काले रंग की साधारण फुटबॉल आती थी जिसमें सिलाई और ब्लेडर का इस्तेमाल होता था। अब वन पीस पीयू मटीरियल वाली वाटरप्रूफ फुटबॉल का दौर है जिसका वजन भी पहले के मुकाबले 100 से 150 ग्राम कम कर दिया गया है। एक दौर था जब हेवी शूज आते थे लेकिन अब इनकी जगह लाइट वेट जूतों ने ले ली है।

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कारोबारियों का कहना

खेल सामग्री कारोबारी अशोक कनवाल बताते हैं कि फुटबॉल के सामान में भी बड़ा बदलाव हो गया है। कपिल बोरा बताते हैं कि क्रिकेट के सामान में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। बैट में सेंसर के साथ, बॉल मशीन के साथ प्रैक्टिस के लिए नए उपकरण लगातार आ रहे हैं। विदेशों में चिप वाली सेंसर बॉल भी इस्तेमाल होने लगी जिसके जल्द भारतीय बाजार में पहुंचने की उम्मीद है।

स्कीपिंग रोप और स्ट्रेचेबल ड्रेस

धागे वाली साधारण रस्सी की जगह अब लेदर और गियर वायर वाली स्किपिंग रोप ने ले ली है। इनमें बेरिंग और काउंटर लगे होते हैं जो स्पीड बढ़ाने और जंप गिनने में मदद करते हैं। खिलाड़ियों की ड्रेस अब नायलॉन या कॉटन के बजाय फोर-वे लाइक्रा और एनएस फैब्रिक की बन रही हैं। यह कपड़ा शरीर के मूवमेंट के साथ आसानी से खिंचता है जिससे खिलाड़ियों को मैदान पर अधिक लचीलापन मिलता है।

समय के साथ टेक्नीक ने गेम्स और उपकरणों को एडवांस बना दिया है। ग्रेफाइट की हॉकी ग्रिप अच्छी होने के साथ इससे खेलने में काफी कंफर्ट फील होता है। इससे शॉट पावर भी बढ़ जाती है। -दिव्यांग गंगवार, नेशनल लेवल हॉकी प्लेयर

खेल समय के साथ काफी एडवांस होता जा रहा है। इसके साथ ही तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने खेल को सुधारने में काफी मदद की है। साथ ही ऐसे उपकरण भी आ गए हैं जिससे अपनी फिटनेस पर नजर रखी जा सकती है।-गजेंद्र बजवाल, प्रशिक्षु खिलाड़ी

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