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16 आंदोलनकारियों को नहीं मिला पेंशन का लाभ
Udham singh nagar
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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खटीमा। उत्तराखंड राज्य संग्राम सेनानी संगठन अध्यक्ष (कुमाऊं मंडल) एवं पूर्व दर्जा राज्यमंत्री शेर सिंह दिगारी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन देने की मांग की। दिगारी ने कहा आज भी क्षेत्र में ऐसे 16 आंदोलनकारी हैं, जिन्हें पेंशन की सुविधा नहीं मिल रहा है। पेंशन न दिए जाने का कारण पचास वर्ष से कम आयु एवं साक्षर होना बताया जा रहा है, जबकि उनके समान ही आहर्ता रखने वाले छह आंदोलनकारियों को पेंशन दी जा रही है।
दिगारी ने कहा कि गृह विभाग ने 24 जनवरी 2011 को बताया कि ऐसे आंदोलनकारी जिनकी आयु पचास वर्ष से अधिक हो, को पेंशन की सुविधा अनुमन्य होगी। इस शासनादेश के जारी होने के बाद उपजिलाधिकारी द्वारा 13 मई 2012 को 16 आंदोलनकारियों की सूची जिला प्रशासन को भेजी, जिसमें मोहन सिंह, राम सिंह, शेर सिंह, जगदीश ओली, दान सिंह, दीवान सिंह, गणेश सिंह, लाल सिंह, चंद्र सिंह, भगवान सिंह, बसंती देवी, लक्ष्मण पाल, रेवती देवी, महेंद्र अग्रवाल, ताराचंद, खीम सिंह के नाम शामिल हैं।
दिगारी का कहना है पहले पचास वर्ष से अधिक उम्र वालों को पेंशन के लिए अयोग्य माना गया था, गृह विभाग से स्पष्टीकरण आने के बाद ज्ञात हुआ कि अब जो लोग साक्षर हैं उनको पेंशन के लिए अयोग्य माना जा रहा है। उपजिलाधिकारी द्वारा जारी आंदोलनकारी सूची को टिप्पणी के साथ लौटा दिया है कि साक्षर हैं लेकिन सर्विस के लिए अयोग्य थे। अभी तक इसी बिंदु पर उपरोक्त आंदोलनकारियों की पेंशन रुकी हुई है, जबकि चार आंदोलनकारियों को साक्षर होने के आधार पर भी पेंशन दी जा रही है।
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पेंशन का निर्धारण होने और न होने के फेर में पेंशन से वंचित रहे 14 आंदोलनकारियों प्रेम सिंह, जगदीश चंद्र, प्रकाश चंद्र तिवारी, धनबहादुर, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राम सिंह, शंकर सिंह, नर बहादुर, दलीप सिंह, सुनील कुमार, भूर सिंह, हिम्मत सिंह, वासुदेव जोशी की मौत हो गई है। दिगारी ने कहा शासन की प्रणाली का ठीक तरह से प्रयोग न होने से 30 राज्य आंदोलनकारी 16 जीवित एवं 14 मृतक को सरकार से पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है, इसमें से चार-पांच ऐसे हैं जो अंतिम सांस गिन रहे हैं। दिगारी ने जिलाधिकारी से इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए वंचित आंदोलनकारियों को पेंशन उपलब्ध कराने की मांग की है।
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दिगारी ने कहा कि गृह विभाग ने 24 जनवरी 2011 को बताया कि ऐसे आंदोलनकारी जिनकी आयु पचास वर्ष से अधिक हो, को पेंशन की सुविधा अनुमन्य होगी। इस शासनादेश के जारी होने के बाद उपजिलाधिकारी द्वारा 13 मई 2012 को 16 आंदोलनकारियों की सूची जिला प्रशासन को भेजी, जिसमें मोहन सिंह, राम सिंह, शेर सिंह, जगदीश ओली, दान सिंह, दीवान सिंह, गणेश सिंह, लाल सिंह, चंद्र सिंह, भगवान सिंह, बसंती देवी, लक्ष्मण पाल, रेवती देवी, महेंद्र अग्रवाल, ताराचंद, खीम सिंह के नाम शामिल हैं।
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दिगारी का कहना है पहले पचास वर्ष से अधिक उम्र वालों को पेंशन के लिए अयोग्य माना गया था, गृह विभाग से स्पष्टीकरण आने के बाद ज्ञात हुआ कि अब जो लोग साक्षर हैं उनको पेंशन के लिए अयोग्य माना जा रहा है। उपजिलाधिकारी द्वारा जारी आंदोलनकारी सूची को टिप्पणी के साथ लौटा दिया है कि साक्षर हैं लेकिन सर्विस के लिए अयोग्य थे। अभी तक इसी बिंदु पर उपरोक्त आंदोलनकारियों की पेंशन रुकी हुई है, जबकि चार आंदोलनकारियों को साक्षर होने के आधार पर भी पेंशन दी जा रही है।
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पेंशन का निर्धारण होने और न होने के फेर में पेंशन से वंचित रहे 14 आंदोलनकारियों प्रेम सिंह, जगदीश चंद्र, प्रकाश चंद्र तिवारी, धनबहादुर, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राम सिंह, शंकर सिंह, नर बहादुर, दलीप सिंह, सुनील कुमार, भूर सिंह, हिम्मत सिंह, वासुदेव जोशी की मौत हो गई है। दिगारी ने कहा शासन की प्रणाली का ठीक तरह से प्रयोग न होने से 30 राज्य आंदोलनकारी 16 जीवित एवं 14 मृतक को सरकार से पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है, इसमें से चार-पांच ऐसे हैं जो अंतिम सांस गिन रहे हैं। दिगारी ने जिलाधिकारी से इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए वंचित आंदोलनकारियों को पेंशन उपलब्ध कराने की मांग की है।