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‘बर्खास्त’ शिक्षक का जीवन निर्वाह भता रोका
Updated Tue, 02 Jan 2018 11:58 PM IST
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रुद्रपुर। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति पाने वाले जूनियर हाइस्कूल धीमरी गदरपुर के शिक्षक श्रीराम का शिक्षा विभाग ने निलंबन की अवधि में मिलने वाले जीवन निर्वाह भत्ते पर रोक लगा दी है। जांच कमेटी जल्द ही उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई कर सकती है।
फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले शिक्षक श्रीराम को शिक्षा विभाग ने बर्खास्त कर दिया था, लेकिन वह शिक्षा के अधिकारियों पर उसका पक्ष न सुनने का आरोप लगाते हुए हाइकोर्ट चला गया था। कोर्ट ने शिक्षक को बर्खास्त करने से पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उसका पक्ष सुनने के आदेश दिए थे। शिक्षक का पक्ष सुनने के लिए बनायी गई कमेटी ने सुनवाई के दौरान उसे निलंबित करते हुए गदरपुर उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उसे संबद्ध कर दिया था। शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक पर नकेल कसते हुए निलंबन की अवधि में उसे मिलने वाला जीवन निर्वाह भत्ता भी रोक दिया है। निलंबन की अवधि में कर्मचारी को वेतन का 50 प्रतिशत भत्ता मिलता है। सूत्रों का कहना है कि आरोपी शिक्षक दोबारा कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। इससे शिक्षक दोबारा नया पेच फंसाकर शिक्षा विभाग के सामने नई चुनौती पेश कर सकता है। बता दें कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ अक्तूबर-2016 में गदरपुर थाने में धोखाधड़ी का भी मुकदमा दर्ज हो चुका है। इसके बावजूद वह शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहा था।
इधर, जांच कमेटी के अध्यक्ष और मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. पीएन सिंह का कहना है कि आरोपी शिक्षक को दो या तीन दिन के भीतर बर्खास्त करने की कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में उसका जीवन निर्वाह भत्ता भी रोक दिया है।
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फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले शिक्षक श्रीराम को शिक्षा विभाग ने बर्खास्त कर दिया था, लेकिन वह शिक्षा के अधिकारियों पर उसका पक्ष न सुनने का आरोप लगाते हुए हाइकोर्ट चला गया था। कोर्ट ने शिक्षक को बर्खास्त करने से पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उसका पक्ष सुनने के आदेश दिए थे। शिक्षक का पक्ष सुनने के लिए बनायी गई कमेटी ने सुनवाई के दौरान उसे निलंबित करते हुए गदरपुर उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उसे संबद्ध कर दिया था। शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक पर नकेल कसते हुए निलंबन की अवधि में उसे मिलने वाला जीवन निर्वाह भत्ता भी रोक दिया है। निलंबन की अवधि में कर्मचारी को वेतन का 50 प्रतिशत भत्ता मिलता है। सूत्रों का कहना है कि आरोपी शिक्षक दोबारा कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। इससे शिक्षक दोबारा नया पेच फंसाकर शिक्षा विभाग के सामने नई चुनौती पेश कर सकता है। बता दें कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ अक्तूबर-2016 में गदरपुर थाने में धोखाधड़ी का भी मुकदमा दर्ज हो चुका है। इसके बावजूद वह शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहा था।
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इधर, जांच कमेटी के अध्यक्ष और मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. पीएन सिंह का कहना है कि आरोपी शिक्षक को दो या तीन दिन के भीतर बर्खास्त करने की कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में उसका जीवन निर्वाह भत्ता भी रोक दिया है।
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