अभिलेखों में गड़बड़ी से दो सालों तक विकास निधि से वंचित रही ग्रामसभा कोपा

Haldwani Bureau Updated Thu, 15 Mar 2018 12:49 AM IST
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गूलरभोज। कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से ग्रामसभा कोपा दो सालों से विकास निधि से वंचित है। अभिलेखों में कोपा ग्राम पंचायत का पूर्ण विलय गूलरभोज नगर पंचायत में दर्शाया गया था। इसी वजह से वित्तीय मदद बंद हो गई थी।
बता दें कि गूलरभोज नगर पंचायत का गठन वर्ष 2016 में हुआ था। इसमें गोविंदपुर और कोपा ग्रामसभाओं के आंशिक भाग शामिल किए गए थे। इसमें ग्रामसभा कोपा के नौ वार्डो में से वार्ड संख्या चार, पांच, छह पूर्ण और वार्ड दो, सात का आंशिक भाग नगर पंचायत में शामिल किया गया था। कोपा के वार्ड एक,तीन और आठ वार्ड राजस्व में है। यह लापरवाही तब उजागर हुई जब 20 फरवरी को डीएम कार्यालय से बीडीओ के नाम पत्र जारी किया गया था।

इसमें आंशिक या पूर्ण रूप से नगर पंचायतों में शामिल की जा चुकी ग्राम पंचायतों के अभिलेख शहरी निकायों को हस्तगत करने का जिक्र था। इसमें कोपा ग्रामसभा को पूर्ण रूप से गूलरभोज नगर पंचायत में शामिल बताया गया था। इसके बाद कोपा की ग्राम प्रधान विद्या देवी ने राजस्व विभाग से वर्तमान में ग्राम पंचायत कोपा का गाटा संख्या में राजस्व क्षेत्रफल की जानकारी मांगी थी। राजस्व विभाग के अनुसार खसरा नंबर 570 में अभिलेखों के अनुसार 552.1120 हेक्टेयर क्षेत्र कोपा ग्रामसभा में है। इसमें कोपा ग्रामसभा को पूर्ण रूप से गूलरभोज में शामिल दर्शाया गया जबकि राजस्व विभाग के अनुसार राजस्व क्षेत्रफल कोपा के पास है।

दोनों ही विभागों में तालमेल के अभाव में यह गड़बड़ी हुई है। इधर, जिला पंचायतराज अधिकारी विद्या सिंह सोमनाल ने बताया कि अभिलेखों में तकनीकी गलती हुई है। इसको लेकर लेखपाल और बीडीओ कार्यालय से भी रिपोर्ट मांगी गई है। इस गलती को जल्द ठीक कर लिया जाएगा।

इंसेट।
विकास कार्यों के अवरुद्ध होने से ग्रामीणों में रोष
गूलरभोज। ग्राम सभा कोपा के उपप्रधान मनोज देवराड़ी ने कहा कि कर्मचारियों द्वारा गलत तरीके से ग्रामसभा को नगर पंचायत में शामिल दिखाया गया। इससे विकास लटका। वहीं सहकारी समिति के पूर्व चेयरमैन गोविंद सिंह ने कहा कि जब राजस्व क्षेत्र नगर पंचायत में शामिल ही नहीं हुआ तो इसको कागजों में शामिल क्यों दिखाया गया। इसकी जांच करवाकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। किसान किशन सिंह ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्व क्षेत्र की विकास निधि की कटौती किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी। ग्रामीण जयसिंह ने कहा कि विकास निधि की कटौती पर ग्राम प्रधान आखिर चुप क्यों रहे। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।

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