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13 साल बाद आज से निष्क्रिय की जाएंगी 555 मिसाइलें
अमर उजाला ब्यूरो जसपुर।
Updated Thu, 11 Oct 2018 12:37 AM IST
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Patrampur
- फोटो : amar ujala
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मिसाइलों को डिस्पोज करने के लिए लखनऊ से सेना की एक टीम पहुंच गई है। टीम बृहस्पतिवार की सुबह साढ़े छह बजे से मिसाइलों को डिस्पोज करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इससे पहले टीम ने पतरामपुर पुलिस चौकी परिसर में पुलिसकर्मियों के साथ बैठक कर मिसाइलों को डिस्पोज करने की योजना बनाई।
एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि कैप्टन विकास कुमार के नेतृत्व में लखनऊ से सेना के छह सदस्यों की टीम पतरामपुर चौकी पहुंच गई है। मिसाइलों को डिस्पोज करने के यंत्र पतरामपुर चौकी में रखकर टीम आर्मी के हेमपुर डिपो में चली गई है। वर्ष 2004 में तुगलकाबाद दिल्ली से 16 कंटेनरों में खाड़ी युद्ध का एक स्क्रैप काशीपुर एसडी स्टील फैक्ट्री में गलाने के लिए आया था।
इस स्क्रैप में 556 मिसाइलें थी। 30 दिसंबर 2004 को फैक्ट्री में जब इन मिसाइलों को गलाने का कार्य शुरू हुआ तो विस्फोट हो गया और एक श्रमिक सतपाल की मौत हो गई थी, जबकि कई श्रमिक घायल हो गए थे। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री की दीवार भी ध्वस्त हो गई थी।
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इस मामले को शासन ने गंभीरता से लिया और बची 555 जिंदा मिसाइलों को पतरामपुर पुलिस चौकी परिसर, जसपुर में दफन करा दिया था। मिसाइलों की सुरक्षा के लिए वहां पर गारद तैनात कर दी। क्षेत्र में मिसाइलों के दफन होने से स्थानीय लोग हमेशा सहमे हुए रहते हैं।
13 साल बाद शासन को इन मिसाइलों की याद आई। 26 जून को शासन के पत्र पर कार्रवाई करते हुए हेड क्वार्टर सेंट्रल कमांड लखनऊ से एक बम डिस्पोजल टीम यहां भेजी गई। निरीक्षण टीम रिपोर्ट पर शासन ने तय किया कि फीका नदी में मिसाइलों को डिस्पोज किया जाएगा।
टीम ने किया मुआयना
जसपुर। पुलिस के मुताबिक टीम ने मिसाइलों के स्थान की गहराई एवं एरिया का निरीक्षण कर जानकारी ली है। पतरामपुर जंगल और फीका नदी के किनारे निर्जन स्थान का भी मौका मुआयना किया है।
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एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि कैप्टन विकास कुमार के नेतृत्व में लखनऊ से सेना के छह सदस्यों की टीम पतरामपुर चौकी पहुंच गई है। मिसाइलों को डिस्पोज करने के यंत्र पतरामपुर चौकी में रखकर टीम आर्मी के हेमपुर डिपो में चली गई है। वर्ष 2004 में तुगलकाबाद दिल्ली से 16 कंटेनरों में खाड़ी युद्ध का एक स्क्रैप काशीपुर एसडी स्टील फैक्ट्री में गलाने के लिए आया था।
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इस स्क्रैप में 556 मिसाइलें थी। 30 दिसंबर 2004 को फैक्ट्री में जब इन मिसाइलों को गलाने का कार्य शुरू हुआ तो विस्फोट हो गया और एक श्रमिक सतपाल की मौत हो गई थी, जबकि कई श्रमिक घायल हो गए थे। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री की दीवार भी ध्वस्त हो गई थी।
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इस मामले को शासन ने गंभीरता से लिया और बची 555 जिंदा मिसाइलों को पतरामपुर पुलिस चौकी परिसर, जसपुर में दफन करा दिया था। मिसाइलों की सुरक्षा के लिए वहां पर गारद तैनात कर दी। क्षेत्र में मिसाइलों के दफन होने से स्थानीय लोग हमेशा सहमे हुए रहते हैं।
13 साल बाद शासन को इन मिसाइलों की याद आई। 26 जून को शासन के पत्र पर कार्रवाई करते हुए हेड क्वार्टर सेंट्रल कमांड लखनऊ से एक बम डिस्पोजल टीम यहां भेजी गई। निरीक्षण टीम रिपोर्ट पर शासन ने तय किया कि फीका नदी में मिसाइलों को डिस्पोज किया जाएगा।
टीम ने किया मुआयना
जसपुर। पुलिस के मुताबिक टीम ने मिसाइलों के स्थान की गहराई एवं एरिया का निरीक्षण कर जानकारी ली है। पतरामपुर जंगल और फीका नदी के किनारे निर्जन स्थान का भी मौका मुआयना किया है।