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सिस्टम का हाल: पांच साल बिल कम आने का हवाला देकर थमा दिया 29 लाख का बिल
Mon, 19 Jun 2023 11:56 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 19 Jun 2023 11:56 PM IST
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मीटर की डिस्प्ले खराब होने के बावजूद विभाग लेता रहा आईडीएफ बिल
आईडीएफ के आधार पर बिल चुकाने के बाद काटी गई बिजली
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ता को भुगतना पड़ रहा है। ऊर्जा निगम ने मीटर खराब होने के बावजूद उपभोक्ता से आईडीएफ के आधार पर बिल की वसूली की। इसके बाद विभाग ने बिल कम आने का हवाला देते हुए उपभोक्ता को इस साल मार्च में वर्ष 2017 से 2022 तक का 29.33 लाख रुपये का बिल थमा दिया। भारी भरकम बिल देखकर उपभोक्ता के होश उड़ गए। उपभोक्ता को ऊर्जा निगम के साथ ही उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच से राहत नहीं मिली। इसके बाद अब उपभोक्ता औम्बड्समैन और अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है।
बनखंडी काॅलोनी फेस एक फुलसुंगा निवासी थान सिंह ने जनवरी 2014 में व्यवसायिक प्रतिष्ठान के लिए 10 किलोवाट का कनेक्शन लिया था। उसने अपने घर के एक हिस्से में व्यवसायिक कार्य के लिए दो मशीन स्थापित की थी। उसका कहना है कि जानकारी के अभाव में उसने अलग से घरेलू कनेक्शन नहीं लिया था। कनेक्शन लेने के बाद से ही वह मीटर रीडिंग के अनुसार लगातार बिल का भुगतान करता आ रहा था।
वर्ष 2017 में उसके मीटर की डिस्प्ले खराब हो गई थी। उसने मौखिक और लिखित रूप में अधिकारियों को सूचना देकर मीटर बदलने का अनुरोध किया था। लेकिन विभाग ने मीटर नहीं बदला और आईडीएफ मीटर दर्शाकर उसे बिल देते रहे। वह ईमानदारी से सभी बिलों का भुगतान करता रहा। 23 मार्च 2023 को ऊर्जा निगम ने बिल का बकाया 1,14,969 रुपये बताया और कनेक्शन काटने की चेतावनी दी। इसके बाद उसने निगम के शिविर में जाकर बिल का संशोधन कराकर 75000 रुपये जमा करा दिया। इसके तीन दिन बाद उसका कनेक्शन बिना सूचना काट दिया गया। जब उसने कारण पूछा तो 29,33,681 रुपये बिल बकाया हाेने की जानकारी दी गई। निगम की ओर से बताया गया कि मीटर खराब होने की वजह से कम बिल आया है और यह बिल 2017 से 2022 का है।
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थान सिंह का कहना है कि मीटर खराब होने पर अधिकतम दो बिल दिए जा सकते हैं और मीटर बदलने का प्रावधान है लेकिन निगम के अधिकारियों ने मीटर नहीं बदला और उससे आईडीएफ बिल लेते रहे। यही नहीं उसकी जानकारी के बिना खराब मीटर को लैब में जांचा गया। अब सारी गलती उसकी बताकर निगम अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ दिया और उसे भारी भरकम बिल थमा दिया। उसने एसडीओ से लेकर एसई तक से शिकायत की थी। कहा कि उसने उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में शिकायत की लेकिन न्याय नहीं मिला।
ऊर्जा निगम के एसई शेखर चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि उनके संज्ञान में मामला नहीं है। जब तक बिल सामने नहीं दिखाएंगे तब तक वह इस संबंध में कुछ नहीं बता सकेंगे।
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आईडीएफ के आधार पर बिल चुकाने के बाद काटी गई बिजली
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ता को भुगतना पड़ रहा है। ऊर्जा निगम ने मीटर खराब होने के बावजूद उपभोक्ता से आईडीएफ के आधार पर बिल की वसूली की। इसके बाद विभाग ने बिल कम आने का हवाला देते हुए उपभोक्ता को इस साल मार्च में वर्ष 2017 से 2022 तक का 29.33 लाख रुपये का बिल थमा दिया। भारी भरकम बिल देखकर उपभोक्ता के होश उड़ गए। उपभोक्ता को ऊर्जा निगम के साथ ही उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच से राहत नहीं मिली। इसके बाद अब उपभोक्ता औम्बड्समैन और अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है।
बनखंडी काॅलोनी फेस एक फुलसुंगा निवासी थान सिंह ने जनवरी 2014 में व्यवसायिक प्रतिष्ठान के लिए 10 किलोवाट का कनेक्शन लिया था। उसने अपने घर के एक हिस्से में व्यवसायिक कार्य के लिए दो मशीन स्थापित की थी। उसका कहना है कि जानकारी के अभाव में उसने अलग से घरेलू कनेक्शन नहीं लिया था। कनेक्शन लेने के बाद से ही वह मीटर रीडिंग के अनुसार लगातार बिल का भुगतान करता आ रहा था।
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वर्ष 2017 में उसके मीटर की डिस्प्ले खराब हो गई थी। उसने मौखिक और लिखित रूप में अधिकारियों को सूचना देकर मीटर बदलने का अनुरोध किया था। लेकिन विभाग ने मीटर नहीं बदला और आईडीएफ मीटर दर्शाकर उसे बिल देते रहे। वह ईमानदारी से सभी बिलों का भुगतान करता रहा। 23 मार्च 2023 को ऊर्जा निगम ने बिल का बकाया 1,14,969 रुपये बताया और कनेक्शन काटने की चेतावनी दी। इसके बाद उसने निगम के शिविर में जाकर बिल का संशोधन कराकर 75000 रुपये जमा करा दिया। इसके तीन दिन बाद उसका कनेक्शन बिना सूचना काट दिया गया। जब उसने कारण पूछा तो 29,33,681 रुपये बिल बकाया हाेने की जानकारी दी गई। निगम की ओर से बताया गया कि मीटर खराब होने की वजह से कम बिल आया है और यह बिल 2017 से 2022 का है।
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थान सिंह का कहना है कि मीटर खराब होने पर अधिकतम दो बिल दिए जा सकते हैं और मीटर बदलने का प्रावधान है लेकिन निगम के अधिकारियों ने मीटर नहीं बदला और उससे आईडीएफ बिल लेते रहे। यही नहीं उसकी जानकारी के बिना खराब मीटर को लैब में जांचा गया। अब सारी गलती उसकी बताकर निगम अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ दिया और उसे भारी भरकम बिल थमा दिया। उसने एसडीओ से लेकर एसई तक से शिकायत की थी। कहा कि उसने उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में शिकायत की लेकिन न्याय नहीं मिला।
ऊर्जा निगम के एसई शेखर चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि उनके संज्ञान में मामला नहीं है। जब तक बिल सामने नहीं दिखाएंगे तब तक वह इस संबंध में कुछ नहीं बता सकेंगे।