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अमरनाथ यादव तीन दशक से बना रहे कांवड़
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:09 AM IST
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काशीपुर। अक्सर लोग सेवानिवृत्ति के बाद आराम कर अपना जीवन व्यतीत करते हैं। लेकिन काशीपुर के अमरनाथ यादव ने सेवानिवृत्ति के बाद कांवड़ को आय का जरिया बनाया। अमरनाथ पिछले तीस सालों से हर महाशिवरात्रि पर परिवार के साथ कांवड़ बनाते आ रहे हैं।
कटरा मालियान निवासी अमरनाथ कुछ समय पहले नगर पालिका से सेवानिवृत्त हुए हैं। इसके बाद उन्होंने आय के लिए महाशिवरात्रि के अवसर पर कांवड़ बनाने का काम शुरू किया। उनकी देखा देखी कई अन्य लोगों ने भी यह काम शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि वह हर साल महाशिवरात्रि से एक महीने पहले से परिवार के साथ कांवड़ बनाने में जुट जाते हैं।
इस दौरान वह 500 से अधिक कांवड़ बनाकर बेच देते हैं। अमरनाथ ने बताया कि कांवड़ पांच तरह की होती हैं। खंडेश्वरी कांवड़ की कीमत साढ़े तीन से पांच सौ रुपये तक होती है। झूलेश्वरी इसकी कीमत तीन से चार सौ रुपये तक है। बैकुंठी कांवड़ इसकी कीमत तीन सौ तक रुपये होती है। झोली कांवड़ दो सौ रुपये तक की होती है। बैगी कांवड़ की कीमत सौ रुपये तक होती है। अमरनाथ ने बताया कि कांवड़ बनाने में बांस की खपचियां, सुतली, रंग और चमकीली पन्नी काम आती है। इन सभी की कीमत बढ़ने से कांवड़ की लागत बढ़ गई है। जिससे उनका लाभ घट गया है।
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कटरा मालियान निवासी अमरनाथ कुछ समय पहले नगर पालिका से सेवानिवृत्त हुए हैं। इसके बाद उन्होंने आय के लिए महाशिवरात्रि के अवसर पर कांवड़ बनाने का काम शुरू किया। उनकी देखा देखी कई अन्य लोगों ने भी यह काम शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि वह हर साल महाशिवरात्रि से एक महीने पहले से परिवार के साथ कांवड़ बनाने में जुट जाते हैं।
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इस दौरान वह 500 से अधिक कांवड़ बनाकर बेच देते हैं। अमरनाथ ने बताया कि कांवड़ पांच तरह की होती हैं। खंडेश्वरी कांवड़ की कीमत साढ़े तीन से पांच सौ रुपये तक होती है। झूलेश्वरी इसकी कीमत तीन से चार सौ रुपये तक है। बैकुंठी कांवड़ इसकी कीमत तीन सौ तक रुपये होती है। झोली कांवड़ दो सौ रुपये तक की होती है। बैगी कांवड़ की कीमत सौ रुपये तक होती है। अमरनाथ ने बताया कि कांवड़ बनाने में बांस की खपचियां, सुतली, रंग और चमकीली पन्नी काम आती है। इन सभी की कीमत बढ़ने से कांवड़ की लागत बढ़ गई है। जिससे उनका लाभ घट गया है।
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