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डीजल के अभाव में तीन दिन से 108 के पहिए थमे
Updated Thu, 19 Jul 2018 12:37 AM IST
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काशीपुर। डीजल के अभाव में आपातकालीन सेवा 108 एंबुलेंस के पहिये तीन दिन से थमे हुए हैं। इससे दुर्घटनाओं में घायल लोगों और गर्भवती महिलाओं के आगे संकट खड़ा हो गया है। लेकिन कंपनी इस ओर ध्यान देने से कतरा रही हैं।
एक दशक पूर्व जीवीके कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग से अनुबंध कर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल को आपातकालीन सेवा के रूप में 108 एंबुलेंस उपलब्ध कराई थीं। लेकिन उचित रखरखाव के अभाव मेें अक्सर एंबुलेंस खड़ी रहती है।
कंपनी की ओर से पेट्रोल पंप को पिछले बकाया नहीं देने से पेट्रोल पंप स्वामी ने और डीजल देने से मना कर दिया। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन से 108 एंबुलेंस एलडी भट्ट अस्पताल में खड़ी है। वहीं रुद्रपुर में पांच दिन, सितारगंज में दो, बाजपुर में एक दिन से एंबुलेंस खड़ी है।
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अपने पैसों से कराते थे मरम्मत
काशीपुर। सरकारी अस्पताल की 108 एंबुलेंस पर तीन फार्मासिस्ट और तीन चालकों की तैनाती थी। वाहन की मरम्मत और कर्मचारियों का समय से वेतन नहीं मिलने के चलते एक कर्मचारी ने एक महीने पहले ही नौकरी छोड़ दी। टूट-फूट की मरम्मत अपने पास से पैसे खर्च कराते हैं। शेष पांच कर्मचारियों का दो महीने का वेतन भी नहीं दिया गया है। जिससे कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वेतन के लिए बार-बार कहने के बाद भी वेतन नहीं दिया जा रहा है।
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एक दशक पूर्व जीवीके कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग से अनुबंध कर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल को आपातकालीन सेवा के रूप में 108 एंबुलेंस उपलब्ध कराई थीं। लेकिन उचित रखरखाव के अभाव मेें अक्सर एंबुलेंस खड़ी रहती है।
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कंपनी की ओर से पेट्रोल पंप को पिछले बकाया नहीं देने से पेट्रोल पंप स्वामी ने और डीजल देने से मना कर दिया। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन से 108 एंबुलेंस एलडी भट्ट अस्पताल में खड़ी है। वहीं रुद्रपुर में पांच दिन, सितारगंज में दो, बाजपुर में एक दिन से एंबुलेंस खड़ी है।
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अपने पैसों से कराते थे मरम्मत
काशीपुर। सरकारी अस्पताल की 108 एंबुलेंस पर तीन फार्मासिस्ट और तीन चालकों की तैनाती थी। वाहन की मरम्मत और कर्मचारियों का समय से वेतन नहीं मिलने के चलते एक कर्मचारी ने एक महीने पहले ही नौकरी छोड़ दी। टूट-फूट की मरम्मत अपने पास से पैसे खर्च कराते हैं। शेष पांच कर्मचारियों का दो महीने का वेतन भी नहीं दिया गया है। जिससे कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वेतन के लिए बार-बार कहने के बाद भी वेतन नहीं दिया जा रहा है।