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दुनिया में हार्टअटैक से एक करोड़ से अधिक लोगों की हो जाती है मौत : डॉ. वर्मा
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डॉ. भूपेंद्र वर्मा।
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। गलत जीवनशैली, धूम्रपान, प्रदूषण, अधिक वजन, हाई कोलेस्ट्रोल, हाई बीपी और मधुमेह हृदय रोग के कारण हैं। तनावमुक्त रह कर संयमित दिनचर्या से ही इस रोग से बचा जा सकता है। खासकर मधुमेह और वृद्ध रोगियों को खास सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
विश्व हृदय दिवस पर मानपुर रोड स्थित उजाला हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र वर्मा ने रोग के कारकों, लक्षण, इससे बचाव और इलाज के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में दिल के दौरे से एक करोड़ से भी अधिक लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 50 प्रतिशत लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्षों की तुलना में हमारे देश में दिल के मरीजों में 50 फीसदी वृद्धि हुई है। औसतन हर चार में से एक व्यक्ति की मौत हार्टअटैक से हो रही है। डॉ. वर्मा ने बताया कि अब 30 वर्ष के लोग भी हृदय रोग से ग्रसित हैं। एक समय था पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी का औसत कम होता था लेकिन बदले परिवेश में महिलाओं में भी यह बीमारी काफी सामान्य बन चुकी है। आंकड़ों के अनुसार भारत में 50 फीसदी से अधिक महिलाओं को दिल की बीमारियों का खतरा होता है। एक बार हृदय रोग के चंगुल में फंसने के बाद मरीज को जीवन भर दवा और डॉक्टरों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए हृदय रोग के प्रति जागरूकता पैदा करने और हृदय संबंधी विकारों से बचने के लिए संपूर्ण विश्व में विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। डॉ. वर्मा ने मेरा हृदय, आपका हृदय (योर हार्ट, माय हार्ट) हृदय रोगों के कारणों और उपचार पर विस्तृत जानकारी दी।
क्या हैं कारण्ा
यह रोग मुख्यत: गलत जीवनशैली, धूम्रपान, प्रदूषण, अधिक वजन, हाई कोलेस्ट्रोल, हाई बीपी और मधुमेह का परिणाम है। वहीं, कम उम्र में हृदय रोग के प्रमुख कारणों में अनियमित खानपान, तंबाकू चबाना, धूम्रपान, निष्क्रिय जीवनशैली, अत्यधिक तनाव आदि हैं। युवाओं में हृदय रोग आनुवांशिक भी होता है।
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हृदय रोग के लक्षण
हृदय रोग में रोगी के लक्षण एक जैसे नहीं होते। सीने में दर्द, बेचैनी, हृदय में भारीपन, जकड़न और तेज दर्द महसूस हो सकता है, जो आमतौर पर सीने के बीचोंबीच होता है। यह दर्द हाथों, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट तक जा सकता है। इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ होना, जी मचलाना या उल्टी होना, अत्यधिक पसीना आना, घबराहट होना, अनियमित दिल की धड़कन एवं चक्कर आना भी हृदय रोग के लक्षण होते हैं। ऐसी अवस्था में अपने निकटतम हृदय रोग विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। यदि धमनियां पूरी तरह से रुक गई हैं, तो हार्टअटैक हो सकता है। कई बार हार्टअटैक के कोई लक्षण नजर नहीं आते और तब यह साइलेंट अटैक कहलाता है। यह मधुमेह और वृद्ध रोगियों में ज्यादा होता है।
कैसे करें बचाव
अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर एवं बचाव कर हृदय संबंधित रोगों में 80 फीसदी तक कमी की जा सकती है।
खानपान को लेकर सचेत रहें : अपने नियमित आहार में वसा, नमक एवं चीनी के सीमित सेवन के साथ-साथ फलों, सब्जियों, अनाज से निर्मित उत्पादों, नट्स, अंडा, वसा रहित मांस और मछली को अधिक से अधिक मात्रा में शामिल करें। तला-भुना खाना, स्ट्रीट फूड, होटलों का खाना, पैकेज्ड जूस और फास्ट फूड को बिल्कुल त्याग दें। रात को देर तक जागने और खाने से बचें।
हर दिन करें एक्सरसाइज : रोजाना 30 से 60 मिनट तक व्यायाम स्वस्थ हृदय के लिए अति आवश्यक है। यह किसी भी प्रकार से हो सकता है जैसे की तेज गति से टहलना, दौड़ना, साइकिलिंग, स्विमिंग, जिम जाना आदि। रोजमर्रा के कामों में पैदल चलने एवं लिफ्ट के बजाय सीढ़ी के इस्तेमाल पर ज्यादा जोर दें।
शुगर, उच्च रक्त चाप तथा कोलेस्टराल की नियमित जांच करवाएं।
धूम्रपान, तंबाकू, मदिरा का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, यह हृदय के साथ ही कई बीमारियों का कारक है।
तनावमुक्त जीवन जीएं। तनाव अधिक होने पर योगा व ध्यान के द्वारा इस पर नियंत्रण करें।
वजन को नियंत्रित रखें।
स्वस्थ शरीर और दिल के लिए भरपूर नींद लें।
इन बातों से भी बचें: मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल, देर तक टीवी देखना, लगातार एक ही अवस्था में बैठे रहना आदि।
फोटो लाइन.....28केएसपी 05पी- उजाला हॉस्पिटल का लोगो।
06पी-डॉ. भूपेंद्र वर्मा, हृदय रोग विशेषज्ञ।
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विश्व हृदय दिवस पर मानपुर रोड स्थित उजाला हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र वर्मा ने रोग के कारकों, लक्षण, इससे बचाव और इलाज के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में दिल के दौरे से एक करोड़ से भी अधिक लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 50 प्रतिशत लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्षों की तुलना में हमारे देश में दिल के मरीजों में 50 फीसदी वृद्धि हुई है। औसतन हर चार में से एक व्यक्ति की मौत हार्टअटैक से हो रही है। डॉ. वर्मा ने बताया कि अब 30 वर्ष के लोग भी हृदय रोग से ग्रसित हैं। एक समय था पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी का औसत कम होता था लेकिन बदले परिवेश में महिलाओं में भी यह बीमारी काफी सामान्य बन चुकी है। आंकड़ों के अनुसार भारत में 50 फीसदी से अधिक महिलाओं को दिल की बीमारियों का खतरा होता है। एक बार हृदय रोग के चंगुल में फंसने के बाद मरीज को जीवन भर दवा और डॉक्टरों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए हृदय रोग के प्रति जागरूकता पैदा करने और हृदय संबंधी विकारों से बचने के लिए संपूर्ण विश्व में विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। डॉ. वर्मा ने मेरा हृदय, आपका हृदय (योर हार्ट, माय हार्ट) हृदय रोगों के कारणों और उपचार पर विस्तृत जानकारी दी।
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क्या हैं कारण्ा
यह रोग मुख्यत: गलत जीवनशैली, धूम्रपान, प्रदूषण, अधिक वजन, हाई कोलेस्ट्रोल, हाई बीपी और मधुमेह का परिणाम है। वहीं, कम उम्र में हृदय रोग के प्रमुख कारणों में अनियमित खानपान, तंबाकू चबाना, धूम्रपान, निष्क्रिय जीवनशैली, अत्यधिक तनाव आदि हैं। युवाओं में हृदय रोग आनुवांशिक भी होता है।
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हृदय रोग के लक्षण
हृदय रोग में रोगी के लक्षण एक जैसे नहीं होते। सीने में दर्द, बेचैनी, हृदय में भारीपन, जकड़न और तेज दर्द महसूस हो सकता है, जो आमतौर पर सीने के बीचोंबीच होता है। यह दर्द हाथों, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट तक जा सकता है। इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ होना, जी मचलाना या उल्टी होना, अत्यधिक पसीना आना, घबराहट होना, अनियमित दिल की धड़कन एवं चक्कर आना भी हृदय रोग के लक्षण होते हैं। ऐसी अवस्था में अपने निकटतम हृदय रोग विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। यदि धमनियां पूरी तरह से रुक गई हैं, तो हार्टअटैक हो सकता है। कई बार हार्टअटैक के कोई लक्षण नजर नहीं आते और तब यह साइलेंट अटैक कहलाता है। यह मधुमेह और वृद्ध रोगियों में ज्यादा होता है।
कैसे करें बचाव
अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर एवं बचाव कर हृदय संबंधित रोगों में 80 फीसदी तक कमी की जा सकती है।
खानपान को लेकर सचेत रहें : अपने नियमित आहार में वसा, नमक एवं चीनी के सीमित सेवन के साथ-साथ फलों, सब्जियों, अनाज से निर्मित उत्पादों, नट्स, अंडा, वसा रहित मांस और मछली को अधिक से अधिक मात्रा में शामिल करें। तला-भुना खाना, स्ट्रीट फूड, होटलों का खाना, पैकेज्ड जूस और फास्ट फूड को बिल्कुल त्याग दें। रात को देर तक जागने और खाने से बचें।
हर दिन करें एक्सरसाइज : रोजाना 30 से 60 मिनट तक व्यायाम स्वस्थ हृदय के लिए अति आवश्यक है। यह किसी भी प्रकार से हो सकता है जैसे की तेज गति से टहलना, दौड़ना, साइकिलिंग, स्विमिंग, जिम जाना आदि। रोजमर्रा के कामों में पैदल चलने एवं लिफ्ट के बजाय सीढ़ी के इस्तेमाल पर ज्यादा जोर दें।
शुगर, उच्च रक्त चाप तथा कोलेस्टराल की नियमित जांच करवाएं।
धूम्रपान, तंबाकू, मदिरा का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, यह हृदय के साथ ही कई बीमारियों का कारक है।
तनावमुक्त जीवन जीएं। तनाव अधिक होने पर योगा व ध्यान के द्वारा इस पर नियंत्रण करें।
वजन को नियंत्रित रखें।
स्वस्थ शरीर और दिल के लिए भरपूर नींद लें।
इन बातों से भी बचें: मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल, देर तक टीवी देखना, लगातार एक ही अवस्था में बैठे रहना आदि।
फोटो लाइन.....28केएसपी 05पी- उजाला हॉस्पिटल का लोगो।
06पी-डॉ. भूपेंद्र वर्मा, हृदय रोग विशेषज्ञ।