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ईको जोन पर राज्य की केंद्र से दो-दो हाथ की तैयारी
देहरादून/ब्यूरो
Updated Fri, 26 Apr 2013 01:32 PM IST
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गोमुख से उत्तरकाशी तक ईको सेंसिटिव जोन बनाने के गजट नोटिफिकेशन को लेकर राज्य और केंद्र के बीच रिश्ते तल्ख होते दिख रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से इसको चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।
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आधार यह है कि जिस ड्राफ्ट पर राज्य से आपत्तियां मांगी थीं, उसे दरकिनार कर केंद्र ने मनमाने तरीके से प्रस्तावित जोन का दायरा बढ़ा दिया।
बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गजट नोटिफिकेशन के सभी बिंदुओं का विश्लेषण किया गया।
गोमुख से उत्तरकाशी तक ईको सेंसिटिव जोन बनाने संबंधी केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के शुरुआती ड्राफ्ट में भागीरथी नदी के दोनों किनारों पर केवल 100-100 मीटर के क्षेत्र को शामिल किया गया था।
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इसी ड्राफ्ट पर ही राज्य सरकार और स्थानीय जनता से सुझाव और आपत्ति मांगी गई थीं।
तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ड्राफ्ट के सभी बिंदुओं पर अपने सुझाव और आपत्ति भेजी थी। राज्य विधानसभा से पास हुए प्रस्ताव को भी केंद्र को भेजा गया था।
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मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी 18 दिसंबर 2012 को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंती नटराजन को पत्र लिख कर आपत्ति दर्ज कराई थी।
सबकी अनदेखी कर 4179 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ईको जोन में शामिल कर दिया गया, जबकि पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से लगाये गये अन्य प्रतिबंध पहले से ही राज्य में लागू हैं।
कई विद्युत परियोजनाओं पर लग जाएगा ताला
ईको जोन से उत्तरकाशी में 1743 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाएं बंद हो जाएंगी। इससे राज्य को सालाना लगभग 20 अरब रुपये राजस्व का नुकसान होगा। साथ ही खनन कार्य, होटल और रिजॉर्ट के निर्माण, भू परिवर्तन पर प्रतिबंध लग जाएगा।
गजट के ड्राफ्ट और जारी नोटिफिकेशन के विश्लेषण में काफी अंतर मिला है। पहले गंगा के तट से 100 मीटर क्षेत्र को दायरे में रखा गया था। अब गोमुख से उत्तरकाशी तक संपूर्ण जल संभरण क्षेत्र को शामिल कर लिया गया है।
पहले 25 मेगावाट से ऊपर की जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर रोक थी, अब दो मेगावाट से ऊपर की परियोजनाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इससे राज्य की आर्थिक विकास दर पर प्रतिकूल प्रभाव पडे़गा। विकास योजनाएं ठप पड़ जाएंगी।