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सरकार विस्थापित नहीं करती, आपदा उजाड़ रही

Sun, 30 Jun 2013 10:10 AM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
उत्तरकाशी/ब्यूरो Updated Sun, 30 Jun 2013 10:10 AM IST
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The government does not migrate, are desolate disaster

उत्ततराख्ांड का सीमांत जनपद उत्तरकाशी में भूस्खलन, भूकंप और बाढ़ आदि के लिहाज से बेहद संवेदनशील हुए गांवों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्षों से इन्हें चिह्नित कर भूवैज्ञानिकों से सर्वे कराने और इसके बाद विस्थापन का भरोसा इन गांवों के लोगों को दिया जाता रहा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

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यही वजह है कि सरकारी तंत्र द्वारा सुध न लेने जाने पर अब हर वर्ष आपदा में जान-माल का भारी नुकसान झेल रहे ग्रामीण जान बचाने के लिए स्वयं इन गांवों से पलायन को मजबूर हैं। वर्ष 1978 की विनाशकारी बाढ़, वर्ष 1991 का प्रलयंकारी भूकंप, 2003 की वरुणावत त्रासदी और इसके बाद बीते तीन वर्षों से कहर बरपाती बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाएं।
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हर लिहाज से बेहद संवेदनशील हो चुके इस जनपद में प्रशासन ने 103 गांवों को संवेदनशील मानते हुए सूचीबद्ध किया। इनमें से वर्ष 2010 में भटवाड़ी, पिलंग, जौड़ाव, न्यू डिडसारी, सिरोर आदि सात गांवों का ही भूवैज्ञानिकों से सर्वे कराया जा सका है, शेष अभी इंतजार में हैं।
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भूवैज्ञानिकों ने माना, सरकार ने ठुकराया
भूवैज्ञानिकों के सर्वे में अतिसंवेदनशील पाए जाने वाले गांवों के विस्थापन की कार्रवाई नहीं हुई। 1991 के भूकंप और 2002 की बाढ़ में उजड़ने और भूवैज्ञानिकों द्वारा अतिसंवेदनशील घोषित करने के बाद भी विस्थापन न होने का खामियाजा न्यू डिडसारी गांव को इस बार की बाढ़ में भुगतना पड़ा।

यहां 20 पक्के मकान भागीरथी की बाढ़ में बह गए तथा सैकड़ों नाली जमीन का अस्तित्व ही खत्म हो गया। अन्य संवेदनशील गांवों की स्थिति भी इससे कुछ अलग नहीं है। इन गांवों के लोगों को लगने लगा है कि सरकार विस्थापन करे न करे, लेकिन आपदाओं में हर-साल होने वाली तबाही उनके गांवों को खुद ही विस्थापित कर देगी।


'हमारा गांव वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। ऊपरी हिस्से में भूस्खलन तथा गांव के दोनों ओर के गदेरों तथा नीचे भागीरथी से कटाव से पूरा गांव खतरे में है। सरकार यदि समय रहते विस्थापन कर देती तो बार-बार इस तरह नुकसान न झेलना पड़ता।'

विजय राणा, ग्राम प्रधान डिडसारी।

'जिले में 103 गांव भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील हैं। इनमें से सात गांवों का भूवैज्ञानिक सर्वे वर्ष 2010 में कराया गया था। इसमें अभी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। विस्थापन का मामला शासन स्तर का है।'
देवेंद्र पटवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी।

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