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महिलाओं ने दिखाए मंत्रियों को काले दुपट्टे

ब्यूरो/अमर उजाला, कीर्तिनगर (श्रीनगर) Updated Tue, 12 Jul 2016 10:28 PM IST
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टिहरी जिले के चौरास क्षेत्र के बैरागंणा में मंत्री के काफिले को रोककर विरोध जाते परियोजना प्रभावित
टिहरी जिले के चौरास क्षेत्र के बैरागंणा में मंत्री के काफिले को रोककर विरोध जाते परियोजना प्रभावित - फोटो : Amar Ujala
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श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की सुनवाई कार्यक्रम में शिरकत करने मंगसू जा रहे काबीना मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी और दिनेश धनै को परियोजना प्रभावितों का आक्रोश झेलना पड़ा। प्रभावितों ने पावर हाउस के समीप बैरागंणा में मंत्रियों का काफिला रोककर काले दुपट्टे दिखाए। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए मंत्री प्रसाद नैथानी ने समस्याओं के निस्तारण के लिए सादे कागज में लिखित आश्वासन दिया।
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मंगलवार को प्रभावित जन सुनवाई कार्यक्रम में शिरकत करने मंगसू जा रहे काबीना मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी और दिनेश धनै के काफिले को ग्रामीणों ने बैरागंणा में रोक दिया। यह वही स्थान था, जहां पर सात माह पहले जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान इन दोनों मंत्रियों ने कीर्तिनगर में बांध प्रभावित पुनर्वास निदेशालय खोलने की घोषणा के साथ अन्य समस्याओं के निस्तारण की घोषणा की थी।


अब सात माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर परियोजना प्रभावित खासे आक्रोशित थे। आधे घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने काले दुपट्टे भी हवा में लहराए। ग्रामीणों का आरोप था कि मंत्रियों के निर्देश पर परियोजना कंपनी ने कोई कार्रवाई नहीं की।

सरकार ने भी इस संबंध में कंपनी पर कोई दबाव नहीं बनाया। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए मंत्री प्रसाद नैथानी ने सादे कागज पर एक माह के भीतर सभी समस्याओं के निस्तारण का लिखित आश्वासन दिया। उसके बाद ही ग्रामीणों ने मंत्रियों को जाने दिया।

जानकारी के बावजूद बरती लापरवाही
कीर्तिनगर। परियोजना प्रभावित ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन की पुलिस प्रशासन को पूरी जानकारी थी। बैरागंणा में प्रभावित मंगलवार सुबह से ही जुटने शुरू हो गए थे। बावजूद इसके प्रशासन ने यहां पर पुलिस बल तैनात करने की जहमत तक नहीं उठाई। प्रशासन की लापरवाही से मंत्रियों के काफिले को आधे घंटे तक सड़क में फंसा रहना पड़ा।

एसडीएम हमारा नहीं, कंपनी का है
कीर्तिनगर। मौके पर पहुंचे एसडीएम को भी ग्रामीणों ने नहीं बख्शा। ग्रामीणों ने कहा कि एसडीएम हमारा नहीं बल्कि परियोजना कंपनी का है। ग्रामीणों ने एसडीएम पर कंपनी से सांठगांठ करने का आरोप भी लगाया।
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