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Tehri News: हर्षिल घाटी के तीन गांव के तोक विद्युत लाइन से जुड़ेंगे
Thu, 16 Jan 2025 05:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Thu, 16 Jan 2025 05:28 PM IST
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बिजली आपूर्ति शुरू होने के बाद दिए जाएंगे कनेक्शन
उत्तरकाशी। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत हर्षिल घाटी के तीन गांव के तोकों को ऊर्जा निगम की ओर से विद्युत लाइनों से जोड़ा जाएगा। बिजली आपूर्ति शुरू होने के बाद कनेक्शन उपलब्ध करवाए जाएंगे। इससे सबसे अधिक लाभ क्षेत्र के सेब बागवानों को होगा। क्योंकि बिजली पहुंचने से वहां पर बगीचों की सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम हो पाएंगे।
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत जनपद के हर्षिल घाटी के गांवों के लिए प्रथम चरण में ऊर्जा, शिक्षा, वन विभाग और उरेडा के विभागों को विकास कार्यों की स्वीकृति दी गई है। इसी क्रम में ऊर्जा निगम को भी करीब 665 लाख की धनराशि की स्वीकृति मिली है। इन कार्यों के तहत धराली, झाला और पुराली गांव के दूरस्थ तोकों को विद्युत आपूर्ति से जोड़ा जाएगा।
इन तोकों में सेब के बागवान अपने बगीचों की सुरक्षा के लिए रहते हैं, लेकिन बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। वहीं सेब काश्तकारों का कहना है कि अगर तोकों में बिजली पहुंच जाएगी, तो इससे हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर सेब की ढुलान के लिए ट्रालियों का भी प्रयोग किया जा सकता है।
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ईई मनोज गुसाईं का कहना है कि विद्युत आपूर्ति की लाइन बिछाने के लिए जो धनराशि मिली है। उसका जनपद मुख्यालय से टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई है। अप्रैल-मई से इसका कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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उत्तरकाशी। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत हर्षिल घाटी के तीन गांव के तोकों को ऊर्जा निगम की ओर से विद्युत लाइनों से जोड़ा जाएगा। बिजली आपूर्ति शुरू होने के बाद कनेक्शन उपलब्ध करवाए जाएंगे। इससे सबसे अधिक लाभ क्षेत्र के सेब बागवानों को होगा। क्योंकि बिजली पहुंचने से वहां पर बगीचों की सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम हो पाएंगे।
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत जनपद के हर्षिल घाटी के गांवों के लिए प्रथम चरण में ऊर्जा, शिक्षा, वन विभाग और उरेडा के विभागों को विकास कार्यों की स्वीकृति दी गई है। इसी क्रम में ऊर्जा निगम को भी करीब 665 लाख की धनराशि की स्वीकृति मिली है। इन कार्यों के तहत धराली, झाला और पुराली गांव के दूरस्थ तोकों को विद्युत आपूर्ति से जोड़ा जाएगा।
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इन तोकों में सेब के बागवान अपने बगीचों की सुरक्षा के लिए रहते हैं, लेकिन बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। वहीं सेब काश्तकारों का कहना है कि अगर तोकों में बिजली पहुंच जाएगी, तो इससे हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर सेब की ढुलान के लिए ट्रालियों का भी प्रयोग किया जा सकता है।
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ईई मनोज गुसाईं का कहना है कि विद्युत आपूर्ति की लाइन बिछाने के लिए जो धनराशि मिली है। उसका जनपद मुख्यालय से टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई है। अप्रैल-मई से इसका कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।