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तीन सरकारें पूरी पर बांध प्रभावितों का पुनर्वास रह गया अधूरा

Tue, 01 Feb 2022 09:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 09:24 PM IST
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Three governments completed but the rehabilitation of the dam affected remained incomplete
टिहरी बांध प्रभावित 17 गांवों के 415 परिवारों का पुनर्वास करना टेढ़ी खीर बनती जा रही है, जबकि तीन सरकारें कार्यकाल पूरी कर चुकी है। जनप्रतिनिधियों की इस अनदेखी से बांध प्रभावित ग्रामीणों में नाराजगी है। हर चुनाव में बांध प्रभावितों की यह समस्या बड़ा मुद्दा रहता है, लेकिन पिछले 12 सालों से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास अधर में लटका हुआ है। प्रभावितों का कहना है कि वोट मांगने आने वाले नेताओं से इस बार जवाब मांगा जाएगा।
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विधानसभा चुनाव के लिए नेता और कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर वोट मांगे रहे हैं। क्षेत्र में टिहरी बांध प्रभावितों का पुनर्वास की अधूरी समस्या इस चुनाव में भी बड़ा मुद्दा बन रहा है। बांध प्रभावितों का पुनर्वास को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों बहस चल रही है।
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टिहरी झील के आसपास भागीरथी और भिलंगना घाटी के 17 गांव के 415 परिवारों को वर्ष 2010-11 में हुए भूगर्भीय सर्वे में विशेषज्ञों ने खतरे की जद में पाया था। विशेषज्ञों ने सरकार को संबंधित परिवारों के पुनर्वास की सलाह दी थी, लेकिन पुनर्वास निदेशालय को प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन नहीं मिल पाई। अगस्त वर्ष 2016 में सरकार के निर्देश पर पुनर्वास निदेशालय ने ऋषिकेश में पशुपालन की 14.21, आईडीपीएल की 39.21, मंशादेवी, दूधूपानी से बीबीवाला 65.31, भानियावाला के जाखन में 39.21 हेक्टेयर भूमि वन विभाग की पुनर्वास के लिए चिह्नित कर केंद्र सरकार को एनओसी के लिए भेजा था, लेकिन आईडीपीएल, पशुपालन ने भूमि देने से इनकार कर दिया। जबकि विभाग ने वन भूमि अधिक होने से लेकर तकनीकी कारण गिनाते हुए भूमि की स्वीकृति नहीं दी है।
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भूमि नहीं मिलने से प्रभावितों को आवासीय एवं कृषि भूखंड आवंटित नहीं हो पाए हैं। गत वर्ष केंद्रीय ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी की बैठक में प्रभावितों के पुनर्वास के लिए प्रति परिवार को भूमि के बदले 74 लाख 40 हजार देने और आवासीय मकान और पेड़ों की पैमाइश कर प्रतिकर देने का समझौता हुआ था। जिस पर प्रभावित परिवारों ने भी सहमति व्यक्त की थी, लेकिन इस पर फिर आगे काम नहीं हुआ।
प्रभावितों का क्या है कहना
2010 से तीन सरकारें अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है। पुनर्वास को लेकर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया। नेता गांव में आकर छल करते हैं। इस बार वोट मांगने आने वाले नेताओं से जवाब मांगा जाएगा। पुनर्वास विभाग की लापरवाही के कारण प्रभावितों को प्रतिकर नहीं मिल पाया है।
-सोहन सिंह राणा, अध्यक्ष, आंशिक डूब संघर्ष समिति
पुनर्वास के अभाव में प्रभावित परिवार जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। लगातार पुनर्वास की मांग की जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन की लापरवाही से पुनर्वास नहीं हो रहा है। पुनर्वास की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया, तो जबरन प्रभावितों पर मुकदमा दर्ज कर दिए हैं।

-रूकमणी देवी, बांध प्रभावित नंदगांव
टिहरी बांध के निर्माण में राष्ट्र हित को देखते हुए हमने अपनी पुरखों की भूमि डूबों दी है। अब हमें भटकना पड़ रहा है। कब तक हम इन जर्जर आवासों में रहेंगे। नेताओं को प्रभावितों की कोई चिंता नहीं है। सिर्फ वोट मांगने के वक्त में आते हैं।
-सुरती राम, बांध प्रभावित नंदगांव
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