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नवक्रांति स्वराज मोर्चा का तहसील पर प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, टिहरी
Updated Sat, 30 Apr 2016 10:19 PM IST
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धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते आदित्य कोठारी।
- फोटो : Amar Ujala
जंगली जानवरों से खेती की सुरक्षा को नीति बनाने, स्थायी निवास प्रमाण पत्र के स्थान पर पूर्व की भांति मूल निवास प्रमाण पत्र बहाल करने सहित अन्य मांगों को लेकर नवक्रांति स्वराज मोर्चा ने शनिवार को गजा तहसील में प्रदर्शन किया।
जल्द समस्या का समाधान नहीं होने पर मोर्चा के अध्यक्ष ने 16 मई से घंटाकरण में आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
गजा क्षेत्र के लोग मांगों को लेकर बाजार में एकत्रित हुए। वहां से उन्होंने तहसील तक नवक्रांति स्वराज मोर्चा के बैनरतले जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। सभा में मोर्चा के अध्यक्ष आदित्य कोठारी ने कहा कि जंगली जानवर खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे पर्वतीय क्षेत्र के लोग खेती छोड़ने को मजबूर हैं।
जंगली जानवर इनसानों को निवाला बना रहा है। शासन-प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। वन अधिनियम और पशु संरक्षण अधिनियम की भांति खेती की सुरक्षा के लिए कृषि संरक्षण अधिनियम बनाया जाना चाहिए।
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वाचस्पति रयाल ने कहा कि मूल निवास की अवधारणा खत्म कर स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाने की नीति लागू कर सरकार ने उत्तराखंडवासियों के हितों पर कुठारघात करने का काम किया। प्रदर्शनकारियों में जोत सिंह नेगी, महेश भट्ट, गुरु प्रसाद पंत, रमेश उनियाल, विजेंद्र खाती, कन्हैया प्रसाद, मान सिंह, राम प्रसाद बिजल्वाण, शिवदेई देवी, उत्तम भंडारी, जीत सिंह नेगी आदि उपस्थित थे।
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जल्द समस्या का समाधान नहीं होने पर मोर्चा के अध्यक्ष ने 16 मई से घंटाकरण में आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
गजा क्षेत्र के लोग मांगों को लेकर बाजार में एकत्रित हुए। वहां से उन्होंने तहसील तक नवक्रांति स्वराज मोर्चा के बैनरतले जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। सभा में मोर्चा के अध्यक्ष आदित्य कोठारी ने कहा कि जंगली जानवर खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे पर्वतीय क्षेत्र के लोग खेती छोड़ने को मजबूर हैं।
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जंगली जानवर इनसानों को निवाला बना रहा है। शासन-प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। वन अधिनियम और पशु संरक्षण अधिनियम की भांति खेती की सुरक्षा के लिए कृषि संरक्षण अधिनियम बनाया जाना चाहिए।
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वाचस्पति रयाल ने कहा कि मूल निवास की अवधारणा खत्म कर स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाने की नीति लागू कर सरकार ने उत्तराखंडवासियों के हितों पर कुठारघात करने का काम किया। प्रदर्शनकारियों में जोत सिंह नेगी, महेश भट्ट, गुरु प्रसाद पंत, रमेश उनियाल, विजेंद्र खाती, कन्हैया प्रसाद, मान सिंह, राम प्रसाद बिजल्वाण, शिवदेई देवी, उत्तम भंडारी, जीत सिंह नेगी आदि उपस्थित थे।