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हाईवे के डेंजर जोन बने मुसीबत
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चारधाम यात्रा शुरू होने में अब दो माह का वक्त रह गया है। आपदा से जगह-जगह क्षतिग्रस्त यात्रा मार्ग के डेंजर जोन प्रशासन और लोगों के लिए मुसीबत बने हैं। टिहरी जिले की सीमा के अंतर्गत खस्ताहाल बना ऋषिकेश-गंगोत्री, ऋषिकेश बदरीनाथ हाईवे पर सफर करना चुनौती बनती जा रही है। नागणी में लगातार हो रहे भूस्खलन से नया डेंजर जोन सक्रिय हो गया है।
ऋषिकेश-बदरीनाथ और ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा टिहरी जिले की सीमा के अंतर्गत आता है। चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर ऑल वेदर परियोजना के तहत दोनों हाईवे का चौड़ीकरण और सुधारीकरण कार्य करवाया गया है, लेकिन हाईवे पर नए डेंजर जोन प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनते जा रहे हैं। ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर कंडीसौड़ तक जहां कटिंग और डामरीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। वहीं ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर भी कीर्तिनगर तक कटिंग कार्य पूरा हो गया है, लेकिन यहां पर तोताघाटी, व्यासी और साकनीधार में कटिंग के दौरान ब्लैक स्पॉट बनकर उभर है। यही स्थिति ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर फकोट, भिन्नू खाला, खाड़ी, भंडारकी गांव और नागणी में बनी हुई है। गत वर्ष अगस्त माह की बारिश से भिन्नू खाले में हाईवे का लगभग 100 मीटर हिस्सा पूरी तरह से टूट गया था। तीन दिन तक हाईवे पर यातायात पूरी तरह से बाधित रहा था। भिन्नू खाले में अभी भी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हाईवे पर वाहनों की आवाजाही हो रही है।
चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले यदि डेंजर जोनों का ट्रीमेंट नहीं किया गया, तो यात्रा के दौरान देश-विदेश से चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की मुसीबत बढ़ सकती है। पर्यावरणविद् विजय जड़धारी का कहना है कि हाईवे पर डेंजर जोनों का मरम्मत करने से पहले भू-वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम को संयुक्त रूप से सर्वे करना चाहिए। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर हाईवे पर सुरक्षा की दृष्टि से मरम्मत कार्य करना चाहिए।
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भिन्नू खाला और फकोट में क्षतिग्रस्त हाईवे का मरम्मत करने का प्रस्ताव बीआरओ ने तैयार कर भारत सरकार को भेजा है। इस वित्तीय वर्ष में स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। दो-तीन दिन में स्वयं हाईवे का निरीक्षण करूंगी। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले हाईवे को बेहतर बताया जाएगा।
-इवा आशीष श्रीवास्तव, डीएम टिहरी।
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ऋषिकेश-बदरीनाथ और ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा टिहरी जिले की सीमा के अंतर्गत आता है। चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर ऑल वेदर परियोजना के तहत दोनों हाईवे का चौड़ीकरण और सुधारीकरण कार्य करवाया गया है, लेकिन हाईवे पर नए डेंजर जोन प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनते जा रहे हैं। ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर कंडीसौड़ तक जहां कटिंग और डामरीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। वहीं ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर भी कीर्तिनगर तक कटिंग कार्य पूरा हो गया है, लेकिन यहां पर तोताघाटी, व्यासी और साकनीधार में कटिंग के दौरान ब्लैक स्पॉट बनकर उभर है। यही स्थिति ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर फकोट, भिन्नू खाला, खाड़ी, भंडारकी गांव और नागणी में बनी हुई है। गत वर्ष अगस्त माह की बारिश से भिन्नू खाले में हाईवे का लगभग 100 मीटर हिस्सा पूरी तरह से टूट गया था। तीन दिन तक हाईवे पर यातायात पूरी तरह से बाधित रहा था। भिन्नू खाले में अभी भी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हाईवे पर वाहनों की आवाजाही हो रही है।
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चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले यदि डेंजर जोनों का ट्रीमेंट नहीं किया गया, तो यात्रा के दौरान देश-विदेश से चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की मुसीबत बढ़ सकती है। पर्यावरणविद् विजय जड़धारी का कहना है कि हाईवे पर डेंजर जोनों का मरम्मत करने से पहले भू-वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम को संयुक्त रूप से सर्वे करना चाहिए। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर हाईवे पर सुरक्षा की दृष्टि से मरम्मत कार्य करना चाहिए।
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भिन्नू खाला और फकोट में क्षतिग्रस्त हाईवे का मरम्मत करने का प्रस्ताव बीआरओ ने तैयार कर भारत सरकार को भेजा है। इस वित्तीय वर्ष में स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। दो-तीन दिन में स्वयं हाईवे का निरीक्षण करूंगी। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले हाईवे को बेहतर बताया जाएगा।
-इवा आशीष श्रीवास्तव, डीएम टिहरी।