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Tehri News: हर्षिल क्षेत्र में देवदार पेड़ों को बचाने की मुहिम फिर हुई शुरू
Sat, 06 Dec 2025 06:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sat, 06 Dec 2025 06:54 PM IST
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आज हर्षिल क्षेत्र में पहुंचकर यात्रा दल में शामिल लोग करेंगे वन संकुल का पूजन
चंबा (टिहरी)। हर्षिल क्षेत्र के ईको सेंसेटिव जोन में देवदार पेड़ों को बचाने की मुहिम फिर से शुरू हो गई है। इसके लिए हिमालय है तो हम हैं यात्रा दल के लोग ऋषिकेश से आलवेदर रोड का अध्ययन करते हुए चंबा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने लोगों से आल वेदर रोड के फायदे और नुकसान पर चर्चा भी की।
हिमालय है तो हम हैं अभियान के अंतर्गत पर्यावरण प्रेमी वैज्ञानिक और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का एक यात्रा दल ऋषिकेश से होते हुए चंबा में पहुंचा। आयोजन समिति के आयुष जोशी ने यात्रा के उद्देश्य बताते हुए कहा कि विश्वभर के वैज्ञानिकों, अनुभवी प्रशासकों और हिमालय क्षेत्र के प्रतिनिधियों से हिमालय के पर्यावरण की बिगड़ती परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में मां गंगा के उद्गम भागीरथी घाटी की संवदेनशीलता को देखते हुए इको सेंसेटिव जोन में स्थित देवदार के पेड़ों के संरक्षण के लिए तात्कालिक कदम उठाए जाने पर सहमति बनी। भागीरथी घाटी में स्थित हर्षिल में ऑल वेदर रोड के लिए देवदार के छह हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं जिनको बचाया जाना बहुत जरूरी है। ऐसे में पेड़ों को बचाने के लिए आज रविवार को हर्षिल क्षेत्र में वन संकुल का पूजन और वृक्षों को रक्षा सूत्र बांध कर राष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रति संवेदनशीलता का वातावरण बनाया जाएगा।
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उन्होंने पूर्व में धराली में आई आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि धराली में देवदार के पेड़ इस भयंकर तबाही को रोकने या काफी हद तक सीमित कर सकते थे। सदियों तक देवदार के वृक्ष धराली के निवासियों के लिए मजबूत सुरक्षा ढाल बनकर खड़े रहे लेकिन बीते कई दशकों में इस इलाके में देवदार और अन्य जंगलों की कटाई ने इस ढाल को ही निढाल कर दिया।
पुनीत सूद ने बताया कि दो दिवसीय यात्रा में हिमालयी घाटी का अध्ययन भी किया जाएगा। हिमालय और पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ों को बचाना होगा। इस मौके पर आरएसएस के पर्यावरण गतिविधि राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्य, प्रांत सह संयोजक चंदन, विभाग संयोजक पूर्ण सिंह रावत, चारधाम परियोजना के लिए हाई पावर कमेटी के सदस्य और पर्यावरणविद् हेमंत ध्यानी आदि मौजूद रहे।
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चंबा (टिहरी)। हर्षिल क्षेत्र के ईको सेंसेटिव जोन में देवदार पेड़ों को बचाने की मुहिम फिर से शुरू हो गई है। इसके लिए हिमालय है तो हम हैं यात्रा दल के लोग ऋषिकेश से आलवेदर रोड का अध्ययन करते हुए चंबा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने लोगों से आल वेदर रोड के फायदे और नुकसान पर चर्चा भी की।
हिमालय है तो हम हैं अभियान के अंतर्गत पर्यावरण प्रेमी वैज्ञानिक और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का एक यात्रा दल ऋषिकेश से होते हुए चंबा में पहुंचा। आयोजन समिति के आयुष जोशी ने यात्रा के उद्देश्य बताते हुए कहा कि विश्वभर के वैज्ञानिकों, अनुभवी प्रशासकों और हिमालय क्षेत्र के प्रतिनिधियों से हिमालय के पर्यावरण की बिगड़ती परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में मां गंगा के उद्गम भागीरथी घाटी की संवदेनशीलता को देखते हुए इको सेंसेटिव जोन में स्थित देवदार के पेड़ों के संरक्षण के लिए तात्कालिक कदम उठाए जाने पर सहमति बनी। भागीरथी घाटी में स्थित हर्षिल में ऑल वेदर रोड के लिए देवदार के छह हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं जिनको बचाया जाना बहुत जरूरी है। ऐसे में पेड़ों को बचाने के लिए आज रविवार को हर्षिल क्षेत्र में वन संकुल का पूजन और वृक्षों को रक्षा सूत्र बांध कर राष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रति संवेदनशीलता का वातावरण बनाया जाएगा।
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उन्होंने पूर्व में धराली में आई आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि धराली में देवदार के पेड़ इस भयंकर तबाही को रोकने या काफी हद तक सीमित कर सकते थे। सदियों तक देवदार के वृक्ष धराली के निवासियों के लिए मजबूत सुरक्षा ढाल बनकर खड़े रहे लेकिन बीते कई दशकों में इस इलाके में देवदार और अन्य जंगलों की कटाई ने इस ढाल को ही निढाल कर दिया।
पुनीत सूद ने बताया कि दो दिवसीय यात्रा में हिमालयी घाटी का अध्ययन भी किया जाएगा। हिमालय और पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ों को बचाना होगा। इस मौके पर आरएसएस के पर्यावरण गतिविधि राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्य, प्रांत सह संयोजक चंदन, विभाग संयोजक पूर्ण सिंह रावत, चारधाम परियोजना के लिए हाई पावर कमेटी के सदस्य और पर्यावरणविद् हेमंत ध्यानी आदि मौजूद रहे।