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मायके पहुंचने से पहले ही छोड़ दी दुनिया
ब्यूरो/अमर उजाला, टिहरी
Updated Tue, 12 May 2015 11:19 PM IST
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भनैड़ी गोनगढ़ की अनीता की किस्मत में मायके का प्यार नहीं था। ससुराल से मायके लिए हंसी खुशी विदा हुई अनीता को शायद मालूम नहीं था कि माता-पिता और बच्चों के साथ उसका यह अंतिम सफर होगा।
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अनीता और उसकी मां आशा देवी दुनिया से चली गई हैं। पिता भरत लाल और पति शांति लाल के लिए वह दुखों का पहाड़ छोड़ गई।
रविवार को हुई थी दुर्घटना
रविवार को घनसाली गैस एजेंसी के समीप दुर्घटनाग्रस्त हुए वाहन में तीन पीढ़ी के लोग हमेशा के लिए एक दूसरे से विदा हो गए। सरणा गांव निवासी भरत लाल और उनकी पत्नी आशा देवी अपनी बेटी अनीता और उसके बच्चों को मायके लाने के लिए शनिवार को उसके ससुराल भनैड़ी गए थे।
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सरणा गांव में 14 मई को नई फसलों के उत्पादन पर ग्रामीण त्योहार मनाते हैं और इसी त्योहार में शामिल होने के लिए अनीता को माता-पिता मायके लाने के लिए गए थे।
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बेटी का नहीं पता
अनीता का बेटा आर्यन और बेटी गोपी ननिहाल जाने के लिए खासे उत्साहित थे, लेकिन दोनों मासूमों को क्या मालूम था कि उनकी मां और नानी रास्ते में ही उन्हें छोड़ कर चली जाएंगी। अनीता की बेटी गोपी का दुर्घटना के बाद से कोई पता नहीं है। दुर्घटना में घायल बेटा आर्यन और पिता भरत लाल अस्पताल में भर्ती हैं।
अनीता के पति शांति लाल को जैसे ही हादसे का पता चला, तो वह भी घटना स्थल पर दौड़ा चला आया और यह सब देख स्तब्ध रह गया। कुछ देर तक वह खामोश बैठा रहा बाद में स्थानीय लोगों ने उसे ढांढस बंधाया। बेटा आर्यन की सलामती की चाहत में वह उसे लेकर श्रीनगर बेस अस्पताल को रवाना हो गया।