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घोड़े चलाकर प्रतिमा कर रही बच्चों का भरण-पोषण
ब्यूरो/ अमर उजाला, घनसाली (टिहरी)
Updated Tue, 07 Mar 2017 10:56 PM IST
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जीवन जीने का संघर्ष और भविष्य की उम्मीद की तलाश करती सीमांत गांव की प्रतिमा देवी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी है, जो पति की मौत के बाद केवल विधवा पेंशन व बेटों पर निर्भर रहती है। लेकिन प्रतिमा देवी ने हिम्मत को बांधते हुए मिथक को तोड़ने का काम कर तीन जिंदगी को संवारने में लगी है। पुरुषों की भांति घोड़ों को चला कर सड़क मार्ग से 12 किमी दूर गंगी गांव में लोगों का समान पहुंचाने का काम कर रही है।
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टिहरी जिले के सीमांत गांव गंगी चीन सीमा से सटा है। गंगी की 36 वर्षीय प्रतिमा देवी पत्नी स्व. भगवान सिंह का मायका और ससुराल भी इसी गांव में है। जब वह महज 32 साल की थी, तब वर्ष 2012 में अपना मकान का काम करते समय गिरने से पति भगवान सिंह की मौत हो गई थी। भगवान सिंह घोड़े चलाकर पूरे परिवार को खर्चा चलते थे, लेकिन मौत के बाद घर में परिवार के पालन-पोषण करने का कोई भी जरिया न होने पर पूरे परिवार का भार प्रतिमा देवी के सिर आ गया। ऐसे में प्रतिमा के सामने तीन बच्चों के लालन-पालन से लेकर पढ़ाई की जिम्मेदारी आ गई।
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पारिवारिक परिस्थिति को देखते हुए प्रतिमा ने घोड़े चलाने के पेशे को अपने हाथों में लेकर गुजर बसर का सहारा बना दिया है। अब वह गंगी से रीह तक लोगों का सामान को दो घोड़ों पर लद कर लाती है और उस के बाद रीह से फिर 12 किमी गंगी गांव पहुंचती है। घोड़ों से कमाई कर वह प्रत्येक दिन दो हजार महीना कमा कर अपने बेटे नत्थी सिंह व बेटी बिजोरा और जमुना का लालन पालन कर उनकेे स्कूल का खर्च उठा रही है।
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प्रतिमा देवी कहती है कि पति के मौत के बाद विधवा पेंशन योजना का लाभ तक नहीं मिल पाया है। बावजूद अपने हौसलों के कारण वह अच्छी आय अर्जित कर समाज के सामने प्रेरणा स्रोत बन गई है।