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Tehri News: पंप स्टोरेज प्लांट का कार्य अंतिम चरण में
Sat, 04 Oct 2025 05:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sat, 04 Oct 2025 05:42 PM IST
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एक मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगी टिहरी पीएसपी परियोजना, जल्द जुड़ेगा ग्रिड से
नई टिहरी। देश का पहला वेरिएबल पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) का काम अंतिम चरण में है। 1000 मेगावाट क्षमता वाले इस प्लांट की चार यूनिटों में से 250-250 मेगावाट की दो यूनिटें पहले ही वाणिज्यिक स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू कर चुकी है। शेष दो यूनिटों (500 मेगावाट) का काम अंतिम चरण में है। टीएचडीसी इन यूनिटों को जल्द ही राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने की इन दिनों तैयारी कर रही है।
टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक एलपी जोशी ने बताया कि टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा। परियोजना से भारत को कोयले पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिले है।
पीएसपी तकनीक बिजली मांग के हिसाब से रियल टाइम में ऊर्जा का भंडारण और उपयोग संभव बनाती है। कम मांग के समय अतिरिक्त ऊर्जा को पंप मोड में जलाशय में संग्रहित किया जाता है। अधिक मांग के समय यही जल बिजली उत्पादन में प्रयोग होता है। परियोजना पूरी होने पर उत्तरी क्षेत्र की बिजली उत्पादन क्षमता में 1000 मेगावाट की वृद्धि होगी।
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नई टिहरी। देश का पहला वेरिएबल पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) का काम अंतिम चरण में है। 1000 मेगावाट क्षमता वाले इस प्लांट की चार यूनिटों में से 250-250 मेगावाट की दो यूनिटें पहले ही वाणिज्यिक स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू कर चुकी है। शेष दो यूनिटों (500 मेगावाट) का काम अंतिम चरण में है। टीएचडीसी इन यूनिटों को जल्द ही राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने की इन दिनों तैयारी कर रही है।
टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक एलपी जोशी ने बताया कि टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा। परियोजना से भारत को कोयले पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिले है।
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पीएसपी तकनीक बिजली मांग के हिसाब से रियल टाइम में ऊर्जा का भंडारण और उपयोग संभव बनाती है। कम मांग के समय अतिरिक्त ऊर्जा को पंप मोड में जलाशय में संग्रहित किया जाता है। अधिक मांग के समय यही जल बिजली उत्पादन में प्रयोग होता है। परियोजना पूरी होने पर उत्तरी क्षेत्र की बिजली उत्पादन क्षमता में 1000 मेगावाट की वृद्धि होगी।
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