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गांवों को आदर्श बनाने के लिए एक साल में भी तैयार नहीं हुआ प्लान
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जिले के 10 अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव को आदर्श ग्राम बनाने की योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है। समाज कल्याण विभाग एक साल बाद भी चयनित गांवों में होने वाले विकास कार्यों का प्लान तैयार नहीं कर पाया है, जिसके चलते गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सार्वजनिक रास्तों, नालियों का काम शुरू नहीं हो पाया है।
केंद्र सरकार ने जाखणीधार ब्लॉक के अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव ढुंग, कफलोग, रतोली, प्रतापनगर के पोखरी, गढ-सिनवालगांव, कीर्तिनगर के जखंड, भिलंगना रगस्या, गनगर, करखेरी, देवप्रयाग जखेर मय उमरी गांव को फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम सभा के लिए चुना था। केंद्र सरकार ने चयनित प्रत्येक गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सीसी खंडिजा, नालियां, सार्वजनिक शौचालय समेत 19 कार्यों को शामिल किया है। केंद्र ने पहले चरण में 21-21 लाख रुपये की धनराशि समाज कल्याण निदेशालय को दी थी। निदेशालय ने जिलास्तर पर समाज कल्याण विभाग को चयनित गांवों में बैठकें कर विकास योजनाओं का प्लान तैयार करने के निर्देश दिए थे। विभाग ने प्लान तैयार कर निदेशालय को भेजना था, ताकि स्वीकृत धनराशि संबंधित गांवों के विकास के लिए जारी की जा सके। साथ ही प्लान के अनुसार अतिरिक्त बजट के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना था, लेकिन विभाग ने एक साल बाद भी गांवों में होने वाले विकास कार्यों का प्लान बनाकर निदेशालय को नहीं भेजा। जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से गांवों की कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्य शुरू करवाने की मांग की।
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केंद्र सरकार ने जाखणीधार ब्लॉक के अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव ढुंग, कफलोग, रतोली, प्रतापनगर के पोखरी, गढ-सिनवालगांव, कीर्तिनगर के जखंड, भिलंगना रगस्या, गनगर, करखेरी, देवप्रयाग जखेर मय उमरी गांव को फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम सभा के लिए चुना था। केंद्र सरकार ने चयनित प्रत्येक गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सीसी खंडिजा, नालियां, सार्वजनिक शौचालय समेत 19 कार्यों को शामिल किया है। केंद्र ने पहले चरण में 21-21 लाख रुपये की धनराशि समाज कल्याण निदेशालय को दी थी। निदेशालय ने जिलास्तर पर समाज कल्याण विभाग को चयनित गांवों में बैठकें कर विकास योजनाओं का प्लान तैयार करने के निर्देश दिए थे। विभाग ने प्लान तैयार कर निदेशालय को भेजना था, ताकि स्वीकृत धनराशि संबंधित गांवों के विकास के लिए जारी की जा सके। साथ ही प्लान के अनुसार अतिरिक्त बजट के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना था, लेकिन विभाग ने एक साल बाद भी गांवों में होने वाले विकास कार्यों का प्लान बनाकर निदेशालय को नहीं भेजा। जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से गांवों की कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्य शुरू करवाने की मांग की।
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