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‘छात्र छात्राओं का ऑनलाइन शिक्षण चुनौती’
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शहीद बेलमती चौहान राजकीय महाविद्यालय पोखरी (क्वीली) के हिंदी विभाग की ओर से रविवार को वेबिनार का आयोजन हुआ। ‘ऑनलाइन शिक्षण पद्धति उपलब्धियां, समस्याएं, संभावनाएं’ विषय पर अपने विचार रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि ऑनलाइन पठन, पाठन बेशक समय की मांग है, लेकिन सबका इससे जुड़ पाना चुनौती भी है।
इससे पूर्व वेबिनार का मुख्य अतिथि पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एनपी माहेश्वरी ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कोर्स परंपरागत कोर्स की अपेक्षा कम खर्चीले, लचीले और अधिक विकल्प की सुविधा से युक्त हैं। लेकिन ऑनलाइन कोर्स डिजाइन करते समय कंटेंट कलेक्शन, कंटेंट मैनेजमेंट, कनेक्टिविटी, को-ऑर्डिनेशन, कैपेसिटी बिल्डिंग पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
डॉ. नीलम राठी ने लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षा को समय की जरूरत बताया, लेकिन यह भी कहा कि यह परंपरागत शिक्षण का विकल्प नहीं हो सकता।
वेबिनार की संयोजक और महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुमिता श्रीवास्तव ने कहा कि सभी छात्रों को ऑनलाइन शिक्षण पद्धति से जोड़ने के लिए संसाधनों की आवश्यकता है।
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हिंदी विभागाध्यक्ष डा. राम भरोसे ने बताया कि वेबिनार में करीब पांच सौ से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। वेबिनार में डॉ. विनय गुदारी, प्रवीण बौद्ध, डॉ. एके सिंह डॉ. विवेकानंद भट्ट, डॉ. मुकेश सेमवाल, डॉ. वंदना सेमवाल ने अनुभव साझा किए।
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इससे पूर्व वेबिनार का मुख्य अतिथि पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एनपी माहेश्वरी ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कोर्स परंपरागत कोर्स की अपेक्षा कम खर्चीले, लचीले और अधिक विकल्प की सुविधा से युक्त हैं। लेकिन ऑनलाइन कोर्स डिजाइन करते समय कंटेंट कलेक्शन, कंटेंट मैनेजमेंट, कनेक्टिविटी, को-ऑर्डिनेशन, कैपेसिटी बिल्डिंग पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
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डॉ. नीलम राठी ने लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षा को समय की जरूरत बताया, लेकिन यह भी कहा कि यह परंपरागत शिक्षण का विकल्प नहीं हो सकता।
वेबिनार की संयोजक और महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुमिता श्रीवास्तव ने कहा कि सभी छात्रों को ऑनलाइन शिक्षण पद्धति से जोड़ने के लिए संसाधनों की आवश्यकता है।
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हिंदी विभागाध्यक्ष डा. राम भरोसे ने बताया कि वेबिनार में करीब पांच सौ से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। वेबिनार में डॉ. विनय गुदारी, प्रवीण बौद्ध, डॉ. एके सिंह डॉ. विवेकानंद भट्ट, डॉ. मुकेश सेमवाल, डॉ. वंदना सेमवाल ने अनुभव साझा किए।