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अब श्रीदेव सुमन विवि से भी कर सकेंगे पीएचडी
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श्रीदेव सुमन विवि से पीएचडी का सपना संजोए छात्र-छात्राओं के लिए इंतजार की घड़ियां खत्म होने जा रही है। विवि ने इस सत्र से पीएचडी शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। खास बात यह है कि विवि पीएचडी उत्तराखंड के तीर्थ, सांस्कृतिक विविधता, पलायन और प्राकृतिक संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित करेगा। इस कोर्स में अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद ही दाखिला मिलेगा।
एचएनबी गढ़वाल विवि को 2009 में केंद्रीय विवि का दर्जा मिला। उसके बाद 2012 में श्रीदेव सुमन विवि अस्तित्व में आया। इसके बाद एचएनबी विवि से संबद्ध कालेजों को श्रीदेव सुमन विवि को ट्रांसफर किया गया। इन सात सालों में श्रीदेव सुमन विवि से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पास आउट हो चुके हैं। ऐसे में विवि से पीएचडी करने के इच्छुक छात्रों को इंतजार करना पड़ा रहा है। कई साल से पीएचडी शुरू करने की कवायद में जुटे विवि ने दावा किया है कि आगामी सत्र से पीएचडी शुरू कर दी जाएगी।
विवि से अभी तक 114 निजी कालेज और 53 सरकारी कालेज संबद्ध हैं। विवि का कहना है कि जून-जुलाई में प्रवेश परीक्षा के बाद पीएचडी कोर्स की शुरूआत कर दी जाएगी। विवि शोध पाठ्यक्रम के सिलेबस में उत्तराखंड के संसाधनों पर मुख्य रूप से फोकस करने जा रहा है, जिसमें तीर्थाटन, ग्रामीण पर्यटन, सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक संसाधन, आपदा प्रबंधन को मुख्य रूप से जोड़ा जाएगा।
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विवि में आगामी सत्र से पीएचडी शुरू कर दी जाएगी। पीएचडी के विषय में उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक विविधता को मुख्य रूप से फोकस किया जाएगा, जिससे इसका फायदा राष्ट्र की नीति को बनाने के साथ ही रोजगार सृजन में भी हो सके।
-डा. पीपी ध्यानी, कुलपति श्रीदेव सुमन विवि।
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एचएनबी गढ़वाल विवि को 2009 में केंद्रीय विवि का दर्जा मिला। उसके बाद 2012 में श्रीदेव सुमन विवि अस्तित्व में आया। इसके बाद एचएनबी विवि से संबद्ध कालेजों को श्रीदेव सुमन विवि को ट्रांसफर किया गया। इन सात सालों में श्रीदेव सुमन विवि से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पास आउट हो चुके हैं। ऐसे में विवि से पीएचडी करने के इच्छुक छात्रों को इंतजार करना पड़ा रहा है। कई साल से पीएचडी शुरू करने की कवायद में जुटे विवि ने दावा किया है कि आगामी सत्र से पीएचडी शुरू कर दी जाएगी।
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विवि से अभी तक 114 निजी कालेज और 53 सरकारी कालेज संबद्ध हैं। विवि का कहना है कि जून-जुलाई में प्रवेश परीक्षा के बाद पीएचडी कोर्स की शुरूआत कर दी जाएगी। विवि शोध पाठ्यक्रम के सिलेबस में उत्तराखंड के संसाधनों पर मुख्य रूप से फोकस करने जा रहा है, जिसमें तीर्थाटन, ग्रामीण पर्यटन, सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक संसाधन, आपदा प्रबंधन को मुख्य रूप से जोड़ा जाएगा।
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विवि में आगामी सत्र से पीएचडी शुरू कर दी जाएगी। पीएचडी के विषय में उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक विविधता को मुख्य रूप से फोकस किया जाएगा, जिससे इसका फायदा राष्ट्र की नीति को बनाने के साथ ही रोजगार सृजन में भी हो सके।
-डा. पीपी ध्यानी, कुलपति श्रीदेव सुमन विवि।