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हाइड्रो पावर अभियांत्रिकी संस्थान में शुरू नहीं हुआ एमटेक
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टीएचडीसी हाइड्रो पावर प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी संस्थान भागीरथीपुरम में एमटेक की कक्षाएं शुरू करवाने की हसरत पूरी नहीं हो पाई है। वर्ष 2017-18 में संस्थान ने हाइड्रो पावर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस में एमटेक की कक्षाएं शुरू करने के लिए एआईसीटीई (ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्लीकल एजूकेशन) को प्रस्ताव भेजा था। एआईसीटीई ने भी 2019-20 से कक्षाएं संचालन के लिए जरूरी व्यवस्थाएं जुटाने के लिए संस्थान को निर्देश दिए थे, लेकिन इस बीच संस्थान में निदेशक का कार्यकाल पूरा होने से लेकर अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त न हो पाने के कारण एमटेक के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
भागीरथीपुरम स्थित हाइड्रो पावर संस्थान 2011 से शुरू हुआ था, जिसमें अभी तक बीटेक की सिविल, मेकेनिकल, इलेक्ट्रीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस में देश के विभिन्न राज्यों के छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है। छात्रों को अभी तक केवल अंतिम वर्ष में ही हाइड्रो पावर को वैकल्पिक विषय के तौर पर पढ़ने का मौका दिया जाता है। ऐसे में विकल्प के तौर पर कम ही छात्र-छात्राएं हाइड्रो पावर को लेते हैं। संस्थान ने वर्ष 2017-18 में 60 सीटों पर बीटेक में हाइड्रो पावर की अलग ब्रांच और इलेक्ट्रॉनिक्स, हाइड्रो पावर और कंप्यूटर साइंस में 18-18 सीटों पर एमटेक की कक्षाएं शुरू करने की तैयारियां की थी। इसके लिए उत्तराखंड तकनीकी विवि और एआईसीटीई से अनुमति मांगी थी। इसके लिए संस्थान के स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर इस संबंध में पत्राचार भी किया गया था, लेकिन विवि और एआईसीटीई ने संस्थान को फैकल्टी, प्रोफेसर समेत अन्य सुविधाएं जुटाने को कहा था। बावजूद संस्थान के तत्कालीन निदेशक का कार्यकाल पूरा हो गया, लेकिन लंबे समय बाद भी संस्थान में स्थायी निदेशक, प्रोफेसरों के रिक्त पदों पर नियुक्तियां और अन्य व्यवस्था बेहतर न होने के कारण एमटेक की कक्षाएं शुरू करने की हसरत पूरी नहीं हो पाई। जिससे प्रत्येक वर्ष बीटेक पासआउट होने वाले छात्र-छात्राओं के एमटेक में प्रवेश के लिए अन्य स्थानों का रुख करना पड़ रहा है। इस संबंध में संस्थान के असिस्टेंट रजिस्टार विक्रांत कुमार का कहना है कि स्थायी निदेशक न होने के कारण एमटेक की कक्षाएं शुरू करने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
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भागीरथीपुरम स्थित हाइड्रो पावर संस्थान 2011 से शुरू हुआ था, जिसमें अभी तक बीटेक की सिविल, मेकेनिकल, इलेक्ट्रीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस में देश के विभिन्न राज्यों के छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है। छात्रों को अभी तक केवल अंतिम वर्ष में ही हाइड्रो पावर को वैकल्पिक विषय के तौर पर पढ़ने का मौका दिया जाता है। ऐसे में विकल्प के तौर पर कम ही छात्र-छात्राएं हाइड्रो पावर को लेते हैं। संस्थान ने वर्ष 2017-18 में 60 सीटों पर बीटेक में हाइड्रो पावर की अलग ब्रांच और इलेक्ट्रॉनिक्स, हाइड्रो पावर और कंप्यूटर साइंस में 18-18 सीटों पर एमटेक की कक्षाएं शुरू करने की तैयारियां की थी। इसके लिए उत्तराखंड तकनीकी विवि और एआईसीटीई से अनुमति मांगी थी। इसके लिए संस्थान के स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर इस संबंध में पत्राचार भी किया गया था, लेकिन विवि और एआईसीटीई ने संस्थान को फैकल्टी, प्रोफेसर समेत अन्य सुविधाएं जुटाने को कहा था। बावजूद संस्थान के तत्कालीन निदेशक का कार्यकाल पूरा हो गया, लेकिन लंबे समय बाद भी संस्थान में स्थायी निदेशक, प्रोफेसरों के रिक्त पदों पर नियुक्तियां और अन्य व्यवस्था बेहतर न होने के कारण एमटेक की कक्षाएं शुरू करने की हसरत पूरी नहीं हो पाई। जिससे प्रत्येक वर्ष बीटेक पासआउट होने वाले छात्र-छात्राओं के एमटेक में प्रवेश के लिए अन्य स्थानों का रुख करना पड़ रहा है। इस संबंध में संस्थान के असिस्टेंट रजिस्टार विक्रांत कुमार का कहना है कि स्थायी निदेशक न होने के कारण एमटेक की कक्षाएं शुरू करने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
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