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संविदा प्रोफेसरों के भरोसे प्रौद्योगिकी संस्थान

Thu, 02 Jan 2020 10:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jan 2020 10:27 PM IST
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Institute of Technology relied upon by contract professors
टीएचडीसी हाइड्रो पावर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापना के नौ साल में भी स्थायी प्रोफेसर, एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियां नहीं हो पाई है। ऐसे में संस्थान लंबे समय से संविदा प्रोफेसरों के भरोसे चल रहा है। जनवरी 2019 में 28 प्रोफेसरों समेत निदेशक की नियुक्तियों के लिए विज्ञप्ति जारी हुई थी, लेकिन अभी तक चयन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जून 2019 से संस्थान प्रभारी निदेशक के जिम्मे हैं।
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टीएचडीसी इंडिया लि. ने भागीरथीपुरम में करीब 15 करोड़ की लागत से टीएचडीसी आईएचईटी (टीएचडीसी हाइड्रो पावर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी) संस्थान का निर्माण किया था। वर्ष 2011 से अभियांत्रिकी संस्थान में पांच विषयों में बीटेक की पढ़ाई शुरू हुई थी, लेकिन अधिकांश पदों पर संविदा प्रोफेसर होने से संस्थान को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संस्थान प्रबंधन की ओर से स्थायी प्रोफेसरों के पदों के सृजन को लेकर शासनस्तर पर गंभीर प्रयास नहीं किए गए। बमुश्किल दिसंबर 2018 में शासन ने 60 प्रोफेसरों के पदों की स्वीकृति देते हुए संस्थान को नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने को कहा था। संस्थान ने जनवरी 2019 में पहले चरण में चार प्रोफेसर, छह एसोसिएट प्रोफेसर और 18 असिस्टेंट प्रोफेसरों समेत निदेशक की नियुक्ति ही विज्ञप्ति प्रकाशित हुई थी। कार्यरत निदेशक का कार्यकाल भी जून 2019 में पूरा हो रहा था। वर्ष 2019 समाप्ति की ओर है, लेकिन प्रोफेसरों की चयन प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। साथ ही छह माह से संस्थान में निदेशक भी नहीं है। वर्तमान में गोपेश्वर इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक को ही अतिरिक्त जिम्मेदारी देखनी पड़ रही है। चयन प्रक्रिया शुरू होने का प्रमुख कारण स्थायी निदेशक न होने से लेकर कार्यरत शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मियों के बीच आपसी विवाद और तकनीकी विवि के बीच तालमेल की कमी है। प्रोफेसरों की नियुक्तियां न होने के कारण संस्थान में उच्च गुणवत्तापरक तकनीकी शिक्षा छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रही है। इस सत्र में भी बीटेक प्रथम वर्ष में 50 फीसदी सीटों पर ही प्रवेश हो पाएं हैं। एमटेक की कक्षाएं, हाइड्रो पावर एनर्जी के विषय भी शुरू नहीं हो पाए हैं।
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विभिन्न कारणों के चलते नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। प्रयास किया जा रहा है, कि जनवरी 2020 में चयन प्रक्रिया पूरी हो सके। निदेशक की नियुक्ति शासनस्तर से होनी है।
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प्रो. कृष्णकांत सिंह मेर, निदेशक टीएचडीसी, आईएचईटी।
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