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नेरी के ग्रामीणों ने बिना सरकारी मदद की बनाया बरात घर
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सरकार जब ग्रामीणों की परेशानियों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो उन्हें खुद ही इसका हल ढूंढना पड़ता है। नेरी के ग्रामीण लंबे समय से गांव में बरात घर निर्माण की मांग कर रहे थे। इसके लिए ग्रामीण लगातार शासन-प्रशासन के चक्कर लगाते रहे थे लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो पाई। ऐसे में गांव के युवाओं ने स्वयं ही बरातघर बनाने की ठान ली। विभिन्न स्थानों पर रोजगार करने वालों से लेकर गांव में निवासरत ग्रामीणों ने 12 लाख रुपये चंदा जुटा कर दो सौ लोगों के बैठने की क्षमता का बरातघर का निर्माण कर मिसाल पेश की।
थौलधार ब्लॉक के नेरी गांव में 160 परिवार रहते हैं। इनकी कुल आबादी आठ सौ के करीब है। गांव में सार्वजनिक कार्यक्रम करने के लिए कोई सामुदायिक भवन नहीं था। जब भी गांव में शादी, विवाह, चूड़ाकर्म संस्कार और अन्य धार्मिक आयोजन के दौरान बारिश होती थी तो ग्रामीणों को खासी परेशानियां उठानी पड़ती थी। ग्रामीण लगातार शासन-प्रशासन से गांव में बरातघर निर्माण की मांग करते रहे। इसके लिए उन्होंने लगातार अधिकारियों के चक्कर भी काटे लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी अपने गांव लौटे थे। उन्होंने स्वयं के संसाधन और श्रमदान के जरिए बरातघर बनाने का निर्णय लिया। गांव के कर्ण सिंह, नैन सिंह, सोबत सिंह, सुंदर सिंह आदि ने अपने चार कमरों के आवासीय भवन को बरातघर बनाने के लिए दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने गांव में एक समिति बनाई। जिसने अन्य लोगों से बरातघर बनाने के लिए आर्थिक मदद मांगी। सबसे पहले उत्तराखंड सचिवालय देहरादून में सहायक निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने मदद के हाथ बढ़ाते हुए एक लाख रुपये दिए। मस्तू दास नेरी गांव के हैं।
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इसके बाद अन्य लोगों से भी करीब 12 लाख रुपये चंदा जुटाया गया जबकि दो लाख रुपये जिला पंचायत ने बरातघर के निर्माण के लिए दी। वर्तमान में गांव में दो सौ लोगों के बैठने के लिए बरातघर बन चुका है। इसमें शादी-विवाह से लेकर अन्य कार्य होने शुरू हो गए थे। क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मल सिंह राणा, प्रधान मालती भंडारी, नव ज्योति जन कल्याण समिति के राजेंद्र रांगड़ आदि ने बताया कि जन सहभागिता और श्रमदान से बरातघर बन गया है। बावजूद शौचालय, किचन निर्माण नहीं हो पाया है। इसके लिए भी मदद की जरूरत है। ग्रामीणों की इस पहल की हर तरफ सराहना हो रही है।
इस बाबत जिला समाज कल्याण अधिकारी किशन चौहान का कहना है कि बरातघर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था लेकिन शासन से बजट नहीं मिल पाया।
एक साल में बनकर तैयार हुआ बरातघर
नेरी गांव में बरातघर निर्माण में ग्रामीणों को एक साल का वक्त लगा। क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मल सिंह राणा, प्रधान मालती भंडारी ने बताया कि अलग-अलग समय में चंदा की धनराशि मिलती रही। धनराशि मिलने पर बरातघर निर्माण के लिए सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री खरीदारी करते रहे। 14 लाख की लागत से बरातघर बनकर तैयार किया गया। छह माह पहले जब बरातघर बना तो उसके बाद अब तक 10 शादियां हो चुकी है। कई बार ग्रामा पंचायत की बैठक हो चुकी है।
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थौलधार ब्लॉक के नेरी गांव में 160 परिवार रहते हैं। इनकी कुल आबादी आठ सौ के करीब है। गांव में सार्वजनिक कार्यक्रम करने के लिए कोई सामुदायिक भवन नहीं था। जब भी गांव में शादी, विवाह, चूड़ाकर्म संस्कार और अन्य धार्मिक आयोजन के दौरान बारिश होती थी तो ग्रामीणों को खासी परेशानियां उठानी पड़ती थी। ग्रामीण लगातार शासन-प्रशासन से गांव में बरातघर निर्माण की मांग करते रहे। इसके लिए उन्होंने लगातार अधिकारियों के चक्कर भी काटे लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी अपने गांव लौटे थे। उन्होंने स्वयं के संसाधन और श्रमदान के जरिए बरातघर बनाने का निर्णय लिया। गांव के कर्ण सिंह, नैन सिंह, सोबत सिंह, सुंदर सिंह आदि ने अपने चार कमरों के आवासीय भवन को बरातघर बनाने के लिए दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने गांव में एक समिति बनाई। जिसने अन्य लोगों से बरातघर बनाने के लिए आर्थिक मदद मांगी। सबसे पहले उत्तराखंड सचिवालय देहरादून में सहायक निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने मदद के हाथ बढ़ाते हुए एक लाख रुपये दिए। मस्तू दास नेरी गांव के हैं।
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इसके बाद अन्य लोगों से भी करीब 12 लाख रुपये चंदा जुटाया गया जबकि दो लाख रुपये जिला पंचायत ने बरातघर के निर्माण के लिए दी। वर्तमान में गांव में दो सौ लोगों के बैठने के लिए बरातघर बन चुका है। इसमें शादी-विवाह से लेकर अन्य कार्य होने शुरू हो गए थे। क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मल सिंह राणा, प्रधान मालती भंडारी, नव ज्योति जन कल्याण समिति के राजेंद्र रांगड़ आदि ने बताया कि जन सहभागिता और श्रमदान से बरातघर बन गया है। बावजूद शौचालय, किचन निर्माण नहीं हो पाया है। इसके लिए भी मदद की जरूरत है। ग्रामीणों की इस पहल की हर तरफ सराहना हो रही है।
इस बाबत जिला समाज कल्याण अधिकारी किशन चौहान का कहना है कि बरातघर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था लेकिन शासन से बजट नहीं मिल पाया।
एक साल में बनकर तैयार हुआ बरातघर
नेरी गांव में बरातघर निर्माण में ग्रामीणों को एक साल का वक्त लगा। क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मल सिंह राणा, प्रधान मालती भंडारी ने बताया कि अलग-अलग समय में चंदा की धनराशि मिलती रही। धनराशि मिलने पर बरातघर निर्माण के लिए सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री खरीदारी करते रहे। 14 लाख की लागत से बरातघर बनकर तैयार किया गया। छह माह पहले जब बरातघर बना तो उसके बाद अब तक 10 शादियां हो चुकी है। कई बार ग्रामा पंचायत की बैठक हो चुकी है।