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बिना अधिकारियों के कैसे होगा समाज कल्याण
ब्यूरो/अमर उजाला टिहरी
Updated Mon, 01 Aug 2016 10:38 PM IST
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जनपद में पिछले दस साल से जिला समाज कल्याण अधिकारी ही नहीं हैं। जिला समाज कल्याण विभाग में करीब 50 फीसदी स्टाफ की कमी चल रही है। इसके चलते छात्रवृत्ति वितरण, पेंशन, अनुदान, सामाजिक सुरक्षा और अन्य समाज कल्याण से जुड़ी योजनाओं का कार्य प्रभावित हो रहा है। इससे लाभार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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सहायक समाज कल्याण अधिकारी के स्वीकृत 15 पदों के सापेक्ष दस तैनात हैं और पांच पद रिक्त चल रहे हैं। अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी को जिला समाज कल्याण अधिकारी का भी कार्यभार दिया गया है। प्रधान सहायक के दो पदों के सापेक्ष एक ही है।
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प्रवर सहायक के तीन पदों के सापेक्ष एक भी नहीं मिला है। कनिष्ठ सहायक के चार पदों के सापेक्ष एक ही तैनात है, जबकि तीन पद खाली चल रहे हैं। अनुसूचित जाति बालक/बालिका छात्रावास में सहायक अधीक्षक के स्वीकृत दो पदों के सापेक्ष एक भी तैनात नहीं है।
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दोनों पद खाली चल रहे हैं। यहां चतुर्थ श्रेणी के छह पद स्वीकृत हैं, लेकिन दो ही तैनात हैं। चार पद खाली हैं। कनिष्ठ सहायक कैलाश चंद्र बलोदी व प्रवर सहायक उदय सिंह पिछले चार साल पहले सेवानिवृत्त हो गए थे।
तब से इनकी जगह दूसरा कर्मचारी नहीं मिला। कनिष्ठ सहायक सैन सिंह और प्रवर सहायक गंभीर सिंह का चार साल पहले स्थानांतरण हो गया था। तब से इनकी जगह नए कर्मचारियों की तैनाती नहीं हुई है।
फरवरी में कार्यमुक्त हो रहे हैं तीन और कर्मचारी
फरवरी 2017 में एक प्रशासनिक अधिकारी, एक सहायक समाज कल्याण अधिकारी व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे स्टाफ की कमी और बढ़ जाएगी।
योजनाएं जो हो रही हैं प्रभावित
गौरा देवी कन्या धन योजना, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, विकलांग, पारिवारिक पेंशन योजना, राज्य वृद्धावस्था पेंशन, विकलांग, किसान और पुरोहित पेंशन योजना। जगरिया-डंगरिया, दाई, मंगलेर (मांगलिक गीतकार) समेत दो दर्जन से अधिक पेंशन और अन्य योजनाएं। इसके अलावा अनुसूचित जाति उत्पीड़न के मामले, अनुसूचित जाति विवाह मामले, अनुसूचित गौरा देवी कन्या धन समेत तमाम योजनाएं समय से संपादित नहीं हो रही हैं।
निदेशालय को कई बार रिक्त पदों के बाबत लिखा गया है। जिलाधिकारी के माध्यम से भी निदेशालय को कई बार स्टाफ की मांग भेजी गई है। स्टाफ की कमी के कारण योजनाओं के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- रतन सिंह रावल, प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी