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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Adhik Maas 2020: Festivals lated by 20 to 25 days this year

Adhik Maas 2020: 20 से 25 दिन आगे खिसके त्योहार, शादियों के लगन भी एक माह देरी से होंगे शुरू

Mon, 28 Sep 2020 06:43 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टिहरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टिहरी Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Mon, 28 Sep 2020 06:43 PM IST
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Adhik Maas 2020: Festivals lated by  20 to 25 days this year
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

इस साल अधिकमास के कारण शारदीय नवरात्रि और दीपावली सहित सभी त्योहार पिछले साल की तुलना में 20 से 25 दिन की देरी से मनाए जाएंगे। पंचांग गणना के अनुसार अधिक मास होने के कारण त्योहारों में देरी आएगी। शादियों के लगन भी एक माह देरी से शुरू होंगे। सनातन धर्म के अनुसार हर तीन साल में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) आता है।

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इसके पीछे ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य और चंद्रमा की गति को माना जाता है। इसमें सूर्य का साल 365 दिन का होता है, जबकि चंद्रमा का साल 354 दिन का होता है। इन दोनों के बीच 11 दिन का अंतर रहता है। इस अंतर को दूर करने के लिए हर तीसरे साल अधिक मास आता है। 
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इस साल 17 सितंबर से 16 अक्तूबर तक आश्विन अधिक मास रहने के कारण व्रत-त्योहार गत वर्ष की तुलना में आगे खिसक गए हैं। इस साल अक्तूबर से दिसंबर तक जो भी त्योहार होंगे, वे गत साल की तिथियों के मुकाबले 20 से 25 दिन तक की देरी से आएंगे। पिछले साल नवरात्रि 29 सितंबर से शुरू हुए थे, तो इस साल 17 अक्तूबर से प्रारंभ होंगे। दशहरा पिछले साल 8 अक्तूबर को था, इस साल 25 अक्तूबर को आएगा।
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दीपावली इस साल 14 नवंबर को आएगी। देव उत्थान एकादशी इस साल 25 नवंबर को आएगी। विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष और पंडित उदय शंकर भट्ट ने कहा कि हर साल 24 एकादशी होती हैं, लेकिन इस साल मलमास के कारण 26 एकादशी होंगी। 17 अक्तूबर से नवरात्रि शुरू होते ही मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाएंगे।


मलमास को भगवान विष्णु ने दिया आशीर्वाद
पौराणिक कथा के अनुसार पहले प्रत्येक राशि, ग्रह-नक्षत्र, बारह मास आदि सभी के स्वामी थे, लेकिन मलमास का कोई स्वामी नहीं था। दु:खी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास बैकुंठ लोक में जा पहुंचे। उन्होंने कहा कि मेरा कोई स्वामी नहीं होने के कारण सभी लोग मेरा तिरस्कार कर रहे हैं। तब श्रीहरि ने मलमास का हाथ पकड़ लिया और वरदान स्वरूप मलमास को अपना नाम पुरुषोत्तम दिया। साथ ही आशीर्वाद दिया कि जो इस मास में पूजा-पाठ और दान करेगा, उसको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी।

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