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600 गांवों के किसानों को मिलेगा सर्टिफिकेट
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बाजार में जैविक सब्जियों, फलों और फसलों की बढ़ती डिमांड को देखते हुए उद्यान और कृषि विभाग ने टिहरी जिले के 600 गांवों को जैविक गांव का दर्जा देने की तैयारी पूरी कर ली है। चयनित गांवों के काश्तकारों को मार्च में एनसीओएफ (नेशनल सेंटर ऑफ आर्गेनिक फार्मिंग) एपीड़ा संस्थान की ओर से जैविक प्रमाणपत्र का रजिस्ट्रेशन मिलेगा, जिसके बाद किसान अपने उत्पादों की लेबिलिंग कर उसे बाजार में बेच सकते हैं।
जैविक उत्पादों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यान और कृषि विभाग ने जिले नौ ब्लाकों के 600 गांवों को जैविक ग्राम घोषित कर वहां उत्पादित होने वाले विभिन्न उत्पादों के लिए किसानों को जैविक प्रमाणन सर्टिफिकेट देने के लिए योजना बनाई है। उद्यान विभाग ने चंबा ब्लाक में 26, थौलधार में 22, देवप्रयाग में 30, भिलंगना में 40, जाखणीधार में 19, कीर्तिनगर 21, नरेंद्रनगर में सर्वाधिक 75, प्रतापनगर में 20, जौनपुर में 47 गांवों को जैविक सर्टिफिकेट के लिए चयनित किया है। एक गांव में 50 किसानों को क्लस्टर के रूप में रखा गया है। जिला उद्यान अधिकारी डा. डीके तिवारी का कहना है कि केंद्र सरकार सर्टिफिकेशन के लिए धनराशि मुहैया करवाती है। विभाग ने इकोवा संस्था को सर्टिफिकेशन के लिए जिम्मेदारी दी है। इकोवा संस्थान क्लस्टर वाइज पीजीएसआई इंडिया की वेबसाइट पर गांवों की जानकारी अपलोड करेगा।
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जैविक उत्पादों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यान और कृषि विभाग ने जिले नौ ब्लाकों के 600 गांवों को जैविक ग्राम घोषित कर वहां उत्पादित होने वाले विभिन्न उत्पादों के लिए किसानों को जैविक प्रमाणन सर्टिफिकेट देने के लिए योजना बनाई है। उद्यान विभाग ने चंबा ब्लाक में 26, थौलधार में 22, देवप्रयाग में 30, भिलंगना में 40, जाखणीधार में 19, कीर्तिनगर 21, नरेंद्रनगर में सर्वाधिक 75, प्रतापनगर में 20, जौनपुर में 47 गांवों को जैविक सर्टिफिकेट के लिए चयनित किया है। एक गांव में 50 किसानों को क्लस्टर के रूप में रखा गया है। जिला उद्यान अधिकारी डा. डीके तिवारी का कहना है कि केंद्र सरकार सर्टिफिकेशन के लिए धनराशि मुहैया करवाती है। विभाग ने इकोवा संस्था को सर्टिफिकेशन के लिए जिम्मेदारी दी है। इकोवा संस्थान क्लस्टर वाइज पीजीएसआई इंडिया की वेबसाइट पर गांवों की जानकारी अपलोड करेगा।
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