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Tehri News: सात साल बाद भी अटकी प्रतापनगर के ऊपरी पड़िया गांव की सड़क
Sun, 23 Nov 2025 05:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sun, 23 Nov 2025 05:01 PM IST
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250 परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित
सड़क के अभाव में बीमार और गर्भवती महिलाओं को ढोना पड़ता है कंधों पर सामान
नई टिहरी। प्रतापनगर क्षेत्र के ऊपरी पड़िया गांव के लिए सड़क नहीं होने से ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को रोजाना दो से ढाई किलोमीटर पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। सात वर्ष पूर्व सड़क निर्माण की घोषणा होने के बाद भी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
स्थानीय निवासी अमरजीत सिंह भंडारी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रमिता रावत, पूर्व प्रधान विजय भंडारी, महेंद्र रावत, धर्मेंद्र रावत व राजपाल भंडारी बताया कि ग्राम पंचायत पड़िया दो भागों में बंटा हुआ है। ऊपरी पड़िया गांव के ऊपर और नीचे दोनों ओर सड़क तो है लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। गांव पहुंचने के लिए करीब दो से ढाई किमी पैदल दूरी तय करनी पड़ी है।
गांव में किसी के बीमार होने, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी और कुर्सी का सहारा लेना पड़ता है। लगभग 250 से अधिक परिवारों वाले गांव के लिए वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मदननेगी–प्रतापनगर मोटर मार्ग के 28 किमी बेलम बिट्टा तोक से ढाई किलोमीटर सड़क निर्माण की घोषणा की थी लेकिन सात वर्ष बाद भी कार्य शुरू नहीं हो पाया।
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ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार शासन-प्रशासन और लोनिवि बौराड़ी से सड़क निर्माण की मांग उठा चुके हैं। इसके बावजूद गांव सड़क से वंचित है जिससे क्षेत्र की समस्याएं और अधिक बढ़ रही है।
प्रतापनगर का पड़िया गांव पूर्व से ही सड़क से जुड़ा है। यदि किसी तोक की आबादी सड़क से छूट रही है जिसकी संख्या करीब ढाई सौ है तो उसे शासन की गाइडलाइन के अनुसार पीएमजीएसवाई फोर्थ फेज में शामिल किया गया है। ऐसे गांवों और तोकों के लिए सड़क निर्माण पीएमजीएसवाई के माध्यम से ही किया जाता है।
- योगेश कुमार, अधिशासी अभियंता, लोनिवि प्रांतीय खंड बौराड़ी
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सड़क के अभाव में बीमार और गर्भवती महिलाओं को ढोना पड़ता है कंधों पर सामान
नई टिहरी। प्रतापनगर क्षेत्र के ऊपरी पड़िया गांव के लिए सड़क नहीं होने से ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को रोजाना दो से ढाई किलोमीटर पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। सात वर्ष पूर्व सड़क निर्माण की घोषणा होने के बाद भी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
स्थानीय निवासी अमरजीत सिंह भंडारी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रमिता रावत, पूर्व प्रधान विजय भंडारी, महेंद्र रावत, धर्मेंद्र रावत व राजपाल भंडारी बताया कि ग्राम पंचायत पड़िया दो भागों में बंटा हुआ है। ऊपरी पड़िया गांव के ऊपर और नीचे दोनों ओर सड़क तो है लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। गांव पहुंचने के लिए करीब दो से ढाई किमी पैदल दूरी तय करनी पड़ी है।
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गांव में किसी के बीमार होने, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी और कुर्सी का सहारा लेना पड़ता है। लगभग 250 से अधिक परिवारों वाले गांव के लिए वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मदननेगी–प्रतापनगर मोटर मार्ग के 28 किमी बेलम बिट्टा तोक से ढाई किलोमीटर सड़क निर्माण की घोषणा की थी लेकिन सात वर्ष बाद भी कार्य शुरू नहीं हो पाया।
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ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार शासन-प्रशासन और लोनिवि बौराड़ी से सड़क निर्माण की मांग उठा चुके हैं। इसके बावजूद गांव सड़क से वंचित है जिससे क्षेत्र की समस्याएं और अधिक बढ़ रही है।
प्रतापनगर का पड़िया गांव पूर्व से ही सड़क से जुड़ा है। यदि किसी तोक की आबादी सड़क से छूट रही है जिसकी संख्या करीब ढाई सौ है तो उसे शासन की गाइडलाइन के अनुसार पीएमजीएसवाई फोर्थ फेज में शामिल किया गया है। ऐसे गांवों और तोकों के लिए सड़क निर्माण पीएमजीएसवाई के माध्यम से ही किया जाता है।
- योगेश कुमार, अधिशासी अभियंता, लोनिवि प्रांतीय खंड बौराड़ी