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दुबई में जिंदगी-मौत से जूझ रहा बलबीर

Mon, 27 Jun 2016 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला टिहरी
ब्यूरो/अमर उजाला टिहरी Updated Mon, 27 Jun 2016 10:25 PM IST
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Balbir battling life-death in Dubai
बलबीर - फोटो : amarujala

विकासखंड भिलंगना के अधिकांश युवा रोजगार के लिए विभिन्न देशों में कार्यरत हैं, लेकिन उनके साथ वहां क्या होता है इसकी बानगी डालगांव के बलबीर सिंह कठैत हैं, जो दुबई में चार माह से एक अस्पताल में जीवन-मौत के बीच जूझ रहा है। परिजनों ने विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। परिजनों ने उसकी हत्या का प्रयास का आरोप लगाया है।

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बासर पट्टी की ग्रामसभा डालगांव के बलबीर सिंह कठैत पुत्र प्रेम सिंह (30) दो साल पहले मुंबई से दुबई के महेश होम लंच होटल में कुक की पोस्ट पर काम करने गया था। बीती 27 फरवरी को होटल मैनेजर नैक्सेन का बलबीर के भाई बचन सिंह कठैत को फोन आया कि बलबीर ने अपने गले में चाकू से वार कर दिया है।
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उसे रशीद अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। परिजनों ने 15 मार्च को विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बचन सिंह के पास होटल से 19, 26 और 31 मार्च को फोन आया कि बलबीर अभी भी कोमा में है। बलवीर के तीन भाई मजदूरी कर परिवार का बमुश्किल भरण- पोषण करते हैं।
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ऐसे में वे दुबई नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीती 20 जून को इसी होटल की मुंबई ब्रांच से फोन आया, जिसमें फिर से बलबीर को लेने के लिए आने को कहा गया। बचन सिंह ने आशंका जताई कि होटल में किसी ने बलबीर को जान से मारने का प्रयास किया है। उन्होंने भारतीय दूतावास और सरकार से घायल भाई को घर पहुंचाने और उपचार का खर्च होटल मालिक से दिलाने की मांग की है।

जापान में भी हो चुकी ऐसी घटना
कुछ इसी तरह की घटना तीन दिसंबर 2014 को क्षेत्र के जमोलना निवासी नरेंद्र सेमवाल (35) पुत्र सत्यानंद सेमवाल के साथ ईमाबाडी ओसाका, जापान में स्पाइस किंगडम रेस्टोरेंट में हुई थी। नरेंद्र की लाश कुछ दिनों बाद समुद्र किनारे मिला था। परिजन उसके अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए। जापान सरकार की ओर से एक साल बाद परिजनों को महज मृत्यु प्रमाणपत्र भेजा गया है। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि अब भारतीयों को विदेशों में नौकरी करने जाना खतरे से खाली नहीं है।


 दुबई उच्च आयुक्त से पत्र आया है, जिसमें बलबीर की स्थिति को स्थिर बताया गया है। साथ ही कहा गया कि उसे अधिक दिनों तक यहां नहीं रखा जा सकता। बताया कि परिजन धनाभाव होने के कारण उसे घर लाने में असमर्थता जता रहे हैं, जिसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
-विनोद कुमार, एसडीएम

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