{"_id":"16-78397","slug":"Tehri-78397-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरियाई कंपनी की देखरेख में बनेगा पुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरियाई कंपनी की देखरेख में बनेगा पुल
Tehri
Updated Sat, 18 Oct 2014 05:33 AM IST
विज्ञापन
नई टिहरी। लंबे समय से अधूरे पड़े डोबरा-चांठी पुल के लिए सरकार ने कोरिया की कंपनी योसिन इंजीनियरिंग कारपोरेशन को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट (पीएमसी) बनाया है। कोरियाई कंपनी वीकेएस इंडिया के सहयोग से छह माह के अंदर पुल की ड्राइंग उपलब्ध करवाकर पुल निर्माण में तकनीकी सहयोग देगी। इसके लिए सरकार को कंसलटेंट को 10 करोड़ 73 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
टिहरी बांध की झील बनने के बाद प्रतापनगर से जिला मुख्यालय की दूरी कम करने के लिए 2006 में 440 मीटर लंबे चांठी-डोबरा पुल का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। यह पुल 2008 में बन जाना था, लेकिन 130 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद केवल 320 मीटर आरसीसी पहुंच मार्ग और दोनों ओर पुल के टावर ही खड़े हो सके हैं। मुख्य पुल का काम ड्राइंग नहीं मिलने से अधर में लटका हुआ है। पुल नहीं बनने से करीब एक लाख की आबादी को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। मुख्य पुल की ड्राइंग का कार्य आईआईटी रुड़की को सौंपा गया था, लेकिन वह ड्राइंग तैयार नहीं कर पाए। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर भी यह काम नहीं कर पाया।
साल भर की कोशिशों के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं आमंत्रित की गई थी। इसके बाद 10 अक्तूबर को शासन स्तर पर कोरियाई कंपनी योसिन इंजीनियरिंग कारपोरेशन को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट (पीएमसी) नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था। बृहस्पतिवार को इसका शासनादेश भी जारी हो गया है। योसिन कारपोरेशन के इंजीनियर विगत 11 अक्तूबर को लोनिवि के अधिकारियों के साथ साइट का दौरा कर पुल बनाने के लिए खरीदे गए फेब्रिकेशन और अब तक हुए कार्यों की पड़ताल भी कर चुके हैं।
विज्ञापन
इनका क्या है कहना-
ड्राइंग उपलब्ध करवाने के लिए कंसलटेंट नियुक्त किया गया है। छह माह के अंदर ड्राइंग मिल जाएगी। सरकार ने 18 माह के अंदर पुल का कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने बिना ड्राइंग के ही पुल पर 125 करोड़ खर्च किए हैं, जिसकी जांच करवाई जाएगी।
-विक्रम सिंह नेगी, विधायक प्रतापनगर।
विज्ञापन
टिहरी बांध की झील बनने के बाद प्रतापनगर से जिला मुख्यालय की दूरी कम करने के लिए 2006 में 440 मीटर लंबे चांठी-डोबरा पुल का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। यह पुल 2008 में बन जाना था, लेकिन 130 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद केवल 320 मीटर आरसीसी पहुंच मार्ग और दोनों ओर पुल के टावर ही खड़े हो सके हैं। मुख्य पुल का काम ड्राइंग नहीं मिलने से अधर में लटका हुआ है। पुल नहीं बनने से करीब एक लाख की आबादी को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। मुख्य पुल की ड्राइंग का कार्य आईआईटी रुड़की को सौंपा गया था, लेकिन वह ड्राइंग तैयार नहीं कर पाए। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर भी यह काम नहीं कर पाया।
विज्ञापन
साल भर की कोशिशों के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं आमंत्रित की गई थी। इसके बाद 10 अक्तूबर को शासन स्तर पर कोरियाई कंपनी योसिन इंजीनियरिंग कारपोरेशन को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट (पीएमसी) नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था। बृहस्पतिवार को इसका शासनादेश भी जारी हो गया है। योसिन कारपोरेशन के इंजीनियर विगत 11 अक्तूबर को लोनिवि के अधिकारियों के साथ साइट का दौरा कर पुल बनाने के लिए खरीदे गए फेब्रिकेशन और अब तक हुए कार्यों की पड़ताल भी कर चुके हैं।
विज्ञापन
इनका क्या है कहना-
ड्राइंग उपलब्ध करवाने के लिए कंसलटेंट नियुक्त किया गया है। छह माह के अंदर ड्राइंग मिल जाएगी। सरकार ने 18 माह के अंदर पुल का कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने बिना ड्राइंग के ही पुल पर 125 करोड़ खर्च किए हैं, जिसकी जांच करवाई जाएगी।
-विक्रम सिंह नेगी, विधायक प्रतापनगर।