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16 कर्मचारियों को दोबारा मिली नियुक्ति
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श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में लंबे इंतजार के बाद स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुल गए हैं। दो साल पूर्व हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों को विवि प्रशासन ने दोबारा नियुक्ति दे दी है। विवि प्रशासन ने दैनिक श्रमिक दरों पर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है।
विवि प्रशासन ने आउटसोर्स और दैनिक वेतन पर कार्यरत 16 कर्मचारियों को 30 सितंबर 2019 को हड़ताल और विवि प्रशासन के आदेशों के उल्लंघन के आरोप में सेवा से हटा दिया था। कर्मचारियों की सेवा बहाली की मांग को लेकर स्थानीय लोगों के साथ कर्मचारियों ने कई बार विवि मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन भी किया। 13 अगस्त को कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में भी कार्यकर्ताओं ने धरना दिया था।
विश्वविद्यालय के कुलपति डा. पीपी ध्यानी ने बताया कि हटाए गए कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया था। 7-8 सालों तक विवि में सेवा देने के कारण उनका अन्यत्र कार्य करना भी मुश्किल हो रहा था। कुलपति ने बताया कि इन कर्मचारियों ने गलती को स्वीकारते हुए ऐसा दोबारा नहीं करने का भरोसा दिया। इसके बाद कुलपति डा. ध्यानी ने शासन में आउटसोर्स पदों के सृजन की मांग को प्रमुखता से उठाया। ताकि हटाए गए कर्मचारियों को दुबारा से नियुक्ति दी जा सके।
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कुलपति ने बताया कि यह प्रकरण अभी शासन में लंबित है। विवि में कर्मचारियों की लगातार कमी बनी हुई है। इस समस्या को देखते हुए कुलपति डा. ध्यानी ने गत माह विवि की कार्यपरिषद की बैठक में दैनिक श्रमिक दरों पर कर्मचारियों को नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा था। बैठक में इसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। कुलपति ने बताया कि मंगलवार को हटाए गए 16 कर्मचारियों को दोबारा नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
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विवि प्रशासन ने आउटसोर्स और दैनिक वेतन पर कार्यरत 16 कर्मचारियों को 30 सितंबर 2019 को हड़ताल और विवि प्रशासन के आदेशों के उल्लंघन के आरोप में सेवा से हटा दिया था। कर्मचारियों की सेवा बहाली की मांग को लेकर स्थानीय लोगों के साथ कर्मचारियों ने कई बार विवि मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन भी किया। 13 अगस्त को कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में भी कार्यकर्ताओं ने धरना दिया था।
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विश्वविद्यालय के कुलपति डा. पीपी ध्यानी ने बताया कि हटाए गए कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया था। 7-8 सालों तक विवि में सेवा देने के कारण उनका अन्यत्र कार्य करना भी मुश्किल हो रहा था। कुलपति ने बताया कि इन कर्मचारियों ने गलती को स्वीकारते हुए ऐसा दोबारा नहीं करने का भरोसा दिया। इसके बाद कुलपति डा. ध्यानी ने शासन में आउटसोर्स पदों के सृजन की मांग को प्रमुखता से उठाया। ताकि हटाए गए कर्मचारियों को दुबारा से नियुक्ति दी जा सके।
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कुलपति ने बताया कि यह प्रकरण अभी शासन में लंबित है। विवि में कर्मचारियों की लगातार कमी बनी हुई है। इस समस्या को देखते हुए कुलपति डा. ध्यानी ने गत माह विवि की कार्यपरिषद की बैठक में दैनिक श्रमिक दरों पर कर्मचारियों को नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा था। बैठक में इसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। कुलपति ने बताया कि मंगलवार को हटाए गए 16 कर्मचारियों को दोबारा नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू हो गई।