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कविताओं के माध्यम से उकेरा पहाड़ की पीड़ा को
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घनसाली (टिहरी)। गढ़ संस्कृति और स्थानीय लोक भाषा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से बैसाखी की पूर्व संध्या पर घनसाली में गढ़वाली कविता पाठ का आयोजन किया गया। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से गांवों से हो रहे पलायन, रोजगार का अभाव, शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी समस्याओं पर तंज कसे।
कवि सच्चिदानंद बडोनी ने कविता पाठ का शुभारंभ किया। कहा कि सांस्कृतिक शून्यता को तोड़ने के लिए समय-समय पर कविता पाठ का आयोजन होना आवश्यक है। कहा कि पलायन रोकने, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, जल, जंगल और जमीन जैसी बुनियादी समस्याओं के निस्तारण करने को सरकारें ठोस नीति नहीं बना पाई है। जनकवि नरेंद्र सिंह नेगी ‘गुंजन’ ने बढ़ते पलायन पर अपनी कविता ‘मेरा मन की बात औली ऐसु का मौल्यार में’ के माध्यम से पहाड़ की पीड़ा को उकेरा।
भजमोहन श्रीयाल ने पर्वतीय क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों को अपनी कविता ‘गंगा भागीरथी कु रूप देखी वरूणावत दरका पहाड़ मां’ के माध्यम से बयां किया। बेलीराम कंसवाल ने शिक्षा और रोजगार के लिए देहरादून की ओर से दौड़ को ‘गैं की घुघुती देखी काली पढ़ी सुबेर देहरादून मां’ के माध्यम से इंगित किया। डा. डीएस भंडारी ने ‘जाति धर्म के नाम पर कितने बार बटेगा देश’ कविता सुनाई। इस मौके पर लोकेंद्र जोशी, विजय रतूड़ी, अरविंद उनियाल, साहब सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन अध्यक्ष डा. मुकेश नैथानी ने किया।
कवि सच्चिदानंद बडोनी ने कविता पाठ का शुभारंभ किया। कहा कि सांस्कृतिक शून्यता को तोड़ने के लिए समय-समय पर कविता पाठ का आयोजन होना आवश्यक है। कहा कि पलायन रोकने, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, जल, जंगल और जमीन जैसी बुनियादी समस्याओं के निस्तारण करने को सरकारें ठोस नीति नहीं बना पाई है। जनकवि नरेंद्र सिंह नेगी ‘गुंजन’ ने बढ़ते पलायन पर अपनी कविता ‘मेरा मन की बात औली ऐसु का मौल्यार में’ के माध्यम से पहाड़ की पीड़ा को उकेरा।
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भजमोहन श्रीयाल ने पर्वतीय क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों को अपनी कविता ‘गंगा भागीरथी कु रूप देखी वरूणावत दरका पहाड़ मां’ के माध्यम से बयां किया। बेलीराम कंसवाल ने शिक्षा और रोजगार के लिए देहरादून की ओर से दौड़ को ‘गैं की घुघुती देखी काली पढ़ी सुबेर देहरादून मां’ के माध्यम से इंगित किया। डा. डीएस भंडारी ने ‘जाति धर्म के नाम पर कितने बार बटेगा देश’ कविता सुनाई। इस मौके पर लोकेंद्र जोशी, विजय रतूड़ी, अरविंद उनियाल, साहब सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन अध्यक्ष डा. मुकेश नैथानी ने किया।
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