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शहादत दिवस पर वीर गबर सिंह का किया भावपूर्ण स्मरण
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Gabar Singh Negi
- फोटो : amarujala
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चंबा (टिहरी)। विक्टोरिया क्रास विजेता गबर सिंह नेगी की शहादत दिवस पर गढ़वाल राइफल के जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान जवानों ने नगर स्थित युद्ध स्मारक में पुष्पचक्र चढ़ाकर वीर गबर सिंह को सलामी दी।
रविवार को गढ़वाल राइफल के जवानों ने नगर क्षेत्र में स्थित वीसी गबर सिंह स्मारक में पुष्पचक्र चढ़ाकर सलामी दी। गढ़वाल राइफल के सूबेदार सोहन सिंह ने शहीद की मूर्ति पर पुष्प चक्र अर्पित करते हुए कहा कि वीसी गबर सिंह के अदम्य साहस को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि भारत का सीना विश्व पटल पर ऊंचा किया था। कहा कि युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश सेवा के लिए आगे आना चाहिए।
पूर्व सैनिक संगठन के जिलाध्यक्ष इंद्र सिंह नेगी ने गबर सिंह ने बताया कि 21 अप्रैल को चंबा ब्लॉक के मंज्यूड गांव में हुआ था। वह छह अक्तूबर 1913 में गढ़वाल राइफल में भर्ती होने के बाद प्रथम विश्वयुद्ध 1914 में ब्रिटिश सेना की ओर से भेजी गई बटालियन द्वितीय के रणबांकुरों में शामिल थे। उन्होंने उस लड़ाई में जर्मनी की सेना के खिलाफ शौर्य और पराक्रम दिखाया। युद्ध में उन्हें वीरगति प्राप्त हुई थी। मरणोपरांत उन्हें विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया था। इस मौके पर साब सिंह सजवाण, शक्ति प्रसाद जोशी. विक्रम चौहान, यशपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
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रविवार को गढ़वाल राइफल के जवानों ने नगर क्षेत्र में स्थित वीसी गबर सिंह स्मारक में पुष्पचक्र चढ़ाकर सलामी दी। गढ़वाल राइफल के सूबेदार सोहन सिंह ने शहीद की मूर्ति पर पुष्प चक्र अर्पित करते हुए कहा कि वीसी गबर सिंह के अदम्य साहस को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि भारत का सीना विश्व पटल पर ऊंचा किया था। कहा कि युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश सेवा के लिए आगे आना चाहिए।
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पूर्व सैनिक संगठन के जिलाध्यक्ष इंद्र सिंह नेगी ने गबर सिंह ने बताया कि 21 अप्रैल को चंबा ब्लॉक के मंज्यूड गांव में हुआ था। वह छह अक्तूबर 1913 में गढ़वाल राइफल में भर्ती होने के बाद प्रथम विश्वयुद्ध 1914 में ब्रिटिश सेना की ओर से भेजी गई बटालियन द्वितीय के रणबांकुरों में शामिल थे। उन्होंने उस लड़ाई में जर्मनी की सेना के खिलाफ शौर्य और पराक्रम दिखाया। युद्ध में उन्हें वीरगति प्राप्त हुई थी। मरणोपरांत उन्हें विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया था। इस मौके पर साब सिंह सजवाण, शक्ति प्रसाद जोशी. विक्रम चौहान, यशपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
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