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चांठी-डोबरा पुल निर्माण पूरा होने की मिली अब एक और तारीख
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नई टिहरी। करीब 14 साल से निर्माणाधीन चांठी-डोबरा पुल निर्माण पूरा होने की एक तारीख और बढ़ गई है। कार्यदायी संस्था अब दिसंबर 2019 तक निर्माण कार्य पूरा होने का दावा कर रही है।
बांध प्रभावित प्रतापनगर क्षेत्र के लिए वर्ष 2006 में चांठी-डोबरा पुल का निर्माण शुरू हुआ था। करीब 89 करोड़ से बनने वाले पुल का निर्माण 2008 में पूरा होना था, लेकिन नहीं हुआ। वर्ष 2011-12 तक निर्माण पर करीब एक अरब 32 करोड़ खर्च कर दिए गए। बावजूद मुख्य पुल की डिजायन आईआईटी कडकपुर के क्रस चेकिंग में फेल हो गई। इसके बाद कोरियाई कंसलटेंस से करीब दस करोड़ में पुल का डिजायन तैयार करवाकर 2015 में एक अरब 49 करोड़ और स्वीकृत किए थे। फिर से पुल निर्माण की तिथि एक साल आगे बढ़ाते हुए अक्तूबर 2017 की गई। केंद्र सरकार के हिस्से का करीब 75 करोड़ न मिलने से पुल में देरी हुई। तब लोनिवि ने 31 दिसंबर 2018 तक पुल के ऊपर आवागमन का भरोसा दिया था। इस दौरान अगस्त 2018 में पुल के तीन संस्पेंडर टूट गए। सस्पेंडरों को टेस्टिंग के लिए रांची भेजा गया, जहां सस्पेंडरों के सॉकिटों पर तकनीकी कमी पाई गई। विशेषज्ञों ने सभी 18 सौ सॉकिटों को एक-एक करके टेस्टिंग कर लगाने की सलाह दी। लोनिवि अब 2019 तक पुल निर्माण पूरा होने का दावा कर रहा है। ईई केएस असवाल का कहना है कि वर्तमान में सॉकिटों के फेब्रिकेशन और एंकर ब्लाक का काम चल रहा है। करीब एक हजार सॉकिट लगाए जा चुके हैं। 99 करोड़ और खर्च हो चुके हैं। दिसंबर 2019 तक पुल निर्माण पूरा हो जाएगा।
बांध प्रभावित प्रतापनगर क्षेत्र के लिए वर्ष 2006 में चांठी-डोबरा पुल का निर्माण शुरू हुआ था। करीब 89 करोड़ से बनने वाले पुल का निर्माण 2008 में पूरा होना था, लेकिन नहीं हुआ। वर्ष 2011-12 तक निर्माण पर करीब एक अरब 32 करोड़ खर्च कर दिए गए। बावजूद मुख्य पुल की डिजायन आईआईटी कडकपुर के क्रस चेकिंग में फेल हो गई। इसके बाद कोरियाई कंसलटेंस से करीब दस करोड़ में पुल का डिजायन तैयार करवाकर 2015 में एक अरब 49 करोड़ और स्वीकृत किए थे। फिर से पुल निर्माण की तिथि एक साल आगे बढ़ाते हुए अक्तूबर 2017 की गई। केंद्र सरकार के हिस्से का करीब 75 करोड़ न मिलने से पुल में देरी हुई। तब लोनिवि ने 31 दिसंबर 2018 तक पुल के ऊपर आवागमन का भरोसा दिया था। इस दौरान अगस्त 2018 में पुल के तीन संस्पेंडर टूट गए। सस्पेंडरों को टेस्टिंग के लिए रांची भेजा गया, जहां सस्पेंडरों के सॉकिटों पर तकनीकी कमी पाई गई। विशेषज्ञों ने सभी 18 सौ सॉकिटों को एक-एक करके टेस्टिंग कर लगाने की सलाह दी। लोनिवि अब 2019 तक पुल निर्माण पूरा होने का दावा कर रहा है। ईई केएस असवाल का कहना है कि वर्तमान में सॉकिटों के फेब्रिकेशन और एंकर ब्लाक का काम चल रहा है। करीब एक हजार सॉकिट लगाए जा चुके हैं। 99 करोड़ और खर्च हो चुके हैं। दिसंबर 2019 तक पुल निर्माण पूरा हो जाएगा।
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