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अब मधुमक्खियों की आबादी का चल सकेगा पता
Updated Tue, 16 Oct 2018 10:36 PM IST
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चंबा (टिहरी)। फसलों का उत्पादन बढ़ाने में मधुमक्खियां मददगार होती हैं। कृषि क्षेत्र में फल और सब्जियों की अच्छी पैदावार मधुमक्खियों पर निर्भर करती है। यही कारण है कि मधुमक्खियों को किसानों का मित्र भी कहा जाता है। मगर अभी तक मधुमक्खियों की आबादी के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अब उद्यान विभाग ने मधुमक्खियों का डाटा बेस तैयार करना शुरू कर दिया है।
टिहरी जिले में चंबा और आसपास के क्षेत्र में एपिस इंडिका प्रजाति की मधुमक्खी पाई जाती है। शहद देने के साथ ही मधुमक्खियां किसानों के लिए खाद्य उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा बढ़ाने में सहयोग करती हैं। सेब, खीरा, कद्दू, लौकी, अखरोट, कीवी, नाशपाती आदि फल-सब्जियों में परागण मधुमक्खियों के द्वारा ही होता है। उत्पादन को बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग ने मधुमक्खियों की संख्या को जानने के लिए डाटा बेस बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। चिपको आंदोलन के नेता धूम सिंह नेगी का कहना है कि फलों, सब्जियों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की निर्भरता परागण पर होती है। बताया कि मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएश्न से मधुमक्खियां रास्ता भूल जाती हैं। साथ ही सीमेंट के पक्के मकानों में मधुमक्खियां नहीं रहती हैं।
जनपद में मधुमक्खियों की स्थिति जानने के लिए डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इसके बाद मधुमक्खियों की वास्तविक स्थिति का पता चल जाएगा। समय-समय पर ग्रामीणों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी किए जाते हैं
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-डॉ. डीके तिवारी, डीएचओ टिहरी
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टिहरी जिले में चंबा और आसपास के क्षेत्र में एपिस इंडिका प्रजाति की मधुमक्खी पाई जाती है। शहद देने के साथ ही मधुमक्खियां किसानों के लिए खाद्य उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा बढ़ाने में सहयोग करती हैं। सेब, खीरा, कद्दू, लौकी, अखरोट, कीवी, नाशपाती आदि फल-सब्जियों में परागण मधुमक्खियों के द्वारा ही होता है। उत्पादन को बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग ने मधुमक्खियों की संख्या को जानने के लिए डाटा बेस बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। चिपको आंदोलन के नेता धूम सिंह नेगी का कहना है कि फलों, सब्जियों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की निर्भरता परागण पर होती है। बताया कि मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएश्न से मधुमक्खियां रास्ता भूल जाती हैं। साथ ही सीमेंट के पक्के मकानों में मधुमक्खियां नहीं रहती हैं।
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जनपद में मधुमक्खियों की स्थिति जानने के लिए डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इसके बाद मधुमक्खियों की वास्तविक स्थिति का पता चल जाएगा। समय-समय पर ग्रामीणों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी किए जाते हैं
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-डॉ. डीके तिवारी, डीएचओ टिहरी