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मदद के लिए दर-दर भटक रहा यह नौजवान
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:04 PM IST
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नई टिहरी। ऊर्जा निगम की लापरवाही से वर्ष 2007 में दोनों हाथ गवां चुका एक नौजवान मदद के लिए दर-दर भटक रहा है। डीएम से लेकर सीएम दरबार तक मदद की गुहार लगा चुके युवक पर किसी को भी तरस नहीं आ रहा है। ऐसे में वह दोस्तों के रहमों-करम पर पेट पालने को मजबूर हैं। मुफलिसी में जीवन यापन कर रहा परिवार भी उस समय करंट से झुलसने के दौरान सिर पर आई चोट का इलाज भी नहीं करा पा रहा है।
चंबा ब्लॉक में मंज्यूड़ गांव के प्रताप सिंह नेगी का मंजला बेटा राजेंद्र सिंह (24) 24 जुलाई 2007 को एसडीएस इंटर कालेज के पास बैल चुंगा रहा था। खेलते समय वह कालेज के पीछे पानी की टंकी पर चढ़ गया था। इस दौरान वह झूलती विद्युत लाइन की चपेट में आने से झुलस गया था। उसके सिर-पैर में भी गंभीर चोट लग गई थी। दून अस्पताल में इलाज के दौरान उसके दोनों हाथ काटने पड़े, लेकिन सिर का इलाज नहीं होने से अभी भी राजेंद्र के सिर में अक्सर दर्द रहता है। ऊर्जा निगम ने इलाज के लिए 13 हजार रुपये देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ दिया। दोनों हाथ कटने पर कक्षा आठ से आगे की पढ़ाई भी छूट गई। गरीबी से जूझ रहा परिवार उसके सिर का इलाज भी नहीं कर पा रहा हैं। फुटबॉल खेलने के शॉकीन सौकीन राजेंद्र ने बताया कि डीएम से लेकर सीएम तक मदद की गुहार लगा चुका हूं, लेकिन निराशा ही मिल रही है। उसने बताया कि कभी दोस्तों की दुकान पर काम कर खर्चा निकाल रहा हूं। राजेंद्र अच्छी तरह से लिखता है और मोबाइल का इस्तेमाल भी कर लेता है। बावजूद शासन-प्रशासन उसे कोई रोजगार नहीं दे पा रहा है।
राजेंद्र के दोनों हाथ नहीं है, जिससे दिक्कतें आ रही है। पीआरडी में भी ट्रेंड युवाओं को ही रोजगार दिया जा रहा है। बावजूद कोशिश कर रहे हैं कि उसे किस तरह मदद दी जा सकती है।
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-सोनिका, डीएम टिहरी।
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चंबा ब्लॉक में मंज्यूड़ गांव के प्रताप सिंह नेगी का मंजला बेटा राजेंद्र सिंह (24) 24 जुलाई 2007 को एसडीएस इंटर कालेज के पास बैल चुंगा रहा था। खेलते समय वह कालेज के पीछे पानी की टंकी पर चढ़ गया था। इस दौरान वह झूलती विद्युत लाइन की चपेट में आने से झुलस गया था। उसके सिर-पैर में भी गंभीर चोट लग गई थी। दून अस्पताल में इलाज के दौरान उसके दोनों हाथ काटने पड़े, लेकिन सिर का इलाज नहीं होने से अभी भी राजेंद्र के सिर में अक्सर दर्द रहता है। ऊर्जा निगम ने इलाज के लिए 13 हजार रुपये देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ दिया। दोनों हाथ कटने पर कक्षा आठ से आगे की पढ़ाई भी छूट गई। गरीबी से जूझ रहा परिवार उसके सिर का इलाज भी नहीं कर पा रहा हैं। फुटबॉल खेलने के शॉकीन सौकीन राजेंद्र ने बताया कि डीएम से लेकर सीएम तक मदद की गुहार लगा चुका हूं, लेकिन निराशा ही मिल रही है। उसने बताया कि कभी दोस्तों की दुकान पर काम कर खर्चा निकाल रहा हूं। राजेंद्र अच्छी तरह से लिखता है और मोबाइल का इस्तेमाल भी कर लेता है। बावजूद शासन-प्रशासन उसे कोई रोजगार नहीं दे पा रहा है।
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राजेंद्र के दोनों हाथ नहीं है, जिससे दिक्कतें आ रही है। पीआरडी में भी ट्रेंड युवाओं को ही रोजगार दिया जा रहा है। बावजूद कोशिश कर रहे हैं कि उसे किस तरह मदद दी जा सकती है।
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-सोनिका, डीएम टिहरी।