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पेयजल निगम के अधिकारियों पर निलंबन की तलवार लटकनी तय
Updated Sat, 28 Jul 2018 11:20 PM IST
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नई टिहरी। भिलंगना ब्लॉक के मरवाड़ी गांव में स्वैप योजना के तहत निर्मित पेयजल योजना में गड़बड़ी करने वाले पेयजल निगम के ईई, एई, जेई, पूर्व प्रधान और ग्रामीण पेयजल समिति के कोषाध्यक्ष पर कार्रवाई की तलवार लटकनी तय है। जिला प्रशासन अधिकारियों का निलंबन करने और पूर्व प्रधान, कोषाध्यक्ष पर एफआईआर दर्ज करने और वसूली की तैयारी कर रहा है। इसके लिए जांच रिपोर्ट का तकनीकी परीक्षण और कानूनी तौर पर राय ली जा रहा है। दो-तीन दिन के अंदर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई होने की संभावना है।
भिलंगना के दूरस्थ गांव मरवाड़ी में स्वैप के तहत वर्ष 2011-12 में 74 लाख 42 हजार की लागत से योजना स्वीकृत हुई थी। तीन साल के अंदर योजना का निर्माण पूरा होना था, लेकिन जल निगम ने 2014 में अधूरी योजना को ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी। निर्माण के नाम पर केवल तीन किमी पेयजल लाइन ही बिछाई गई, जबकि खैंणी, मज्याड़ा, जराल, भेकुईडी आदि तोकों में स्टैंड पोस्ट और पाइप लाइन नहीं बिछाई गई। ग्रामीण राजपाल पंवार ने मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर योजना निर्माण पूरा न होने की शिकायत दर्ज की थी, जिसका संज्ञान लेते हुए डीएम एवं सीडीओ ने एसडीएम घनसाली, तहसीलदार और डीआरडीए के परियोजना अधिकारी की जांच करवाई। जांच में 64 लाख 76 हजार को बिना गांव में पानी पहुंचाए ही खर्च करने का खुलासा हुआ है।
शनिवार को सीडीओ आशीष भटगांई ने जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया। उन्होंने बताया कि पेयजल योजना निर्माण में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। इसमें जल निगम घनसाली के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता से लेकर गांव के तत्कालीन प्रधान, ग्रामीण पेयजल समिति के कोषाध्यक्ष दोषी हैं। बताया कि जांच रिपोर्ट का तकनीकी परीक्षण कर कानूनी राय ली जाएगी, जिसके बाद संबंधितों का निलंबन से लेकर सरकारी धन की वसूली और एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। बताया कि इस कार्रवाई में दो-तीन का वक्त लग सकता है।
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भिलंगना के दूरस्थ गांव मरवाड़ी में स्वैप के तहत वर्ष 2011-12 में 74 लाख 42 हजार की लागत से योजना स्वीकृत हुई थी। तीन साल के अंदर योजना का निर्माण पूरा होना था, लेकिन जल निगम ने 2014 में अधूरी योजना को ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी। निर्माण के नाम पर केवल तीन किमी पेयजल लाइन ही बिछाई गई, जबकि खैंणी, मज्याड़ा, जराल, भेकुईडी आदि तोकों में स्टैंड पोस्ट और पाइप लाइन नहीं बिछाई गई। ग्रामीण राजपाल पंवार ने मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर योजना निर्माण पूरा न होने की शिकायत दर्ज की थी, जिसका संज्ञान लेते हुए डीएम एवं सीडीओ ने एसडीएम घनसाली, तहसीलदार और डीआरडीए के परियोजना अधिकारी की जांच करवाई। जांच में 64 लाख 76 हजार को बिना गांव में पानी पहुंचाए ही खर्च करने का खुलासा हुआ है।
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शनिवार को सीडीओ आशीष भटगांई ने जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया। उन्होंने बताया कि पेयजल योजना निर्माण में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। इसमें जल निगम घनसाली के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता से लेकर गांव के तत्कालीन प्रधान, ग्रामीण पेयजल समिति के कोषाध्यक्ष दोषी हैं। बताया कि जांच रिपोर्ट का तकनीकी परीक्षण कर कानूनी राय ली जाएगी, जिसके बाद संबंधितों का निलंबन से लेकर सरकारी धन की वसूली और एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। बताया कि इस कार्रवाई में दो-तीन का वक्त लग सकता है।
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