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आफत बनकर बरस रही बारिश, 19 संपर्क मार्ग बंद
Updated Sat, 28 Jul 2018 11:04 PM IST
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गढ़वाल। तीन दिन से लगातार हो रही बारिश से पहाड़ में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जगह-जगह सड़कें बंद होने से जहां लोगों को मीलों पैदल दूरी नापनी पड़ रही है, वहीं जरूरी सामन की आपूर्ति भी बाधित हो गई है। भूस्खलन से पहाड़ में करीब 134 मोटर मार्गों पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है, जिससे कई गांवों का आपसी संपर्क टूटने के साथ ही अलग-थलग पड़ गए हैं। स्थिति यह है कि कई गांवों में तो जरूरी सामान की किल्लत पैदा होने लग गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से जगह-जगह जेसीबी रखी गई है, लेकिन मलबा गिरने से सड़कों पर यातायात सुचारु नहीं हो पा रही है।
टिहरी जिले के 19 संपर्क मार्ग बंद
जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त, नदियां उफान पर
ड्रनेज सिस्टम हुआ फेल, सड़कों पर बह रहा नालियों का पानी
अमर उजाला ब्यूरो
नई टिहरी। पर्वतीय क्षेत्रों में 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश आफत बनकर बरस रही है। बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां और गाड़ गदेरे उफान पर हैं। टिहरी जिले के 19 संपर्क मार्ग यातायात के लिए बाधित हो गए हैं। जौनपुर ब्लॉक में दो मकान क्षतिग्रस्त हो गए। नई टिहरी के बौराड़ी में निर्माणाधीन पार्किंग स्थल पर भूस्खलन होने से एक होटल खतरे की जद में आ गया है। पुलिस प्रशासन ने होटल को खाली करवा दिया है।
भिलंगना, बालगंगा, जलकुर और अगलाड़ नदी और अन्य गाड़ गदेरों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। नई टिहरी में पालिका का ड्रनेज सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया है। सड़क किनारे बनी नालियां चौक होने से पानी सड़कों पर बह रहा है। लंबगांव-उत्तरकाशी मार्ग बीते दिन से यातायात के लिए नहीं खुल पाया है। राजराजेश्वरी मंदिर के समीप सड़क का पुश्ता ढहने से वाहनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। लंबगांव से उत्तरकाशी जाने वाले लोगों को बायां बिजपुर-पनियाला मार्ग से आवागमन करना पड़ रहा है।
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बारिश से शनिवार सुबह जौनपुर ब्लॉक के थापला में सिरा देवी का मकान टूट गया। ग्राम मखडेत में सुरेश सिंह रावत का निर्माणाधीन मकान क्षतिग्रस्त हो गया। प्रतापनगर क्षेत्र में जलकुर नदी उफान पर आने से पिपलोगी गांव के ग्रामीणों का शमशान घाट और संपर्क मार्ग टूट गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति ठप
गोपेश्वर/रुद्रप्रयाग। जिले में 20 ग्रामीण सड़कें बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों को मीलों दूरी पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। सबसे अधिक दिक्कत थराली, देवाल और निजमूला घाटी के ग्रामीणों को हो रही है। यहां एक सप्ताह से सड़कें बंद हैं और सड़कों के न खुलने से रसद और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी ठप पड़ गई है।
बारिश से मलबा आने से निजमूला-पाणा-ईराणी सड़क आठ दिनों और थराली-देवाल-मुंदोली, धुर्मा-कुंडी, सैरा-मोख, रानौ-सिमखोली, थराली-जूनीधार, कनकचौंरी-पोगठा, लासी-सरतोली जैसी महत्वपूर्ण सड़कें कई दिनों से बंद पड़ी हैं। पीएमजीएसवाई की ओर से पुल से आवाजाही पर कोई रोक भी नहीं लगाई गई है। पोखरी क्षेत्र में हापला घाटी के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला हापला-कलसिर मोटर मार्ग भी कई जगहों पर खस्ताहाल है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि सड़कों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की ओर से जेसीबी लगाई गई हैं। उधर, रुद्रप्रयाग में मलबा आने से करीब नौ सड़कों पर यातायात अवरुद्ध है।
पौड़ी में 27 और कोटद्वार में 33 सड़कें बंद
पौड़ी/कोटद्वार। मंडल मुख्यालय और आस पास के क्षेत्रों में शुक्रवार रात और शनिवार पूरे दिन बारिश होती रही, इससे जनपद के विभिन्न मार्गों में मलबा आने से 27 मोटर मार्ग बंद हो गए। डीएम सुशील कुमार ने संबंधित अधिकारियों को बंद मार्ग खोलने के निर्देश दिए हैं। जिले में बारिश ने जमकर कहर बरपाया है। शनिवार को पूरे दिन बारिश होती रही। इससे जनजीवन प्रभावित रहा। वही मोटर मार्गों में जगह-जगह मलबा आ गया है। वहीं कोटद्वार क्षेत्र में शुक्रवार रात से हो रही बारिश से जहां एक ओर पहाड़ी क्षेत्रों में मलबा आने से सड़कें बाधित हो गई हैं, वहीं आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोग डरे सहमे हुए हैं। भारी बारिश से कोटद्वार, दुगड्डा, यमकेश्वर, लैंसडौन, नैनीडांडा, बीरोंखाल, रिखणीखाल क्षेत्र की 33 सड़कें बाधित हो गई हैं। शुक्रवार रात से हो रही बारिश से दुगड्डा और यमकेश्वर ब्लाक के ऐता-चरेख मोटर मार्ग, कांडी-लक्ष्मण झूला मोटर मार्ग समेत करीब आठ मोटर मार्ग बंद होने से करीब तीन सौ से अधिक गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है।
भूस्खलन से उत्तरकाशी मेें 26 लिंक मोटर मार्ग
उत्तरकाशी। मानसून की बारिश जिले के बदहाल लिंक मोटर मार्गों पर भारी पड़ रही है। तीन दिन से जारी बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन और भूधंसाव से जिले की 26 सड़कें अवरुद्ध हो गई।
सूचना पर लोनिवि एवं पीएमजीएसवाई आदि सड़क निर्माण से जुड़े विभागों ने जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन इनमें से 18 सड़कों पर यातायात बहाल कर लिए जाने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि बारिश के साथ बार-बार मलबा आने और पहाड़ी से भूस्खलन का खतरा बना रहने के कारण अधिकांश सड़कों पर सुरक्षित यातायात लायक सड़क नहीं बन पायी है, जबकि राजगढ़ी-सरनौल, बड़कोट-चक्रगांव-कंसेरू, नौगाचंव-कुर्सिल, खरादी-नगाणगांव, खरसाड़ी-जेवाणू, गंगोरी-संगमचट्टी आदि कई सड़कों पर यातायात चालू नहीं होने से लोगों को खासी दिक्कत हो रही है।
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टिहरी जिले के 19 संपर्क मार्ग बंद
जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त, नदियां उफान पर
ड्रनेज सिस्टम हुआ फेल, सड़कों पर बह रहा नालियों का पानी
अमर उजाला ब्यूरो
नई टिहरी। पर्वतीय क्षेत्रों में 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश आफत बनकर बरस रही है। बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां और गाड़ गदेरे उफान पर हैं। टिहरी जिले के 19 संपर्क मार्ग यातायात के लिए बाधित हो गए हैं। जौनपुर ब्लॉक में दो मकान क्षतिग्रस्त हो गए। नई टिहरी के बौराड़ी में निर्माणाधीन पार्किंग स्थल पर भूस्खलन होने से एक होटल खतरे की जद में आ गया है। पुलिस प्रशासन ने होटल को खाली करवा दिया है।
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भिलंगना, बालगंगा, जलकुर और अगलाड़ नदी और अन्य गाड़ गदेरों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। नई टिहरी में पालिका का ड्रनेज सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया है। सड़क किनारे बनी नालियां चौक होने से पानी सड़कों पर बह रहा है। लंबगांव-उत्तरकाशी मार्ग बीते दिन से यातायात के लिए नहीं खुल पाया है। राजराजेश्वरी मंदिर के समीप सड़क का पुश्ता ढहने से वाहनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। लंबगांव से उत्तरकाशी जाने वाले लोगों को बायां बिजपुर-पनियाला मार्ग से आवागमन करना पड़ रहा है।
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बारिश से शनिवार सुबह जौनपुर ब्लॉक के थापला में सिरा देवी का मकान टूट गया। ग्राम मखडेत में सुरेश सिंह रावत का निर्माणाधीन मकान क्षतिग्रस्त हो गया। प्रतापनगर क्षेत्र में जलकुर नदी उफान पर आने से पिपलोगी गांव के ग्रामीणों का शमशान घाट और संपर्क मार्ग टूट गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति ठप
गोपेश्वर/रुद्रप्रयाग। जिले में 20 ग्रामीण सड़कें बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों को मीलों दूरी पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। सबसे अधिक दिक्कत थराली, देवाल और निजमूला घाटी के ग्रामीणों को हो रही है। यहां एक सप्ताह से सड़कें बंद हैं और सड़कों के न खुलने से रसद और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी ठप पड़ गई है।
बारिश से मलबा आने से निजमूला-पाणा-ईराणी सड़क आठ दिनों और थराली-देवाल-मुंदोली, धुर्मा-कुंडी, सैरा-मोख, रानौ-सिमखोली, थराली-जूनीधार, कनकचौंरी-पोगठा, लासी-सरतोली जैसी महत्वपूर्ण सड़कें कई दिनों से बंद पड़ी हैं। पीएमजीएसवाई की ओर से पुल से आवाजाही पर कोई रोक भी नहीं लगाई गई है। पोखरी क्षेत्र में हापला घाटी के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला हापला-कलसिर मोटर मार्ग भी कई जगहों पर खस्ताहाल है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि सड़कों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की ओर से जेसीबी लगाई गई हैं। उधर, रुद्रप्रयाग में मलबा आने से करीब नौ सड़कों पर यातायात अवरुद्ध है।
पौड़ी में 27 और कोटद्वार में 33 सड़कें बंद
पौड़ी/कोटद्वार। मंडल मुख्यालय और आस पास के क्षेत्रों में शुक्रवार रात और शनिवार पूरे दिन बारिश होती रही, इससे जनपद के विभिन्न मार्गों में मलबा आने से 27 मोटर मार्ग बंद हो गए। डीएम सुशील कुमार ने संबंधित अधिकारियों को बंद मार्ग खोलने के निर्देश दिए हैं। जिले में बारिश ने जमकर कहर बरपाया है। शनिवार को पूरे दिन बारिश होती रही। इससे जनजीवन प्रभावित रहा। वही मोटर मार्गों में जगह-जगह मलबा आ गया है। वहीं कोटद्वार क्षेत्र में शुक्रवार रात से हो रही बारिश से जहां एक ओर पहाड़ी क्षेत्रों में मलबा आने से सड़कें बाधित हो गई हैं, वहीं आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोग डरे सहमे हुए हैं। भारी बारिश से कोटद्वार, दुगड्डा, यमकेश्वर, लैंसडौन, नैनीडांडा, बीरोंखाल, रिखणीखाल क्षेत्र की 33 सड़कें बाधित हो गई हैं। शुक्रवार रात से हो रही बारिश से दुगड्डा और यमकेश्वर ब्लाक के ऐता-चरेख मोटर मार्ग, कांडी-लक्ष्मण झूला मोटर मार्ग समेत करीब आठ मोटर मार्ग बंद होने से करीब तीन सौ से अधिक गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है।
भूस्खलन से उत्तरकाशी मेें 26 लिंक मोटर मार्ग
उत्तरकाशी। मानसून की बारिश जिले के बदहाल लिंक मोटर मार्गों पर भारी पड़ रही है। तीन दिन से जारी बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन और भूधंसाव से जिले की 26 सड़कें अवरुद्ध हो गई।
सूचना पर लोनिवि एवं पीएमजीएसवाई आदि सड़क निर्माण से जुड़े विभागों ने जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन इनमें से 18 सड़कों पर यातायात बहाल कर लिए जाने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि बारिश के साथ बार-बार मलबा आने और पहाड़ी से भूस्खलन का खतरा बना रहने के कारण अधिकांश सड़कों पर सुरक्षित यातायात लायक सड़क नहीं बन पायी है, जबकि राजगढ़ी-सरनौल, बड़कोट-चक्रगांव-कंसेरू, नौगाचंव-कुर्सिल, खरादी-नगाणगांव, खरसाड़ी-जेवाणू, गंगोरी-संगमचट्टी आदि कई सड़कों पर यातायात चालू नहीं होने से लोगों को खासी दिक्कत हो रही है।